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गंगा सागर मेला: आस्था, मानवता और भाईचारे का संगम

हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर पश्चिम बंगाल के सागर द्वीप पर गंगा सागर मेला होता है। यह मेला सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, मानवता और सांस्कृतिक सद्भाव का अद्भुत उदाहरण है। हुगली नदी के तट पर 8 से 16 जनवरी तक चलने वाले इस मेले में लाखों श्रद्धालु गंगा और समुद्र के संगम पर स्नान कर मोक्ष की कामना करते हैं।

मेले में हर साल सांप्रदायिक सौहार्द का ऐसा नज़ारा देखने को मिलता है, जो हर दिल को छू जाता है। हिंदू तीर्थयात्रियों की मदद के लिए मुस्लिम संगठनों की भागीदारी भाईचारे का अनमोल संदेश देती है। इम्तियाज़ के “संकल्प टुडे” एनजीओ ने “भोजपुरी सेवा समिति” के तहत शिविर लगाकर मानवता की मिसाल पेश की। यहां मेडिकल चेकअप, मुफ़्त दवाएं और कानूनी सलाह उपलब्ध कराई गई। इम्तियाज़ कहते हैं, “हम धर्म नहीं, इंसानियत के लिए काम करते हैं।”

वहीं सैयद महमूद शाह वारसी ने अपने “बिहार सेवा समिति” के तहत 42 शिविर लगाए, जहां तीर्थयात्रियों को चिकित्सा सुविधाएं दी गई। सालों से उनकी यह सेवा गंगा सागर मेले में सच्ची निष्ठा और एकता की भावना का प्रतीक बनी हुई है। गंगा सागर मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि मानवता, सांस्कृतिक विविधता और भाईचारे का जीवंत प्रतीक है।

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