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जहां हर दीवार सुनाती है Mithila की कहानी, वही Jitwarpur बनेगा Bihar का पहला शिल्पग्राम

Bihar (बिहार) के मधुबनी ज़िले में बसे Jitwarpur (जितवारपुर) गांव इन दिनों रंगों, कला और नई उम्मीदों से भरा हुआ दिखाई देता है। गांव की गलियों में चलते हुए ऐसा लगता है जैसे हर दीवार कोई कहानी सुना रही हो। कहीं Mithila पेंटिंग में राम-सीता की झलक है, तो कहीं गांव की औरतों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी रंगों में उतर आई है। यही कला आज इस गांव की पहचान बन चुकी है। अब Jitwarpur (जितवारपुर) को बिहार के पहले शिल्पग्राम के तौर पर विकसित किया जा रहा है, जिससे गांव के कलाकारों में ख़ुशी और उम्मीद दोनों दिखाई दे रही हैं।

Jitwarpur (जितवारपुर) सिर्फ़ एक गांव नहीं, बल्कि कलाकारों की पूरी दुनिया है। यहां कई घर ऐसे हैं, जहां सुबह की शुरुआत रंग और ब्रश से होती है। गांव की औरतें, बच्चे और बुज़ुर्ग तक इस कला से जुड़े हुए हैं। किसी घर का चूल्हा Mithila पेंटिंग की कमाई से जलता है, तो किसी बच्चे की तालीम इन्हीं रंगों की बदौलत पूरी हो रही है। यहां की कला ने सिर्फ़ बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे मुल्क़ और विदेशों तक अपनी अलग पहचान बनाई है।

भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय और बिहार सरकार की मदद से गांव को शिल्पग्राम बनाया जा रहा है। शिल्पग्राम यानी ऐसी जगह, जहां लोक कला, हस्तशिल्प और तहज़ीब को बढ़ावा दिया जाए और कलाकारों को अपनी कला दिखाने और बेचने की बेहतर सहूलियत मिले। करीब नौ करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत गांव में कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जा रहा है। इसके साथ ही चार कमरों वाला गेस्ट हाउस भी तैयार हो रहा है, ताकि बाहर से आने वाले लोग गांव में रुक सकें और यहां की कला को क़रीब से देख सकें।

कलाकारों की पेंटिंग्स और दूसरे हस्तशिल्प सामान की बिक्री के लिए 12 स्टॉल भी बनाए जा रहे हैं। गांव की दीवारों को Mithila पेंटिंग से सजाया जा रहा है, जिससे पूरा गांव किसी खुले आर्ट गैलरी जैसा नज़र आने लगा है। Jitwarpur (जितवारपुर) की एक और ख़ास बात है कि ये भारत का इकलौता गांव है, जिसने देश को तीन पद्मश्री कलाकार दिए हैं। यहां के कलाकारों का कहना है कि शिल्पग्राम बनने से उनकी ज़िंदगी में बड़ा बदलाव आएगा।

अब उन्हें अपनी कला बेचने के लिए दूर-दूर नहीं जाना पड़ेगा। गांव में सैलानी आएंगे, जिससे आमदनी बढ़ेगी और नई पीढ़ी भी इस कला से जुड़ी रहेगी। गांव के लोग भी इस बदलाव से बेहद ख़ुश हैं। उनका कहना है कि गांव में लाइट लग रही है, सड़कें बन रही हैं और नाले बनाए जा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले वक़्त में Jitwarpur (जितवारपुर) सिर्फ़ एक गांव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का बड़ा नाम बन जाएगा।

ये भी पढ़ें: मधुबनी पेंटिंग: इतिहास, अहमियत और बनाने का तरीका

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