लुधियाना ज़िले के गांव मकसूदड़ा के बाहर मौजूद Gurdwara Tapoban Dhakhi Sahib (गुरुद्वारा तपोबन ढक्की साहिब) आज एक ऐसा पाक और रूहानी मुक़ाम बन चुका है, जहां आने वाले इंसान को एक अलग तरह का सुकून और रूहानी खुशी महसूस होती है। इस जगह की सबसे बड़ी ख़ासियत है कि ये पूरी तरह क़ुदरत की गोद में बसा हुआ है। मान्यता है कि इस रूहानी माहौल में जो भी जीव-जंतु यहां आते हैं, वो गुरु साहिब की शरण में आकर अपनी हिंसक फ़ितरत को पूरी तरह छोड़ देते हैं। यहां जंगली जानवर भी आपस में अमन और सुकून से रहते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और तपोभूमि
Gurdwara Tapoban Dhakhi Sahib (गुरुद्वारा तपोबन ढक्की साहिब) का इतिहास सदियों पुराने उस जंगल से जुड़ा है, जिसे ‘ढक्की’ के नाम से जाना जाता था। इस घने जंगल की रौनक तब और बढ़ी, जब 1986-87 में संत बाबा दर्शन सिंह जी खालसा यहां आए। बाबा जी पर बचपन से ही अकाल पुरख की अपार कृपा थी। उन्होंने इस सुनसान ढक्की को अपनी कर्मभूमि बनाया और कई सालों तक यहां वाहेगुरु का नाम जपा। धीरे-धीरे बाबा जी की इबादत और साधना की चर्चा दूर-दूर तक फैलने लगी। उनकी रूहानी शख्सियत से प्रभावित होकर इस तपोभूमि पर दूर-दूर से संगत आने लगी और देखते ही देखते यहां लाखों श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो गया।

नाम सिमरन और क़ुदरती माहौल
‘तपोबन’ का मतलब ऐसी जगह है, जहां बैठकर रब की इबादत की जाए और नाम जपा जाए। Gurdwara Tapoban Dhakhi Sahib (गुरुद्वारा तपोबन ढक्की साहिब) का पूरा माहौल इस पर पूरी तरह खरा उतरता है। यहां का माहौल बेहद पुरसुकून, साफ़ और रूहानियत से भरपूर है। यहां आने वाली संगत के लिए हर वक़्त गुरु का लंगर अटूट चलता रहता है। सिख धर्म की शिक्षाओं के मुताबिक, इस मुक़ाम के माहौल को पाक और हरा-भरा रखना ही असली सेवा माना जाता है।
इसी वजह से यहां क़ुदरत के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई है। इस रूहानी मुकाम पर पहुंचकर इंसान को मानसिक तनाव से काफी राहत मिलती है। यहां की पाक हवा और सुकून हर श्रद्धालु के दिल को इत्मीनान देते हैं। जंगल की खूबसूरती और परिंदों की चहचहाहट नाम सिमरन के असर को और बढ़ा देती है। यहां आने वाला हर शख्स रब की रज़ा और क़ुदरत के असली रंग में रंग जाता है।

गुरमत प्रचार और समाज की भलाई के काम
संगत की भावनाओं और ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, संत बाबा दर्शन सिंह जी ने देश-विदेश में गुरमत प्रचार के साथ-साथ समाज की भलाई के लिए कई बड़े काम शुरू किए हैं। बाबा जी अपने उपदेशों के ज़रिए हर इंसान को अपने-अपने धर्म में पक्का रहने, धर्म के मुताबिक मेहनत करने, नाम जपने और मिल-बांटकर खाने की सीख देते हैं।
इसके साथ ही, वो समाज से ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाने, वहम-भ्रम और नशे से दूर रहने, पर्यावरण की हिफ़ाज़त करने, बड़ों का सम्मान करने और दुनिया में अमन और आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए संगत को लगातार प्रेरित करते हैं। अगर आप भी आज की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी में सच्चे सुकून और रूहानी शांति की तलाश में हैं, तो Gurdwara Tapoban Dhakhi Sahib (गुरुद्वारा तपोबन ढक्की साहिब) के दर्शन ज़रूर करें और इस रूहानी मुकाम के इलाही आनंद को महसूस करें।
स्टोरी– मनमीत कौर
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