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Loktak: पानी पर बसा वो चमत्कार जहां ज़मीन तैरती है और हिरन नाचते हैं, वो झील जो हौसलों को उड़ान देती है

 मणिपुर की हरी-भरी वादियों के बीच लोकतक झील (Loktak Lake) प्रकृति का वो अनमोल तोहफा है, जहां ज़मीन खुद तैरती है। दूर से देखने पर ये विशाल कमल के पत्तों का समंदर लगता है, लेकिन करीब से देखो तो पता चलता है, ये गोल-गोल तैरते टापू (Round, floating islands) हैं, जो अपने आप में एक अनोखा करिश्मा हैं।

फुमदी: पानी पर बसा गांव

इन तैरते टापुओं को यहां फुमदी (Phumdi) कहते हैं। ये मिट्टी, घास, जड़ों और सड़े-गले पौधों से बनी एक ज़िंदा परत है। जितना नरम और स्पंज की तरह तैरता है ये, उतना ही मज़बूत और भरोसेमंद भी। इतना मज़बूत कि इस पर मकान बन जाएं। यहां के मलाह समुदाय (मल्लाह) सदियों से इन फुमदियों पर खुशहाली के साथ रह रहे हैं। उनके लिए ये डगमगाती ज़मीन ही उनका सब कुछ है, घर, गली, चौक और आसमान।

Image-Wikipedia

दुनिया का इकलौता तैरता नेशनल पार्क

लोकतक के सीने पर बसा है केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क (Keibul Lamjao National Park), ये दुनिया का इकलौता तैरता राष्ट्रीय पार्क है। करीब 40 वर्ग किमी में फैले इस पार्क में 6 वर्ग किमी फुमदी ही फुमदी हैं।
NASA के आंकड़े बताते हैं कि यहां 200 से ज़्यादा क़िस्म के पानीदार पौधे और 400 तरह के जानवर पनाह पाते हैं। यहां का इंडियन अजगर दुनिया के सबसे लंबे सांपों में शुमार (The Indian Python ranks among the world’s longest snakes) है। लेकिन असली चमकती चीज़ है…

Dancing Deer-जहां हिरन ‘नाचना’ सीखते हैं

सांगई हिरन (Brown-antlered Deer)-जिसे प्यार से ‘Dancing Deer’ कहा जाता है। 1950 तक ये लगभग खत्म हो ही गया था। लेकिन मणिपुर सरकार और वहां के लोगों की कोशिशों से आज ये हिरन फिर से नाचने लगा है। फुमदियों पर उसकी चाल ऐसी होती है, जैसे कोई शास्त्रीय नृत्य हो। इसीलिए उसे नाचता हिरन कहते हैं। यहां के लोग भी फुमदी पर चलते हुए उसी अंदाज़ में क़दम बढ़ाते हैं, धीरे, संभलकर, थिरकते हुए।

Image-Wikipedia

ये नाच अब भी जारी है। और यही इस कहानी का सबसे खूबसूरत पहलू है।

मुश्किलें हैं, मगर हौसला बड़ा है

जी हां, 1980 के दशक में इथाई बांध बनने से झील का पानी हमेशा ऊंचा हो गया। फुमदियों की जड़ें नीचे तक नहीं पहुँच पातीं। वे धीरे-धीरे पतली हो रही हैं, ये सच है।

लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती।

अब स्थानीय लोग, वैज्ञानिक और प्रशासन मिलकर इन फुमदियों को बचाने के नए ज़रिए खोज रहे हैं। फुमदियों को कृत्रिम पोषण देने के तरीकों पर काम हो रहा है। केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर Rehabilitation Schemes चला रहे हैं। सांगई हिरन की संख्या बढ़ रही है और ये सबसे बड़ी ख़ुशखबरी है।

आख़िरी बात

लोकतक की फुमदियां आज भी तैर रही हैं। हिरन आज भी नाच रहे हैं। मलाह समुदाय आज भी मुस्कुरा रहा है। हां, फुमदियां पतली ज़रूर हुई हैं, लेकिन वे हारी नहीं हैं। और न ही हम हारने वाले हैं।

नोट- इस लेख के डेटा NASA, IUCN और मणिपुर वन विभाग के रिपोर्ट्स पर आधारित है।

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