Saturday, May 9, 2026
33.1 C
Delhi

कलाकार जावेद ने राम के किरदार से दिया एकता का संदेश

जावेद एक अनुभवी थिएटर कलाकार हैं जिन्होंने वर्षों तक मंच पर अलग-अलग किरदार निभाए हैं। राम का किरदार निभाने का फ़ैसला उन्होंने लिया तो उन्हें एहसास हुआ कि ये सबसे मुश्किल भूमिका होगी। जावेद मानते हैं कि राम को जानने के लिए केवल रामायण देखना काफ़ी नहीं है, इसे गहराई से पढ़ना और समझना भी ज़रूरी है।जावेद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से एक्टिंग सीखी है और 100 से ज़्यादा नाटकों में अभिनय किया है। वे कई बॉलीवुड फिल्मों में भी काम कर चुके हैं। हाल ही में, उन्होंने जनकपुरी ईस्ट के रामलीला मैदान में राम का किरदार निभाया है।

जावेद ने कहा कि राम के गुणों ने उन्हें इस भूमिका के लिए आकर्षित किया। राम एक आदर्श व्यक्ति हैं जिनमें शालीनता, धैर्य और दया के गुण हैं। वे एक धनुष और एक वचन धारण करने वाले व्यक्तित्व हैं। राम के चरित्र से जावेद को काफ़ी लगाव है। जावेद ने राम का किरदार निभाने के लिए कड़ी मेहनत की। उन्होंने अपना वज़न कम किया, सिर्फ़ शाकाहारी खाना खाया और अपने व्यवहार में बदलाव किया। उन्होंने कहा कि राम के कुछ गुणों को वे अपनी ज़िंदगी में भी अपनाना चाहेंगे। जावेद का मानना है कि कला, संगीत और रंगमंच से अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच समझ बढ़ती है। वे आगे भी ऐसे किरदार निभाना चाहते हैं जिनसे समाज में प्यार और सम्मान बढ़े। 

जावेद के परिवार और दोस्तों ने उन्हें इस किरदार के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जावेद को बताया कि राम ने शबरी के झूठे बेर खाकर भक्ति और विश्वास का महत्व बताया था। जावेद की कहानी हमें सिखाती है कि कला और रंगमंच के ज़रिए हम धार्मिक भेदभाव को दूर कर सकते हैं और समाज में सद्भावना फैला सकते हैं। राम का किरदार निभाकर जावेद ने साबित किया है कि धर्म से परे हम सभी एक हैं। 

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं

ये भी पढ़ें: कश्मीर की सायका राशिद: पेशे से इंजीनियर दिल से कैलीग्राफी आर्टिस्ट

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सब्सक्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

अब्दुल बारी आसी: दर्द को अल्फ़ाज़ और मोहब्बत को आवाज़ देने वाले शायर

“अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को,मैं...

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए...

Topics

देहात से निकली आवाज़ें बनीं किताब, दिल्ली में लॉन्च हुई ‘बड़ी आई पत्रकार’

देश की राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में एक खास आयोजन के दौरान ‘बड़ी आई पत्रकार’ किताब का विमोचन किया गया। यह किताब उन महिला पत्रकारों की कहानियों को सामने लाती है, जिन्होंने गांव और छोटे कस्बों से निकलकर पत्रकारिता की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। इ

Mysterious Languages (रहस्यमयी लिपियां): इतिहास की वो आवाज़ें, जो आज भी ख़ामोश हैं

क्या आपको पहेलियां सुलझाना पसंद है? अब ज़रा सोचिए...

Red Chief से RedTape तक: कैसे कानपुर बना भारत का लेदर सिकंदर

एक ज़माने में कानपुर की सड़कों पर अंग्रेजों की...

Related Articles

Popular Categories