पंजाब हमेशा से अपनी तरक्की पसंद सोच और खुले विचारों के लिए जाना जाता है। इसकी एक ख़ूबसूरत मिसाल हाल ही में हुई नगर परिषद चुनावों में देखने को मिली। पटियाला ज़िले के समाना शहर के वार्ड नंबर 18 के लोगों ने जात-पात और भेदभाव से ऊपर उठकर किन्नर समाज से जुड़ी कोमल महंत को भारी बहुमत से जीत दिलाई और अपना प्रतिनिधि चुना। ये जीत सिर्फ़ एक चुनावी कामयाबी नहीं है, बल्कि समाज में आ रहे बदलाव की भी निशानी है। इस नतीजे ने दिखा दिया है कि अब लोग किसी की पहचान, जाति या पृष्ठभूमि से ज़्यादा उसके काम, सेवा भाव और लोगों के लिए किए गए प्रयासों को अहमियत दे रहे हैं।
राजनीति में आने का मक़सद
कोमल महंत बताती हैं कि राजनीति में आने की उनकी कोई निजी ख्वाहिश नहीं थी। लेकिन वार्ड के लोगों ने उनकी सेवा भावना और समाज के लिए किए गए कामों को देखकर खुद उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आगे बढ़ाया। उनके इलाके में गलियों, नालियों और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं की हालत काफी ख़राब थी। लंबे समय से इन समस्याओं का कोई हल नहीं निकल रहा था, जिससे लोगों को रोज़ाना परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

इसके अलावा, युवाओं में बढ़ते नशे ने भी उन्हें गहरी चिंता में डाल दिया। नशे की वजह से कई परिवार बिखर रहे थे, रिश्तों में दूरियां बढ़ रही थी और बुज़ुर्ग माता-पिता को भी मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा था। इन सामाजिक समस्याओं को करीब से देखने के बाद कोमल महंत ने लोगों की भलाई और समाज में बदलाव लाने के लिए राजनीति में कदम रखने का फैसला किया।
सोने के कंगन गिरवी रखकर की लोगों की मदद
कोमल महंत का लोगों की सेवा करने का सफ़र चुनाव जीतने से बहुत पहले शुरू हो चुका था। वो लंबे समय से ज़रूरतमंद और गरीब परिवारों की बेटियों की शादियों में शामिल होकर उन्हें आशीर्वाद और शगुन देते रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान, जब कई परिवारों के सामने राशन और रोज़मर्रा की ज़रूरतों का संकट खड़ा हो गया था, तब कोमल महंत ने इंसानियत की एक मिसाल पेश की। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सोने के कंगन गिरवी रख दिए, ताकि ज़रूरतमंद लोगों तक राशन और मदद पहुंचाई जा सके।
कोमल महंत का मानना है कि आज उन्हें जो सम्मान और लोगों का प्यार मिला है, वो उन्हीं गरीब परिवारों, बेटियों और ज़रूरतमंद लोगों की दुआओं का नतीजा है, जिनकी उन्होंने मुश्किल वक्त में मदद की थी। उनके मुताबिक, लोगों की खिदमत और नेक नीयत ही उन्हें इस मुक़ाम तक लेकर आई है।

जनता का प्यार और धार्मिक आस्था
अपने वार्ड के लोगों से जुड़ी यादें साझा करते हुए कोमल महंत ने बताया कि वो कई सालों से शहर में होने वाले जागरण, धार्मिक भंडारों और खुशी के मौकों में शामिल होते रहे हैं। इसी वजह से उनका लोगों से एक खास जुड़ाव बना हुआ है। कोमल महंत के दिल में पीर-फकीरों और माता रानी के प्रति गहरी आस्था है। उनका मानना है कि धार्मिक और समाज सेवा के कामों में उन्हें जो दुआएं और आशीर्वाद मिले, उसी का नतीजा है कि आज लोगों ने उन पर इतना भरोसा जताया है।
शहर के लोगों और बुज़ुर्गों से मिल रहे सम्मान पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग बेहद दिलदार और सहयोगी होते हैं। वो हर अच्छे काम में साथ खड़े रहते हैं और मुश्किल वक्त में भी एक-दूसरे का सहारा बनते हैं। यही प्यार और भरोसा उनकी सबसे बड़ी ताक़त है।

समाज के लिए एक नया संदेश
कोमल महंत की जीत ने किन्नर समाज को लेकर लोगों की सोच में एक सकारात्मक बदलाव का संदेश दिया है। उनका कहना है कि किन्नर होना कोई अभिशाप या कमज़ोरी नहीं है। अगर किसी इंसान की सोच अच्छी हो और उसके दिल में लोगों की सेवा का जज़्बा हो, तो वो समाज के लिए बहुत कुछ कर सकता है।
कोमल महंत बताती हैं कि उन्हें लोगों से जो प्यार, सम्मान और बधाई के रूप में आशीर्वाद मिला, उसे उन्होंने हमेशा समाज सेवा में लगाने की कोशिश की है। यही वजह है कि लोगों का भरोसा आज उनके साथ खड़ा है। पंजाब के लोगों के सम्मान और अपनापन की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे कामों का नतीजा हमेशा अच्छा ही होता है। जो लोग समाज और इंसानियत की भलाई के लिए काम करते हैं, उन्हें लोगों का प्यार और सम्मान ज़रूर मिलता है। इसलिए हर व्यक्ति को हमेशा नेक रास्ते पर चलकर लोगों की भलाई के लिए काम करना चाहिए।
स्टोरी– मनमीत कौर
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