Wednesday, March 4, 2026
22.8 C
Delhi

हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह पर बसंत पंचमी का सूफ़ियाना रंग

बसंत पंचमी के अवसर पर दिल्ली की हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह पर एक अनोखी रौनक देखने को मिलती है। यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे का प्रतीक भी है। हर साल इस ख़ास दिन पर दरगाह को पीले फूलों से सजाया जाता है। हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया और अमीर खुसरो के मज़ार पर पीली चादर चढ़ाई जाती है। यह परंपरा करीब 700 साल पुरानी मानी जाती है।

हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह के लिए अमीर खुसरो ने पहने पीले कपड़े

कहा जाता है कि अमीर खुसरो ने अपने गुरु हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया को खुश करने के लिए बसंत पंचमी का एक विशेष अंदाज़ अपनाया था। जब उन्होंने कुछ महिलाओं को पीले कपड़े पहनकर मंदिर जाते देखा, तो उन्होंने भी पीला वस्त्र धारण किया और सरसों के फूल लेकर नृत्य किया। यह देखकर हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया मुस्कुरा उठे, और तभी से इस परंपरा की शुरुआत हुई।

हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया को कोई संतान नहीं थी, लेकिन उन्हें अपने भांजे तकी उद्दीन से गहरा लगाव था। उनके निधन के बाद औलिया बहुत दुखी हो गए। तब उनके प्रिय शिष्य अमीर खुसरो ने अपने गुरु को खुश करने के लिए यह अनोखी पहल की। इस मौके पर दरगाह में “खुसरो की बसंत” नामक सूफ़ी महफिल आयोजित होती है, जिसमें प्रसिद्ध कव्वाल अपनी प्रस्तुति देते हैं। इस साल भी कई मशहूर कव्वालों ने अपनी गायकी से माहौल को सूफ़ियाना बना दिया।

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं

ये भी पढ़ें: अमीर ख़ुसरो: शायरी, सूफ़ियत और हिन्दुस्तानी तहज़ीब का नायाब नगीना

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

ज़ायके का सफरनामा: दम पुख़्त से दिल की बात, पुरानी रसोई का नया ज़माना

दम पुख़्त: इंडियन फूड लवर्स अब सिर्फ विदेशी व्यंजनों (Exotic recipes) का स्वाद नहीं लेना चाहते, बल्कि अपनी पुरानी रसोई की ओर लौटने लगे हैं। 'रूट्स की तरफ वापसी' (Return to the roots) का ये ट्रेंड न सिर्फ खाने के स्वाद को बदल रहा है, बल्कि हमारी सेहत को भी नया आयाम दे रहा है।

अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

U.S.-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप का फ्रेमवर्क U.S.-इंडिया सिक्योरिटी कोऑपरेशन को तेज़ करेगा, इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेगा।

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

Topics

ज़ायके का सफरनामा: दम पुख़्त से दिल की बात, पुरानी रसोई का नया ज़माना

दम पुख़्त: इंडियन फूड लवर्स अब सिर्फ विदेशी व्यंजनों (Exotic recipes) का स्वाद नहीं लेना चाहते, बल्कि अपनी पुरानी रसोई की ओर लौटने लगे हैं। 'रूट्स की तरफ वापसी' (Return to the roots) का ये ट्रेंड न सिर्फ खाने के स्वाद को बदल रहा है, बल्कि हमारी सेहत को भी नया आयाम दे रहा है।

अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

U.S.-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप का फ्रेमवर्क U.S.-इंडिया सिक्योरिटी कोऑपरेशन को तेज़ करेगा, इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेगा।

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdaspur killings: सीमा पार से खतरों का बदलता चेहरा

पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर दो पुलिसवालों - असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार की हत्या ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ते सुरक्षा ख़तरों (Gurdaspur killings: Changing face of cross-border threats) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Related Articles

Popular Categories