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राजस्थान का मुस्लिम बहुल धनूरी गांव फौजियों की मिसाल है

शेखावाटी का झुंझुन जिले का राजस्थान में ही नहीं पूरे देश में शूरवीरों, बहादुरों के लिए अपनी एक विशेष पहचान रखता है। राजस्थान का धनूरी गांव (Dhanuri Village Rajashtan) बहादुरी की मिसाल है। जिले के बेटों पर यहां की मिट्टी को नाज है। यहां के बेटे देश के लिए मर मिटना गर्व की बात समझते हैं। देश को सबसे अधिक सैनिक और शहीद देने वाली झुंझुनूं की मिट्टी के कण कण में वीरता टपकती है। यहां के हर दूसरे घर में फौजी है।

प्रथम विश्व युद्ध से लेकर पड़ोसी देशों से भारत के अब तक हुए हर युद्ध में दुश्मन के खिलाफ इस गांव के बेटों ने अपने साहस का परिचय दिया है। गांव के करीब 600 से ज़्यादा बेटे अभी सेना में रहकर देश सेवा कर रहे हैं। धनूरी गांव के पूर्व फौजी मोहम्मद हुसैन खां बताते हैं, “गांव में लगभग 600 फौजी हैं। गांव के 18 बेटे अलग अलग युद्धों में और सरहद की रक्षा करते हुए शहादत दी है। “

शहीद कुतुबुद्दीन खां के बेटे कैप्टन मोइनुदीन खां, इनके बेटे कर्नल जमील खां और जमील खां का बेटा वर्तमान में लेफ्टिेनेंट के पद पर फौज में है। इनकी पांच पीढ़ियां देश सेवा कर रही है।गांव के बिग्रेडियर अहमद अली खां के बेटे सत्तार खां और इनके भाई निसार खां देश सेवा में हैं।

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ये भी पढ़ें: ‘तहकीक-ए-हिंद’: उज़्बेकिस्तान में जन्मे अल-बीरूनी का हिंदुस्तान की सरज़मीं से ख़ास रिश्ता

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