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ज़रूरतमंदों को भूखे पेट नहीं सोने देता ‘रोटी बैंक’, तीन मुस्लिम पड़ोसियों ने उठाया ज़िम्मा 

रमज़ान के महीने को इबादत और खिदमत का महीना कहा जाता है। इस खास माह में ज़रूरतमंदों की ज़्यादा से ज़्यादा मदद करने की बात इस्लाम में कही गई है। इस बात को गौर करते हुए पुणे के तीन पड़ोसी एक साथ मिलकर लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। पुणे के कोंढवा इलाके के रहने वाले नासिर शेख़, आलिया शेख़, आयशा शेख़ ने अगस्त 2019 में ‘रोटी बैंक’ की शुरुआत की। रोटी बैंक पिछले चार सालों से ज़रूरतमंद लोगों को खाना खिला रहा है, जिनको दो वक्त की रोटी भी नहीं मिल पाती है।

नासिर, आलिया और आयशा तीनों ही पड़ोसी हैं और तीनों ने इस काम की शुरुआत अपने घर से की। जब इन लोगों ने रोटी बैंक को शुरू किया तब इनको किसी तरह का फंड नहीं मिलता था, लेकिन धीरे धीरे लोगों ने इनके नेक काम को देखा और फिर मदद के लिए हाथ बढ़ाने लगे। नासिर और आलिया का काम देखने के बाद आयशा शेख़ भी उनके साथ इस काम से जुड़ गईं। 

शादियों में बचे खाने को ज़रूरतमंदों तक पहुंच रहें हैं नासिर, आलिया और आयशा

नासिर, आलिया और आयशा तीनों गरीब और ज़रूरतमंद लोगों के लिए शिक्षा, रोज़गार और लोगों को खाना देने जैसे मुद्दों पर काम कर रहें हैं। आपने ये तो देखा ही होगा कि अक्सर शादियों में काफी सारा खाना बच जाता है। ये खाना बर्बाद न हो इसलिए इन तीनों ने पुणे के मंगल कार्यालयों में कुछ बोर्ड लगाए। इन बोर्डों पर लिखा है, “अगर आपके पास बचा हुआ खाना है तो हमसे संपर्क करें… हम इस खाने को भूखे पेटों तक पहुंचाएंगे।” 

आलिया, नासिर और आयशा रमज़ान के महीने में ‘सहरी’ और ‘इफ्तारी’ भी ज़रूरतमंद रोजेदारों तक पहुंचाते हैं। वहीं इन तीनों का परिवार भी इनका भरपूर साथ देता है। उनका कहना है कि उनके बच्चे जो कर रहे हैं वो बहुत ही नेक और सवाब का काम है।  

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ये भी पढ़ें: गरीब बच्चों को प्लास्टिक के बदले मुफ़्त शिक्षा दे रहा नीरजा फुटपाथ स्कूल

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