Saturday, March 7, 2026
31.9 C
Delhi

कालीन कारोबारी की बेटी इरफ़ा शम्स अंसारी ने UPSC में AIR 24 हासिल कर रचा इतिहास

कभी-कभी छोटे कस्बों और गांवों से ऐसी कहानियां निकलती हैं जो पूरे समाज के लिए मिसाल बन जाती हैं। उत्तर प्रदेश के भदोही ज़िले के परसीपुर क्षेत्र के रोटहां गांव की बेटी इरफ़ा शम्स अंसारी की कामयाबी भी ऐसी ही एक कहानी है। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर ऑल इंडिया रैंक 24 हासिल की है और आईएएस अधिकारी बनकर न सिर्फ़ अपने परिवार बल्कि पूरे ज़िले का नाम रोशन कर दिया है। ख़ास बात यह है कि इरफ़ा भदोही ज़िले की पहली आईएएस अधिकारी बनी हैं।

परिवार का साथ और मेहनत की मिसाल

इरफ़ा का ताल्लुक एक साधारण मगर मेहनती परिवार से है। उनके पिता शम्स आलम अंसारी कालीन निर्यात के व्यवसाय से जुड़े हैं। भदोही दुनिया भर में अपने कालीन उद्योग के लिए मशहूर है, लेकिन अब यह ज़िला अपनी इस होनहार बेटी की कामयाबी के लिए भी जाना जाएगा। इरफ़ा की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का सहयोग और उनका खुद का अटूट हौसला रहा है।

लखनऊ से दिल्ली तक का तालीमी सफ़र

इरफ़ की शुरुआती पढ़ाई लखनऊ से हुई। बचपन से ही पढ़ाई में तेज़ और लक्ष्य के प्रति गंभीर इरफ़ा का सपना था कि वह देश की सेवा करें। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख किया और दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी करने का फैसला कर लिया था।

जामिया RCA से मिली तैयारी की दिशा

ग्रेजुएशन के बाद इरफ़ा ने UPSC की तैयारी के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया(JMI) की प्रसिद्ध Residential Coaching Academy (RCA) में दाखिला लिया। यह संस्थान सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए एक अहम मंच माना जाता है। यहां उन्होंने अनुशासन, मेहनत और लगातार अभ्यास के साथ अपनी तैयारी को मज़बूत किया। आपको बता दें कि, जामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी के 38 छात्रों ने कामयाबी हासिल की है। इनमें 15 लड़कियां भी शामिल हैं, जो इस सफलता को और भी ख़ास बनाती हैं।

पहली कोशिश से मिली सीख, दूसरी में कामयाबी

UPSC की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। लाखों छात्र हर साल इसमें शामिल होते हैं, लेकिन बहुत कम लोग ही अंतिम चयन तक पहुंच पाते हैं। इरफ़ा का यह दूसरा प्रयास था। पहले प्रयास में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंटरव्यू तक का सफ़र तय किया था, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम नहीं आ पाया।

लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमियों को समझा, तैयारी को और बेहतर बनाया और दूसरे प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर ली। यह दिखाता है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि आगे बढ़ने का एक नया मौक़ा होती है।

इरफ़ा की इस बड़ी सफलता की ख़बर रमज़ान के मुबारक महीने में आई, जिससे परिवार और इलाके के लोगों की खुशी और भी बढ़ गई। घर पर मुबारकबाद देने वालों का तांता लग गया और पूरे गांव में जश्न जैसा माहौल बन गया।

युवाओं के लिए बनी मिसाल 

इरफ़ा शम्स अंसारी की कहानी आज हज़ारों युवाओं के लिए एक मोटिवेशन बन गई है। उनकी सफलता यह बताती है कि अगर इंसान अपने सपनों पर यकीन रखे और पूरी लगन के साथ मेहनत करे, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती।

भदोही की इस बेटी ने यह साबित कर दिया है कि हौसले बुलंद हों तो छोटे गांव से निकलकर भी देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचा जा सकता है। उनकी कामयाबी आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देती रहेगी।

ये भी पढ़ें: पत्थरों की रगड़ और पानी की धार: Zulfikar Ali Shah की उस चक्की की दास्तान जो वक़्त के साथ नहीं थमी

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

पिता चलाते हैं ट्रक, बेटी Fairuz Fatima ने UPSC में दर्ज की कामयाबी

कभी सड़कों पर दिन-रात ट्रक चलाकर घर चलाने वाले...

क़ुर्रतुलऐन हैदर: उर्दू अदब में ऐनी आपा का मुक़ाम और उर्दू फिक्शन की बेमिसाल आवाज़

कभी-कभी अदब की दुनिया में ऐसी शख़्सियतें जन्म लेती...

कैफ़ अहमद सिद्दीकी: मास्टर साहब बच्चों के दिल के शायर और समाज का आईना

कभी-कभी बड़े शहरों की चकाचौंध से दूर, छोटे कस्बों...

Topics

पिता चलाते हैं ट्रक, बेटी Fairuz Fatima ने UPSC में दर्ज की कामयाबी

कभी सड़कों पर दिन-रात ट्रक चलाकर घर चलाने वाले...

कैफ़ अहमद सिद्दीकी: मास्टर साहब बच्चों के दिल के शायर और समाज का आईना

कभी-कभी बड़े शहरों की चकाचौंध से दूर, छोटे कस्बों...

ज़ायके का सफ़रनामा: दम पुख़्त से दिल की बात, पुरानी रसोई का नया ज़माना

दम पुख़्त: इंडियन फूड लवर्स अब सिर्फ विदेशी व्यंजनों (Exotic recipes) का स्वाद नहीं लेना चाहते, बल्कि अपनी पुरानी रसोई की ओर लौटने लगे हैं। 'रूट्स की तरफ वापसी' (Return to the roots) का ये ट्रेंड न सिर्फ खाने के स्वाद को बदल रहा है, बल्कि हमारी सेहत को भी नया आयाम दे रहा है।

Related Articles

Popular Categories