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जब घोड़ा गाड़ी से अंग्रेज़ों तक पहुंचाए जाते थे ‘शेख ब्रदर्स बेकरी’ से प्रोडक्ट

बेकरी प्रोडक्ट्स ख़ासतौर से ताज़े बिस्कुट,गरमागरम कुकीज़ और केक खाने के शौकीन तो हम सभी होते हैं। भारत में ऐसी कई बेकरी मौजूद हैं जो सालों पुरानी हैं। गुवाहाटी में एक ऐसी ही बेकरी है जिसे अंग्रेज़ों के ज़माने की है।

जी हां! गुवाहाटी के पान बाज़ार में शान से खड़ी शेख बिल्डिंग और इस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर है शेख ब्रदर्स बेकरी, जो अपने आप में एक पूरा इतिहास समेटे हुए है। सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक इस बेकरी में ग्राहकों की भीड़ लगी बनी रहती हैं। पलभर के लिए भी बेकरी कस्टमर्स से खाली नहीं होती। यहां आने वाले ग्राहक सिर्फ़ गुवाहाटी ही नहीं, बल्कि दूसरे शहरों से भी इस बेकरी से केक, बिस्किट्स, और दूसरी चीज़ें खरीदने आते हैं। कुछ तो ऐसे ग्राहक हैं जो कभी अपने पापा का हाथ थामे यहां आया करते थे और आज वो खुद पापा बनकर अपने बच्चों के साथ यहां आते हैं। ऐसे कस्टमर्स बड़े फ़ख़्र से कहते हैं कि बेकरी तो बहुत हैं लेकिन शेख़ ब्रदर्स जैसी कोई नहीं।

कैसे हुई 139 साल पुरानी ‘शेख ब्रदर्स बेकरी’ की शुरुआत

इतिहास पर नज़र डालें तो ये बेकरी देश की पहली 5 सबसे पुरानी बेकरियों में शुमार है। इस बेकरी की शुरूआत कोलकाता के मिर्ज़ापुर के रहने वाले शेख़ इब्राहिम ने 1885 में की थी। उस वक़्त देश में अंग्रेज़ों की हुकूमत थी। अंग्रेज़ असम में चाय बागान बना रहे थे। उन्हें ब्रेकफास्ट में ब्रेड की ज़रूरत होती थी जो नहीं मिलती थी। तब अंग्रेज़ हुकुमत ने शेख़ इब्राहिम को गुवाहाटी में भी बेकरी खोलने का आग्रह किया। इस तरह शेख इब्राहिम ने कोलकाता से 1885 में गुवाहाटी में आकर इस बेकरी की बुनियाद रखी। इस कारोबार में उनके दो भाई शेख़ सबीरूद्दीन और शेख़ कबीरूद्दीन भी शामिल हो गए और बेकरी का नाम रखा गया ‘शेख़ ब्रदर्स’।

139 साल हो गए, आज की तारीख़ में शेख ब्रदर्स की देख-रेख तीसरी पीढ़ी के शेख़ मलिक नवाज़ करते हैं। 1885 में जब शेख ब्रदर्स की शुरूआत हुई, उस वक़्त गुवाहाटी में मुठ्ठी भर लोग रहा करते थे और यहां से 105 किलोमीटर दूर पहाड़ियों पर बसा खूबसूरत शहर शिलॉन्ग असम की राजधानी हुआ करती थी। उस समय गुवाहाटी से शिलॉन्ग तक घोड़ा गाड़ी से आवाजाही की जाती थी। अंग्रेज़ों के आग्रह पर इस बेकरी की शुरूआत की गई थी इसलिए शिलॉन्ग के राज भवन में ब्रेड से लेकर बटर और चीज़ तक शेख ब्रदर्स से ही जाता था। इसके लिए राज भवन से ख़ास मोटर गाड़ी आती थी।

बेल्जियम और ऑस्ट्रेलिया से आता था रॉ मटेरियल

गुवाहाटी की वर्ल्ड फेमस बेकरी में कई नामचीन हस्तियां भी गई हैं। जिसका ज़िक्र गुवाहाटी हेरिटेज नाम की एक किताब में भी मिलता है। शेख़ मलिक नवाज़ कहते हैं कि जब भारत को आज़ादी मिली तो प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी को यहां का सामान बहुत पसंद था। अपनी स्थापना के बाद बेकरी के लिए स्टीमर की मदद से बेल्जियम और ऑस्ट्रेलिया से रॉ मटेरियल मंगवाने वाली ये देश की पहली बेकरी थी और आज भी वो अव्वल दर्जे का रॉ मटेरियल इस्तेमाल करते हैं।

बेकरी के मालिक नवाज़ ने DNN24 को बताया कि, पहले दिन से आज तक बेकरी में होने वाली भीड़ कभी कम नहीं हुई क्योंकि वो क्वालिटी से कभी समझौता नहीं करते हैं। यही वजह है कि उन्होंने फ्रैंचाइज़ी या आउट्लेट खोलने की कभी नहीं सोची।

गुवाहाटी और आस-पास की दुकानों में शेख ब्रदर्स में बने बिस्किट्स, केक, ब्रेड सभी चीजें मिल जाती हैं। उन दुकानों तक ये सभी चीजें शेख ब्रदर्स की गाड़ियां पहुंचाती हैं। आज की तारीख में रोज़ाना दस हजार केवल ब्रेड ही तैयार की जाती है। बेकरी के कारखाने में कुल 5 बड़े-बड़े ओवन हैं जिनमें हर तरह के बिस्किट्स बनते रहते हैं। शेख ब्रदर्स में वेज और नॉन वेज, दोनों बिल्कुल अलग-अलग बनाये जाते हैं और काउन्टर भी अलग-अलग हैं।

शेख ब्रदर्स के ग्राहक बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हैं। माएं अपने बच्चों के लिए मनपसंद पेस्ट्री लेने आती हैं तो युवाओं को यहां के केक और पैटीज़ पसंद आते हैं।

बेकरी ने आज़ादी की लड़ाई से लेकर भारत-चीन युद्ध भी देखा

मालिक नवाज़ बताते हैं कि साल 1885 में असम के एक मकान से शुरू की गई इस बेकरी का आज अपनी बिल्डिंग है। ग्राउन्ड फ्लोर में काउन्टर है जबकी ऊपर का दो मंज़िला कारखाना है जिसमें हफ्ते में छह दिन काम होता है। रविवार के दिन काउन्टर और कारखाना दोनों ही बंद होते हैं और साफ़-सफ़ाई का काम होता है। भवन के टॉप फ्लोर पर बेकरी के कर्मचारी रहते हैं। आज की तारीख़ में करीब 130 कर्मचारी है जिन्हें सैलरी के अलावा भत्ता और बीमा तक की फ़ैसिलिटी दी जाती है। इस बेकरी ने अंग्रेज़ों की हुक़ूमत और आजादी की लड़ाई से लेकर 1962 का भारत-चीन युद्ध भी देखा, लेकिन 139 सालों में अगर बेकरी कुछ दिनों के लिए बंद हुई तो सिर्फ़ कोविड महामारी के दौरान। लोगों का इस बेकरी से जायकों का कनेक्शन तो है ही साथ ही लगाव भी है।

बेकरी के कस्टमर रूपुकुल सिन्हा बताते हैं कि “मैं यहीं के बिस्कुट खाकर बड़ा हुआ हूं। यहां से अच्छा बिस्किट्स कहीं नहीं मिल सकता। यहां की क्वालिटी बहुत अच्छी है।”

जाह्नवी बताती हैं कि “ये बकरी सबसे पुरानी है। यहां के कुछ ख़ास प्रोडक्ट मेरे बेटे को बहुत पसंद हैं। इसलिए मुझे यहां हर हफ्ते आना पड़ता है।” शेख ब्रदर्स बेकरी शुरुआत में ब्रेड और बिस्कुट बनाएं जाते थे। अब यहां केक, कुकीज़, बिस्कुट की बहुत सी वैरायटी बनाई जाती हैं।

ये भी पढ़ें: गरीब बच्चों को नई ज़िंदगी दे रहीं ‘थान सिंह की पाठशाला’

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