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वकील नदीम क़ादरी नेचर स्कूल के ज़रीये लोगों में जगा रहे पर्यावरण से लगाव और जुनून 

क़ुदरत की खूबसूरती को देखकर रुह को ख़ुशी मिलती है। मदर नेचर के करीब आ कर दिल को सुकून और आंखों को ठंडक मिलती है। जिस तरह से मां की गोद में आकर राहत मिलती है उसी तरह से नेचर के करीब रहने वालों को भी चैन मिलता है। कश्मीर के पंपोर में केसर के खेतों के बीच मिट्टी और ईंटों से बना, एक स्कूल जो प्रकृति की चीजों से तैयार किया गया है। ये एक तरह का आउटडोर Nature School है।

ये स्कूल पर्यावरण की जागरूकता को बढ़ावा देने की नायाब पेशकश देता है। इस पहल के पीछे पर्यावरण वकील और नेचर स्कूल  के संस्थापक नदीम क़ादरी हैं, जो कश्मीर के पुलवामा ज़िले के रहने वाले हैं। पर्यावरण से लगाव और अपने गहरे जुनून से प्रेरित होकर उन्होंने Nature School की शुरूआत की। नदीम क़ादरी करीब 10 साल से पर्यावरण वकील के तौर पर श्रीनगर हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं। पर्यावरण को बचाने के लिए एक नायाब कोशिश कर रहे हैं। जो वाकई क़ाबिल-ए-तारीफ़ है।

कैसे हुई नेचर स्कूल की शुरुआत

एक पर्यावरण वकील की कोशिश रहती है कि वो कैसे अपने नेचुरल रिसोर्सेज को, वन्य जीवन को और जंगल को बचा सकें। इसी सिलसिले में साल 2016 में नेचर ऑफ स्कूल की शुरुआत हुई जब कादरी ने एक्सपर्ट के साथ इस तसव्वुर पर बातचीत करके Nature School की नींव रखी। इस नायाब कोशिशों से पर्यावरण जागरूकता और संरक्षण के लिए एक क़ाबिल-ए-क़दर स्कूल की शुरुआत हुई।

किस तरह से होती है नेचर स्कूल में पढ़ाई

Nature School एक आउटडोर स्कूल है। इसमें स्टूडेंट्स नेचुरल चीज़ों को आपस में जानने की कोशिश करते हैं और पर्यावरण को बचाने में अपना अहम रोल अदा करते हैं। इस स्कूल की ख़ास बात ये है कि,अपने छात्रों से कोई फ़ीस नहीं लेता है। स्कूल में टीचर्स अपनी मर्जी और शौक से पढ़ाते हैं जिन्हें मंथली सैलरी भी नहीं मिलती है। स्टूडेंट्स पर्यावरण को बचाने के लिए अलग-अलग जगह का दौरा करते हैं।

पर्यावरण की हिफ़ाज़त की अहमियत

क्लास गिली ज़मीन (wetland) के आसपास, जंगलों और केसर के खेतों में होती हैं, जहां छात्र पर्यावरण संरक्षण और वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन पर टीचर्स से तालीम हासिल करते हैं। क्लास की लॉन-ग्रेडिंग होती है और छात्रों के लिए कोई एज लिमिट नहीं होती है। इस तरह तालीमी माहौल का हिस्सा बनने दिलचस्पी रखने वाले हर शख्स के लिए आसान हो जाता है। तकरीबन हर इतवार (Sunday) को, छात्र जंगलों, केसर के खेतों और नमी वाली ज़मीन के आसपास पैदल यात्रा में हिस्सा लेते हैं, और पर्यावरण की हिफ़ाज़त की अहमियत में जानकारी हासिल करते हैं।

एक मुहिम से पर्यावरण को बचाने की कोशिश

नदीम क़ादरी ने dnn24 से बात करते हुए कहा कि, हमने साल 2000 में एक मुहिम(Campaign) की शुरुआत की। कश्मीर के पंपोर में 4 वेटलैंड्स को बचाया। इसमें क्लास 9वीं और 10वीं के छात्र शामिल हुए थे। आज पूरे जम्मू और कश्मीर के बेस्ड वेटलैंड्स में पंपोर के है। इस स्कूल का मक़सद पंपोर के बच्चे वेटलैंड्स और नेचुरल रिसोर्सेज को बचाने में अपना रोल अदा करें। नेचर स्कूल ने कई लोगों, ख़ासतौर से नौजवान पीढ़ी के बीच पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूकता को प्रभावी ढंग से बढ़ावा दिया है। नेचर के साथ छात्रों के वास्तविक जुड़ाव के साथ, स्कूल न सिर्फ़ एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में उभर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सही रास्ता को रोशन कर रहा है।

ये भी पढ़ें: लकड़ी पर शानदार दस्तकारी और जियोमेट्रिक पैटर्न के साथ बनती है ‘ख़तमबंद’ आर्ट

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