Thursday, September 3, 2026
28 C
Delhi

महाराष्ट्र की इस दरगाह में तीन दशकों से मनाई जा रही गणेश चतुर्थी

महाराष्ट्र के बुलढाणा (Buldhana) ज़िले में सैलानी बाबा की प्रसिद्ध दरगाह है। इस दरगाह में सैलानी बाबा का उर्स तो मनाया ही जाता है। इसके साथ ही गणेश चतुर्थी भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। दरगाह के परिसर में पिछले तीन दशकों से हर साल गणेश जी की स्थापना की जाती है। हिंदू मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग इसमे हिस्सा लेते हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक सद्भावना को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम भी इस उत्सव का हिस्सा होते हैं। सैलानी बाबा की इस दरगाह में सैलानी बाबा की इस दरगाह में अलग-अलग धर्मों और जातियों के लोग आस्था से आते हैं, जिससे इस स्थान का महत्व बढ़ जाता है।

गणेश स्थापना की परंपरा सैलानी बाबा के भक्त शंकर बाबा पोथकर जी ने शुरू की थी। दरअसल सैलानी बाबा के मुरीद रहे शंकर बाबा के भक्त अलग-अलग जातियों और धर्मों के थे। उन्होंने इस विविधता को सदा खुले दिल से स्वीकारा। सर्वेश्वरवाद की भावना को आगे बढ़ाते हुए, उन्होंने सैलानी बाबा की दरगाह में गणपति की स्थापना का साहसिक निर्णय लिया।

शंकर बाबा के निधन के बाद उनकी समाधि भी इसी दरगाह में बनाई गई। बाद में उनकी पत्नी की समाधि भी यहीं स्थापित की गई, जिससे यह स्थान एक महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थ स्थल बन गया। गणपति की आरती और नमाज का एक साथ होना, समाज में सहिष्णुता और एकता का संदेश देता है।

दरगाह परिसर में हनुमान और महादेव का भी मंदिर है। गुरुवार को इस दरगाह में सभी धर्मों की आरती, पूजा और नमाज़ अदा की जाती है। इस दरगाह की देखरेख हिंदू और मुस्लिम दोनों मिलकर करते हैं।

इस ख़बर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

ये भी पढ़ें: कश्मीर की कला में पश्मीना और आधुनिक चरखा से निखार 

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

संगरूर का Banasar Bagh Museum! जींद रियासत की शानदार विरासत

पंजाब की ज़मीन अपने समृद्ध इतिहास, बहादुरी की दास्तानों,...

अपतानी बुनाई : सिर्फ एक कपड़ा नहीं, पूरी संस्कृति है  जो खुद को बुन रही पीढ़ी-दर-पीढ़ी

अरुणाचल प्रदेश के हरे-भरे लोअर सुबनसिरी घाटी यानी जिरो...

ज़मीन अली: वो चराग़ जिसने उर्दू के लिए एक नया रास्ता रोशन किया

कुछ लोग सिर्फ़ अपने दौर के लिए काम नहीं...

अमजद हैदराबादी: दर्द को रुबाई में ढालने वाले शायर

उर्दू अदब की दुनिया में अमजद हैदराबादी का नाम...

Topics

संगरूर का Banasar Bagh Museum! जींद रियासत की शानदार विरासत

पंजाब की ज़मीन अपने समृद्ध इतिहास, बहादुरी की दास्तानों,...

अमजद हैदराबादी: दर्द को रुबाई में ढालने वाले शायर

उर्दू अदब की दुनिया में अमजद हैदराबादी का नाम...

राबिया बसरी: मोहब्बत-ए-इलाही की पहली सूफ़ी शायरा 

तसव्वुफ़ की तारीख़ में अगर किसी एक नाम को...

Related Articles

Popular Categories