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बलविंदर सिंह की पगड़ी (Turban): पंजाब से फ़िल्म ‘धुरंधर’ तक का सफ़र

भारत के बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों फ़िल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ धूम मचा रही है। फ़िल्म की कहानी, एक्शन और कलाकारों की एक्टिंग को ऑडियंस का प्यार मिल रहा है। लेकिन इस कामयाबी के पीछे सिर्फ बड़े सितारे ही नहीं, बल्कि Punjab (पंजाब) के अमृतसर के कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने परदे के पीछे रहकर भी अपनी मेहनत से इसे और असलियत के साथ पेश करने में अहम भूमिका निभाई है।

इनमें से एक नाम बलविंदर सिंह का है, जो अमृतसर के कोट खालसा इलाके में अपना टर्बन स्टूडियो चलाते हैं। बलविंदर सिंह पेशे से दस्तार बांधने का काम करते हैं और उनकी यही कला उन्हें बॉलीवुड तक ले आई। इस फ़िल्म में उन्होंने रणवीर सिंह समेत कई कलाकारों के लिए अलग-अलग अंदाज़ की पगड़ियां तैयार की।

बलोची-पठानी पगड़ी का बड़ा चैलेंज

बलविंदर सिंह बताते हैं कि उन्हें शुरुआत में सिर्फ सिख दस्तार बांधने के लिए बुलाया गया था। लेकिन फ़िल्म के डायरेक्टर ने उनसे पूछा कि क्या वो बलोची और पठानी अंदाज़ की पगड़ी भी बांध सकते हैं। ये उनके लिए एक नया चैलेंज था, लेकिन उन्होंने इसे खुशी-खुशी क़बूल किया। वो कहते हैं, “पहले मैंने खुद पर पगड़ी बांधकर देखी, फिर अपने दोस्तों और जानने वालों पर ट्राय किया। धीरे-धीरे मुझे अंदाज़ समझ आने लगा।” उनकी मेहनत रंग लाई और जब फ़िल्म की टीम को उनका काम पसंद आया, तो फिर फ़िल्म में ज़्यादातर पगड़ियां उन्होंने ही बांधी।

Source: Sadda Punjab

हर किरदार के लिए अलग पहचान

इस फ़िल्म में उनका काम सिर्फ पगड़ी बांधना नहीं था, बल्कि हर किरदार के हिसाब से उसका स्टाइल तय करना भी था। कहीं पंजाबी अंदाज़ की दस्तार थी, तो कहीं बलोची और पठानी स्टाइल की पगड़ी, ताकि किरदार असली लगें और उनकी पहचान साफ दिखे। बलविंदर सिंह का ये पहला बड़ा प्रोजेक्ट नहीं है। इससे पहले भी वो एक हॉलीवुड फ़िल्म से जुड़े रह चुके हैं, जहां उन्होंने कलाकारों के लिए पगड़ियां सजाने का काम किया था। उसी फ़िल्म की टीम ने उन्हें ‘धुरंधर’ के लिए भी याद किया और उन्हें ये मौक़ा मिला।

कैसा रहा शूटिंग का माहौल

बलविंदर सिंह के लिए ये तजुर्बा ख़ास रहा। वो बताते हैं कि फ़िल्म के सेट पर माहौल काफी अच्छा और दोस्ताना था। ख़ासकर एक्टर रणवीर सिंह ने उन्हें पूरा एहतराम दिया। बलविंदर कहते हैं, “रणवीर सिंह बहुत ही खुशमिजाज़ इंसान हैं। उन्होंने हमारे काम की कद्र की और हमें पूरा सपोर्ट दिया।” इस फ़िल्म के बाद उनकी पहचान और भी बढ़ गई है। अब लोग उन्हें उनके नाम से कम और ‘धुरंधर’ वाली फ़िल्म से ज़्यादा पहचानने लगे हैं। ये उनके लिए फख्र की बात है कि उनकी मेहनत को इतने बड़े लेवल पर सराहा जा रहा है।

Source: Sadda Punjab

‘इंदर पगड़ी हाउस’ से खिदमत का सफ़र

अपने रोज़मर्रा के काम में बलविंदर सिंह आज भी अपने स्टूडियो “इंदर पगड़ी हाउस” में लोगों की पगड़ियां बांधते हैं। यहां कई लोग उनसे पगड़ी बांधना सीखने भी आते हैं। उनके लिए ये काम सिर्फ रोज़ी-रोटी का ज़रिया नहीं, बल्कि इज़्ज़त और खिदमत का काम है। बलविंदर सिंह का जुड़ाव अमृतसर के मशहूर गोबिंदगढ़ किले से भी रहा है। वहां बने दस्तार म्यूज़ियम में उन्होंने अलग-अलग अंदाज़ की पगड़ियों को मूर्तियों पर सजाया है। ये म्यूज़ियम भारत में अपनी तरह का एक अनोखा मकाम है, जहां पगड़ियों के अलग-अलग स्टाइल देखने को मिलते हैं।

स्टोरी – रवदीप सिंह

इस लेख को पंजाबी में पढ़ें

ये भी पढ़ें:  पंजाब और ईरान के ऐतिहासिक रिश्ते की दास्तान

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