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नवरात्रि में मां कामाख्या की पूजा से मिलता है विशेष आशीर्वाद

पूरे देशभर में इस समय नवरात्रि की तैयारियां ज़ोरों-शोरों पर हैं। नवरात्रि के नौ दिन, लोग माता रानी के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं और साथ ही व्रत भी रखते हैं। नवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अहम त्योहार है। इस मौके पर लोग मंदिर जाकर देवी मां के दर्शन करते हैं। भारत के कई शक्तिपीठों में से एक है कामाख्या देवी मंदिर असम में नीलाचल पहाड़ी की चोटी पर है। आप सभी जानते हैं कि नवरात्रि शुरू हो चुकी है और इन नौ दिनों की नवरात्रि को शक्ति की उपासना के लिए शुभ माना जाता है। नवरात्रि के दौरान कामाख्या मंदिर में पूजा और मंदिर की परिक्रमा करना विशेष रूप से शुभ फलदायक होता है। इसीलिए सुबह होते ही मां के भक्तों का समूह मंदिर पहुंचने लगता है। भक्ति और उल्लास से भरे इस माहौल में, मां कामाख्या के दर्शन और पूजा का ख़ास महत्व है।

राजकुमार शर्मा ने DNN24 से बात करते हुए कहा कि, “पिछले 20 सालों से हम रोज़ नीचे से ऊपर भुवनेश्वरी तक मां के दर्शन करने आते हैं। नवरात्रि के समय विशेष रूप से हम मां के दरबार में आते हैं और नौ दिन आरती, पूजा और परिक्रमा करते हैं।” सुनील अग्रवाल बताते हैं कि नवरात्रि का समय साधना का होता है। सभी भक्त आरती करते, ध्यान लगाते और प्रसाद चढ़ाते हैं। सुबह 6 बजे आरती शुरू होती है। हम लोग ‘कामाख्या मॉर्निंग वॉक ग्रुप’ से हैं और नवरात्रि में विशेष रूप से नौ दिन तक आरती करते हैं।

राजेन्द्र खंडेलवाल ने कहा कि, “यह नवरात्रि पर्व पूरे भारत और विदेशों में मनाया जा रहा है। सभी लोग बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मां भवानी की पूजा-अर्चना करते हैं और हम लोग नौ दिनों तक मंदिर में आकर आरती, पूजा, भजन और कीर्तन करते हैं।” सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि, “सुबह-सुबह आरती करना शुभ माना जाता है, लेकिन नवरात्रि के समय सुबह की आरती का विशेष महत्व होता है। कामाख्या मंदिर में नवरात्रि के दौरान पूजन और आरती करना विशेष लाभदायक होता है।” अनीता शर्मा कहती हैं कि, “मां सभी की मनोकामना पूरी करती हैं। हम हर साल आरती करते हैं।” 

दुर्गा सप्तशती एक धार्मिक हिंदू पाठ है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। नवरात्रि इस पाठ को करने के लिए सबसे अच्छा समय होता है। भक्तों का विश्वास है कि नवरात्रि के दौरान इस पाठ को पढ़ने से अधिक लाभ मिलता है और अच्छे परिणाम मिलते हैं। मां दुर्गा सप्तशती पाठ बहुत ही शुभ माना जाता है, यह पाठ जीवन की समस्याओं और बाधाओं को समाप्त करता है। इसे याद करने से कठिन समय के दौरान शक्ति मिलती है।

लेकिन अगर इसी पाठ को कामाख्या मंदिर परिसर में भी किया जाए तो लाभ हज़ार गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि नवरात्रि शुरू होते ही सैकड़ों साधक कामाख्या मंदिर आते हैं और मंदिर परिसर में जहां भी जगह मिलती है, चंडी पाठ के लिए बैठ जाते हैं।

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