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श्रीनगर की पैड वुमन माहवारी पर कैसे कर रही है जागरूक?

शुरू से ही माहवारी (Periods) को लेकर समाज में शर्मिंदगी की भावना रही है। हमारे भारतीय समाज में माहवारी से संबंधित कई भ्रांतियां फैली हुई है जो महिलाओं को जोखिम में डाल देती है। कई समाजों और धर्मों में Periods के दौरान स्त्री को अपवित्र यानी नापाक माना जाता है।

उन्हें पूजा पाठ और नमाज से भी दूर रहना पड़ता है। और कुछ लोग इसे बीमारी भी कहते है। लेकिन इन भ्रांतियों दूर करना, लोगों को पीरियड के बारे में जागरूक करना और गरीब लड़कियों को पैड बांटने का काम कर रही है पैड वुमन नाम से मशहूर 31 वर्षीय इरफ़ाना ज़रगर।

इरफ़ाना ज़रगर कश्मीर के श्रीनगर की रहने वाली है। जो माहवारी यानी Periods स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में लोगों को जागरूक कर रही है। उनका मानना है कि वो Periods से संबंधित लोगों में जो गलत भावनाएं, विचार और कठोर रवैया है वो उनके प्रति लड़ रही है। उन्होंने हर महीने श्रीनगर में लगभग 500 जरूरतमंद महिलाओं को सेनेटरी पैड बांटे और एक Supply Chain बनाई। इसके बाद इरफ़ाना का ध्यान पुरुषों को ये समझाने पर गया कि महीने के उन पांच दिनों के दौरान महिलाओं की देखभाल करने की ज़रूरत है।

साल 2013 में जब उनके के पिता का इंतकाल हो गया। तब उन्होंने इस काम को  शुरू करने के बारे में सोचा था। इरफाना अपनी आधी सैलरी अपने पापा के नाम पर इस काम में इन्वेस्ट करती हूं। ताकी यूथ को आत्मनिर्भर और जागरूक कर सके और मैं अपनी बहनों की जान बचा सकें। हर रविवार को ऑफिस की छुट्टी होने पर वो लड़कियों को पैड बांटने के लिए निकलती है।

कैसे शुरू की इरफाना ने यह पहल

DNN24 से बात करते हुए इरफाना ने बताया कि इस काम शुरुआत करने के पीछे एक कहानी भी है। इरफाना ने अपने पिता के लिए ‘लाल चौक’ में एक वॉटर पॉइंट बनाया था। एक दिन वो जब वो वहां गई तो उस जगह उन्होंने एक औरत को बैठे देखा जो बहुत परेशान दिख रही थी। इरफाना ने जब उस औरत से जाकर जाकर पूछा तो उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को पीरियड्स हुए है। तो इरफाना ने उन्हें कहा कि तो क्या दिक्कत है यहां पास में ही एक शौचालय भी है।

तब उन्होंने मुझे बताया कि उनके पास पैड खरीदने के लिए पैसे नहीं है। मेरी बेटी के कपड़े खराब हो जाएंगे. सारे लोग उसे देखेंगे हम कैसे घर जा पायेंगे। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा हैं। तब इरफाना ने सोचा कि मैं गरीबों को पैसे देती ही हूं तो क्यों न मैं ऐसी चीजों में अपने पैसे इन्वेस्ट करू जिससे लोगों को फायदा हो सके। तब इरफाना ने पैड बांटने की शुरुआत की।

शुरूआती दौर में सुने लोगों के ताने

इरफाना जब महिलाओं को पैड बांटने लगी तो लोगों से रूसवाई मिली लेकिन लोगों के तानों ने इरफाना को रोका नहीं क्योंकि इस काम में उनकी सबसे बड़ी साहस बनी उनकी मां। 

इरफाना को लोगों ने कई बाते कई जैसे ‘देखो ये तो पैड वुमन बन गई’, ‘इसे सरकार की तरफ से फंड मिलता है’, ‘इसकी बहुत सारी एनजीओ चल रही है।’ इरफाना ने DNN24 को बताया कि मैं किसी एनजीओ में काम नहीं करती हूं और न ही कोई एनजीओ चला रही है। यह सब मैं अपने पिता के लिए कर रही है। अगर इंसान के इरादे अच्छे होंगे तो वो पांच पैसे में भी काम कर सकता है। लेकिन समय के साथ साथ लोगों ने मुझे सपोर्ट करना शुरू कर दिया। यहां तक कि मेरी कुछ सेलिब्रिटीज ने तारीफ की। इरफाना को उनके इस काम ने कई पुरस्कार और प्रशंसाएं दिलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और Actress रवीना टंडन ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इरफ़ाना के काम का उल्लेख किया है।

आज जब इरफाना अपने तय किए मुकाम को मुकम्मल कर रहीं है। वो चाहती है कि यह दुनिया औरतों के लिए संवेदनशील बने। वो चाहती है कि सिर्फ लड़कियां ही इस चीज में जागरूक हो बल्कि लड़के भी इस चीज को लेकर जागरूक हो उनकी परेशानियों को समझे।

माहवारी के दौरान महिलाओं को होने वाली समस्याएं

इरफ़ाना बताती है कि “मैं अपने जागरूकता कैंप में लोगों से कहती हूं कि महिलाएं परिवार की देखभाल करने और बच्चे पैदा करने वाली मशीन नहीं हैं। Periods के समय उनके व्यवहार में बदलाव आना जैसे Mood Swing होना, Depression, पेट में दर्द, सूजन और Periods से पहले होने वाले दर्द से पीड़ित होती है। उनके पतियों को उस दौरान उनकी देखभाल करनी चाहिए। अगर औरत नहीं होगी तो ये दुनिया भी नहीं होगी, कुछ नहीं होगा।

वह कहती है कि किस तरह माहवारी के दौरान साफ सफाई की कमी के कारण महिलाएं स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित रहती हैं और जागरूकता की कमी के कारण उन्हें इसके बारे में पता नहीं होता। अपने नौ साल के इस Campaign के दौरान, उन्हें कई महिलाओं के बारे में पता चला जो Vaginal Infections, Uterus Infections और PCOD से परेशान थी। उन्हें Periods के समय अस्वच्छ तरीकों के कारण दिक़्क़त होती है। कश्मीर के दूर दराज इलाकों में अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने देखा कि वहां लोगों में periods के दौरान स्वास्थ्य को लेकर कोई समझ और जागरूकता नहीं है।

भविष्य में क्या है इरफाना का सपना

इरफ़ाना का उनके काम के प्रति जुनून का पता इससे लगा सकते हैं कि श्रीनगर में उन महिलाओं की मदद करने के लिए मीलों पैदल चलीं, जिनके पास सैनिटरी पैड तक पहुंच नहीं थी। इससे पहले, वो श्रीनगर के कुछ 19 महिला शौचालयों में उन महिलाओं को स्टॉक करती थीं, जिन्हें अचानक Periods होने के बाद उनके पास पैड नहीं होते थे। लॉकडाउन के दौरान उन्हें सैनिटरी टावल के लिए कई महिलाओं और पुरूषों के फोन आए। उन्होंने हर कॉल आने वाली महिला की मदद की। और उनकी जगह जाकर उन्हें समान दिया क्योंकि उस दौरान आने जाने के लिए साधन नहीं था।

इरफाना कहती है कि पुराने ज़माने में औरते माहवारी आने पर लड़कियां कपड़ा इस्तेमाल करती थी। लेकिन आज मैं कहना चाहती हूं आज हमारे पास पैसा भी है, शिक्षा है तो हम क्यों कपड़ा इस्तेमाल जब हमें इससे होने वाले नुकसान के बारे में पता है। इरफाना चाहती है कि आगे चलकर और काम करें। उनका सपना है कि उनकी एक छोटी सी दुकान हो जिसमे वह गरीब लड़कियों को फ्री में पैड दे सकें और अपना काम भी कर सकें।

 

ये भी पढ़ें: मोहम्मद आशिक और मर्लिन: एक अनोखी कहानी जिसने बदल दिया शिक्षा का परिपेक्ष्य

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