Wednesday, May 13, 2026
37.1 C
Delhi

National Education Day: मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, भारत के पहले शिक्षा मंत्री और एकता के प्रतीक

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जीवन और योगदान सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे न सिर्फ़ एक महान विद्वान थे बल्कि एक स्वतंत्रता सेनानी, सफल राजनेता, शायर, साहित्यकार और पत्रकार भी थे। उनके विचारों में मानवता, समानता और धर्मनिरपेक्षता की गहरी झलक मिलती है। उनका मानना था कि दुनिया एक परिवार है और सभी लोग एक ही ईश्वर की संतान हैं।

मौलाना आज़ाद का जन्म 11 नवम्बर 1888 को मक्का में हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा मिस्र के काहिरा स्थित अल-अजहर यूनिवर्सिटी से हासिल की और फिर उनका परिवार कोलकाता आ गया। यहीं से उनका राजनीतिक और पत्रकारिता का सफ़र शुरू हुआ। उन्होंने “अल-हिलाल” नाम से एक साप्ताहिक अख़बार निकाला, जिसके ज़रिए ब्रिटिश हुक़ूमत के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की। स्वतंत्रता संग्राम में मौलाना आज़ाद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन और खिलाफ़त आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। महात्मा गांधी से प्रेरित होकर वे कांग्रेस से जुड़ गए और पार्टी के अध्यक्ष भी बने।

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का शिक्षा के क्षेत्र में योगदान

मौलाना आज़ाद का शिक्षा क्षेत्र में अमूल्य योगदान है। स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने आधुनिक शिक्षा प्रणाली की बुनियाद रखी। उन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना की, जिनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), साहित्य अकादमी, संगीत नाटक अकादमी, और ललित कला अकादमी प्रमुख हैं। उन्होंने शिक्षा को सभी के लिए सुलभ और अनिवार्य बनाने की कोशिश की, ख़ास तौर से लड़कियों की शिक्षा, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा पर ज़ोर दिया।

उनका कहना था, “शिक्षा एक शक्ति है जो जीवन को बेहतर बनाती है। शिक्षा हमें ज़िम्मेदार और सच्चा इंसान बनाती है।” 1992 में भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया। मौलाना आज़ाद का योगदान हमेशा हमें प्रेरित करता रहेगा, और भारत उन्हें हमेशा याद रखेगा।

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं

ये भी पढ़ें: कश्मीरी विलो विकर शिल्प: दुनिया को लुभा रहा कश्मीर का हुनर

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

हेमकुंड साहिब की खोज की कथा

हिमालय की दुर्गम चोटियों में छिपा एक पवित्र हेमकुंड...

ईरान से भदोही तक: कालीन (Carpet) के धागों में बुनी एक ख़ानदानी दास्तान

“कालीन (Carpet) बनाना हमारा ख़ानदानी काम है। हमारे बाप-दादा...

समय के साथ कैसे बदली Mithila Painting? National Awardee Manisha Jha की प्रदर्शनी में मिलते हैं इसके जवाब

बिहार की मिट्टी में बसी कला और तहज़ीब हमेशा...

Topics

हेमकुंड साहिब की खोज की कथा

हिमालय की दुर्गम चोटियों में छिपा एक पवित्र हेमकुंड...

ईरान से भदोही तक: कालीन (Carpet) के धागों में बुनी एक ख़ानदानी दास्तान

“कालीन (Carpet) बनाना हमारा ख़ानदानी काम है। हमारे बाप-दादा...

Meeraji (मीराजी: उर्दू कविता में मॉडर्निज़्म की शुरुआत करने वाला जीनियस

एक मैला-कुचैला रांझा था। नाम मोहम्मद सनाउल्लाह डार। दुबली...

मॉर्निंग ग्लोरी के फूलों की कथा

सुबह की पहली रोशनी में, जब धूप अभी पूरी...

Related Articles

Popular Categories