Thursday, September 3, 2026
28 C
Delhi

हजरत निजामुद्दीन दरगाह: कव्वालियों की राजधानी

सूफीज्म की प्राचीन कव्वाली कला, जो 700 साल पुरानी है, ईरान और अफगानिस्तान से भारत लाई गई। हजरत निजामुद्दीन दरगाह, दिल्ली की ‘राजधानी’, हर शाम कव्वाली महफिलों की शोभा सजाती है। यहां परंपरा अब तक बरकरार है और लोग जियारत करने के लिए घंटों इंतजार करते हैं।

कव्वाली के रोजगार से वे जीवन चलाते हैं और इससे बहुत खुश हैं। आजम निजामी, उम्र मात्र 25 साल, अपनी आवाज़ से लोगों को प्रभावित करते हैं।

आजम निजामी के परिवार में इस कला की परंपरा पुरानी है और उनके पिता और दादा भी कव्वाल रहे हैं। उन्हें अन्य प्रोग्रामों में भी बुलाया जाता है।

इस खबर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

ये भी पढ़ें: आयुषी सिंह UP PCS पास कर DSP बनीं, कैसे की थी पढ़ाई?

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

संगरूर का Banasar Bagh Museum! जींद रियासत की शानदार विरासत

पंजाब की ज़मीन अपने समृद्ध इतिहास, बहादुरी की दास्तानों,...

अपतानी बुनाई : सिर्फ एक कपड़ा नहीं, पूरी संस्कृति है  जो खुद को बुन रही पीढ़ी-दर-पीढ़ी

अरुणाचल प्रदेश के हरे-भरे लोअर सुबनसिरी घाटी यानी जिरो...

ज़मीन अली: वो चराग़ जिसने उर्दू के लिए एक नया रास्ता रोशन किया

कुछ लोग सिर्फ़ अपने दौर के लिए काम नहीं...

अमजद हैदराबादी: दर्द को रुबाई में ढालने वाले शायर

उर्दू अदब की दुनिया में अमजद हैदराबादी का नाम...

Topics

संगरूर का Banasar Bagh Museum! जींद रियासत की शानदार विरासत

पंजाब की ज़मीन अपने समृद्ध इतिहास, बहादुरी की दास्तानों,...

अमजद हैदराबादी: दर्द को रुबाई में ढालने वाले शायर

उर्दू अदब की दुनिया में अमजद हैदराबादी का नाम...

राबिया बसरी: मोहब्बत-ए-इलाही की पहली सूफ़ी शायरा 

तसव्वुफ़ की तारीख़ में अगर किसी एक नाम को...

Related Articles

Popular Categories