Saturday, June 6, 2026
35.4 C
Delhi

बाड़मेर के सूजा शरीफ़ में है पीर सैयद गुलाम हुसैन शाह जिलानी के सपनों का संस्थान

राजस्थान के बाड़मेर जिले का छोटा सा गांव सूजा शरीफ़, जिसे “सूजों का निवाण” के नाम से जाना जाता है। आज ये गांव शिक्षा की मिसाल बन चुका है। 1870 ईसवीं यानी 1927 विक्रम संवत में यहां दर्स जाति के लोग बसे और उन्होंने मस्जिद और मदरसा बनवाया।

लेकिन इस गांव का परिवर्तन तब हुआ जब करीब 20 साल पहले यहां के निवासी पीर सैयद गुलाम हुसैन शाह जिलानी ने एक संस्थान का सपना देखा, जिसमें सिर्फ धार्मिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि दुनियावी तालीम भी दी जाती थी। उन्होंने अपने मिशन को छोटे मदरसे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक विश्वस्तरीय संस्थान बनाने का फैसला लिया।

पीर सैयद गुलाम हुसैन शाह जिलानी ने अपने मिशन के लिए एक टीम बनाई और सबसे पहले एक हॉस्टल और सभी सुविधाओं से लैस स्कूल बनवाया। आज 20 सालों की मशक्कत के बाद, उनका यह सपना “दारुल उलूम फैजे सिद्दीकिया” के रूप में साकार हुआ है। उन्होंने अपनी इच्छाओं को त्यागकर, मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए शिक्षा की मशाल जलाई है।

आज ये संस्थान किसी विदेशी यूनिवर्सिटी जैसा दिखता है। इस संस्थान के विकास में भारत सरकार के अल्पसंख्यक विभाग के मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन, बाड़मेर के सांसद और स्थानीय विधायक आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। 2013 में, यहां एक ‘सिद्दीकिया जामिया मस्जिद’ भी बनवाई गई है। आज यहां क्लास 1 से 12 तक की पढ़ाई होती है, जहां करीब 350 स्टूडेंट पढ़ रहे हैं। यहां कुरान की शिक्षा से लेकर मौलवी बनने तक की पढ़ाई कराई जाती है। पीर सैयद गुलाम हुसैन शाह जिलानी की यह कोशिश न सिर्फ बाड़मेर जिले, बल्कि पूरे राजस्थान और देश में मुस्लिम समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। रेगिस्तान की इस ज़मीन में शिक्षा की मशाल जलाकर उन्होंने समाज के लिए एक नई दिशा दिखाई है।

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं

ये भी पढ़ें: कश्मीरी विलो विकर शिल्प: दुनिया को लुभा रहा कश्मीर का हुनर

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

मोहम्मद अली, द ग्रेटेस्ट

1964 में बाईस साल के काले मोहम्मद अली ने...

भीड़-भाड़ वाले बाज़ार के कोने में ज्ञान का खज़ाना — Bhai Mohan Singh Vaid Memorial Library

तरनतारन शहर का ऐतिहासिक अड्डा बाज़ार, जो श्री दरबार...

Topics

मोहम्मद अली, द ग्रेटेस्ट

1964 में बाईस साल के काले मोहम्मद अली ने...

भीड़-भाड़ वाले बाज़ार के कोने में ज्ञान का खज़ाना — Bhai Mohan Singh Vaid Memorial Library

तरनतारन शहर का ऐतिहासिक अड्डा बाज़ार, जो श्री दरबार...

कॉपरनिकस की दास्तान

ब्लैक डैथ हैजे से फैली महामारी थी जिसने यूरोप...

Related Articles

Popular Categories