Monday, May 11, 2026
36.1 C
Delhi

महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी: ‘हिजाबी ट्रैकर’ हाइका अवती

हिजाबी ट्रैकर के नाम से उभर रही हाइका अवती ट्रैकिंग के ज़रिए अपनी एक अलग पहचान बना रही हैं। उन्होंने शिव जन्मस्थान किला शिवनेरी में छत्रपति शिवाजी महाराज को याद करके अपनी ट्रैकिंग यात्रा शुरू की। अब तक वो तोरणा, हरिश्चंद्रगढ़, कोरीगाड, कोकंदीवा, राजमाची, भुइकोट, समुद्री किले, पर्वतीय किले जैसी कई जगहों पर घूम-घूमकर जानकारी इकट्ठा कर चुकी हैं।

हाइका का सोशल मीडिया पर ‘हिजाबी ट्रैकर’ नाम से एक चैनल है। उनके travel व्लॉग यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर भी काफी popular हैं। वो अपने सोशल मीडिया के ज़रिए महाराष्ट्र की संस्कृति, किलों के इतिहास को बताने की कोशिश करती हैं। महाराष्ट्र के समृद्ध इतिहास वाले जुन्नर तालुका में जन्मी हाइका को बचपन से ही किलों के बारे में जानने का शौक था। हाइका को स्कूल के दिनों से ही आउटडोर खेलों में रूचि थी। हाइका महज़ नौ साल की उम्र से ही तायक्वोंडो का अभ्यास कर रही हैं।

महिलाओं के लिए ट्रैकिंग ग्रुप खोलने का है सपना

हाइका का बचपन गाँव में बीता। उनके समुदाय में खेल और ट्रैकिंग लोकप्रिय हैं। महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा दर कम है। ऐसे में उन्होंने खेल के प्रति अपने जुनून को बरकरार रखते हुए अपनी शिक्षा पूरी की।

उन्हे खेलने की प्रेरणा कैसे मिली इस बारे में आवाज़ द वॉयस को हाइका ने बताया कि “शिव जन्मभूमि में पैदा होने के कारण मुझमें बचपन से साहसिक भावना रही है। मेरा कोई भाई नहीं है, इसलिए मुझ पर अपनी और अपनी बहनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। इस लिहाज से, खेल के प्रति अपने प्यार की वजह से मैंने आत्मरक्षा के लिए ताइक्वांडो सीखा। मुझे ट्रैकिंग का शौक भी पैदा हुआ।”

हाइका अवती अब पुणे के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई कर रही हैं। साथ ही वो अपने खेल और ट्रैकिंग के शौक को भी आगे बढ़ाना चाहती हैं। आर्थिक रूप से सक्षम होने के बाद वो महिलाओं के लिए एक ट्रैकिंग ग्रुप बनाना चाहते हैं। इसके अलावा बुजुर्ग महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक फिटनेस ट्रेनिंग सेंटर भी शुरू करना चाहती हैं। 

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.com पर जाएं

ये भी पढ़ें: मोर के पंख पर भील पेंटिंग उकेरने वाले जोधपुर के पहले चित्रकार मांगीलाल

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

Meeraji (मीराजी: उर्दू कविता में मॉडर्निज़्म की शुरुआत करने वाला जीनियस

एक मैला-कुचैला रांझा था। नाम मोहम्मद सनाउल्लाह डार। दुबली...

मॉर्निंग ग्लोरी के फूलों की कथा

सुबह की पहली रोशनी में, जब धूप अभी पूरी...

अब्दुल बारी आसी: दर्द को अल्फ़ाज़ और मोहब्बत को आवाज़ देने वाले शायर

“अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को,मैं...

Topics

Meeraji (मीराजी: उर्दू कविता में मॉडर्निज़्म की शुरुआत करने वाला जीनियस

एक मैला-कुचैला रांझा था। नाम मोहम्मद सनाउल्लाह डार। दुबली...

मॉर्निंग ग्लोरी के फूलों की कथा

सुबह की पहली रोशनी में, जब धूप अभी पूरी...

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए...

Related Articles

Popular Categories