Tuesday, August 4, 2026
31.6 C
Delhi

साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता Harjinder Pal: समाज और औरत की सोच का आईना

पंजाबी अदब की दुनिया में जालंधर के रहने वाले लेखक Harjinder Pal (हरजिंदर पाल) यानि, जिंदर एक ऐसा नाम हैं, जिनका लेखन सीधा दिल और समाज दोनों को छू जाता है। उनकी कहानियां इंसानी ज़ेहन की गहराइयों, औरतों के दर्द और बदलते रिश्तों की सच्चाई को बहुत सादगी से सामने लाती हैं। 16 किताबों के लेखक और कई इंटरनेशनल अवॉर्ड्स से नवाज़े जा चुके जिंदर आज के इस दौर में इंसानी एहसासात को फिर से ज़िंदा करने की कोशिश करते हैं।

उनकी ख़ास बात ये है कि वो सिर्फ़ कहानियां नहीं लिखते, बल्कि इंसानी सोच और उसके उलझनों को समझने की कोशिश भी करते हैं। “सेफ्टी किट” जैसी किताब के ज़रिए उन्होंने औरतों के अंदर के डर और समाज की पाबंदियों को बेख़ौफ़ तरीके से पेश किया है।

“सेफ्टी किट”: डर के खिलाफ एक जंग

Harjinder Pal (हरजिंदर पाल) की किताब “सेफ्टी किट” सिर्फ़ अफसानों का मजमूआ (कहानी संग्रह) नहीं है, बल्कि ये औरतों के अंदर बैठे उस डर के खिलाफ एक ज़ेहनी लड़ाई है, जो सदियों से चला आ रहा है। Harjinder Pal (हरजिंदर पाल) बताते हैं कि इस किताब की कहानियां उन्होंने चार–पांच साल में लिखी। पहले ये कहानिया मशहूर पंजाबी मैगज़ीन में छपी और फिर 2023 में दिल्ली के एक पब्लिशर ने इन्हें किताब की शक्ल दी। इसमें दस कहानियां हैं, जिनमें “मेरा कोई कसूर नहीं”, “सेफ्टी किट”, “शर्त” और “चिराग” ख़ास तौर पर असर छोड़ती हैं।

इन कहानियों में माइग्रेशन यानी विदेश जाने का पहलू भी दिखता है। किताब “सेफ्टी किट” की कहानी जसप्रीत नाम की एक लड़की की है, जो पंजाब से पढ़ाई के लिए विदेश जाती है। वहां वो हर समय यौन शोषण के डर में जीती है।

बाद में उसकी मुलाकात सामंथा से होती है, जो उसे लंदन की एक अकादमी के बारे में बताती है। वहां लड़कियों को आत्मरक्षा (self-defense) और जागरूकता की ट्रेनिंग दी जाती है। Harjinder Pal (हरजिंदर पाल) के मुताबिक, समाज ने यौन हिंसा के डर को इतना बढ़ा दिया है कि कई बार पीड़ित लोग खुद को पूरी तरह टूटा हुआ मान लेते हैं। Harjinder Pal (हरजिंदर पाल) कहते हैं कि किसी भी बुरी घटना को अपनी पूरी ज़िंदगी पर हावी नहीं होने देना चाहिए, बल्कि हिम्मत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

साल 2025 में उन्हें 72 साल की उम्र में पंजाबी साहित्य में देश का सबसे बड़ा सम्मान साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें ये सम्मान उनकी महिला-केंद्रित कहानी संग्रह “सेफ्टी किट” के लिए मिला था।

Source: Sadda Punjab

नारीवाद और समाज के दोहरे मापदंड

Harjinder Pal (हरजिंदर पाल) के लेखन में औरत हमेशा एक अहम किरदार होती है। उनका मानना है कि औरतों के साथ हमेशा से नाइंसाफी होती आई है। आज भी समाज में दोहरे मापदंड साफ दिखते हैं। जिंदर कहते हैं कि औरतों के अंदर का सबसे बड़ा दर्द ये है कि वो अपनी बातें खुलकर नहीं कह पाती। वो अपने डर, अपने ख्वाहिशों को अपने ही घर में शेयर करने से हिचकती हैं। वो इस बात पर भी ज़ोर देते हैं कि जब तक औरत आर्थिक तौर पर मज़बूत नहीं होगी, तब तक वो अपने फैसले खुद नहीं ले पाएगी।

इंसानी ज़ेहन और डर की साइकॉलजी

Harjinder Pal (हरजिंदर पाल) इंसानी दिमाग को समझाने के लिए साइकोलॉजी का सहारा भी लेते हैं। उनका कहना है कि हमारे अंदर के डर अक्सर हमारे अवचेतन (subconscious) में छिपे होते हैं और कई बार सपनों के ज़रिए बाहर आते हैं। यौन हिंसा का डर या समाज की बदनामी का खौफ़ पीढ़ियों से हमारे अंदर बसा दिया गया है। लेकिन जिंदर मानते हैं कि तालीम इस डर को खत्म कर सकती है। उनके मुताबिक, पढ़ाई सिर्फ डिग्री लेने का ज़रिया नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमारी सोच बदलने का तरीका होना चाहिए।

आज के दौर में जिंदर मोबाइल फोन को रिश्तों के लिए एक बड़ा खतरा मानते हैं। पहले लोग साथ बैठते थे, बातें करते थे, हंसते थे। लेकिन अब हर कोई अपने फोन में गुम है। सोशल मीडिया ने लोगों को भीड़ में भी अकेला कर दिया है। इसके साथ ही, छोटे परिवारों का चलन बढ़ने से बच्चों में शेयरिंग और साथ रहने की आदत भी कम होती जा रही है।

रिश्तों में बढ़ती दूरिया

उनकी कहानी “दूरियां” रिश्तों की बदलती सूरत को दिखाती है। वक्त के साथ घर के रिश्ते भी बदल जाते हैं। Harjinder Pal (हरजिंदर पाल) कहते हैं कि अगर इंसान में एहसास ही न हो, तो वो जानवर से अलग नहीं रह जाता। 72 साल की उम्र में भी उन्हें अपने गांव के ख्वाब आते हैं, जबकि वो 35 साल से वहां नहीं गए। ये उनकी जड़ों से मोहब्बत को दिखाता है। उन्हें सूफ़ी जगहों पर जाकर सुकून मिलता है, जहां इंसान खुद से जुड़ता है। Harjinder Pal (हरजिंदर पाल) नौजवानों को महाभारत पढ़ने की सलाह देते हैं, लेकिन सिर्फ़ धर्म के तौर पर नहीं, बल्कि समाज को समझने के लिए।

Source: Sadda Punjab

इंसानियत सबसे बड़ा मज़हब

Harjinder Pal (हरजिंदर पाल) के मुताबिक, असली कामयाबी अवॉर्ड्स नहीं, बल्कि अच्छे रिश्ते हैं। वो अपने दोस्तों और पाठकों को अपनी सबसे बड़ी दौलत मानते हैं। उनका आख़िरी पैग़ाम बहुत सीधा और गहरा है “इंसान को सिर्फ इंसान समझो।” वो कहते हैं कि कोई भी मज़हब नफरत नहीं सिखाता, बल्कि हर मज़हब मोहब्बत और इंसानियत का रास्ता दिखाता है। अगर हम एक-दूसरे के दर्द को समझना सीख लें और औरत-मर्द को बराबरी का हक दें, तो एक बेहतर समाज बन सकता है।

स्टोरी: मनप्रीत कौर

इस लेख को पंजाबी और अंग्रज़ी में पढ़ें

ये भी पढ़ें:  पंजाबी कवि बुल्ले शाह की दास्तान- मोहब्बत, सूफ़ियाना रंग और सादगी की मिसाल

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

नवाज़ देवबंदी: मोहब्बत, जज़्बात और इंसानियत के शायर 

उर्दू शायरी की दुनिया में नवाज़ देवबंदी का नाम...

घर में कभी रोटी की भी फ़िक्र थी, वहीं से Mehakpreet ने Medical Professional बनने की कहानी लिखी

कुछ कहानियां ज़िंदगी के मुश्किल दौर की याद दिलाती...

चिड़िया टापू: प्रकृति का वो हसीन ख्वाब जहां परिंदे बयां करते हैं यहां के राज़

अंडमान के दक्षिणी छोर पर बसा ये जन्नतनुमा मकाम,जहां...

नाज़िश प्रतापगढ़ी: तरक़्क़ीपसंद फ़िक्र और वतनपरस्ती के शायर

उर्दू अदब की दुनिया में नाज़िश प्रतापगढ़ी का नाम...

Topics

नवाज़ देवबंदी: मोहब्बत, जज़्बात और इंसानियत के शायर 

उर्दू शायरी की दुनिया में नवाज़ देवबंदी का नाम...

चिड़िया टापू: प्रकृति का वो हसीन ख्वाब जहां परिंदे बयां करते हैं यहां के राज़

अंडमान के दक्षिणी छोर पर बसा ये जन्नतनुमा मकाम,जहां...

नाज़िश प्रतापगढ़ी: तरक़्क़ीपसंद फ़िक्र और वतनपरस्ती के शायर

उर्दू अदब की दुनिया में नाज़िश प्रतापगढ़ी का नाम...

दाता गंज बख़्श अली: तसव्वुफ़ और इल्म की रोशन मिसाल

हज़रत अली हुज्वेरी रहमतुल्लाहि अलैह, जिन्हें दुनिया दाता गंज...

प्रकृति के दो अनमोल रत्न: सुंदरवन और पश्चिमी घाट की कहानी

प्रकृति ने भारत को जो तोहफे दिए हैं, उनमें...

अमीर बख़्श साबरी: इश्क़, अकीदत और सूफ़ियाना शायरी के अलमबरदार

अमीर बख़्श साबरी का शुमार हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के...

Related Articles

Popular Categories