Monday, August 3, 2026
31.8 C
Delhi

बिस्मिल अज़ीमाबादी: ‘सरफ़रोशी की तमन्ना’ के ख़ालिक़ और आज़ादी के जज़्बे के शायर

“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है।”

यह शेर सुनते ही ज़ेहन में इंक़लाब, वतन से मोहब्बत और कुर्बानी का जज़्बा ताज़ा हो जाता है। अक्सर लोग इसे शहीद राम प्रसाद बिस्मिल से जोड़ते हैं, लेकिन हक़ीक़त यह है कि इस मशहूर ग़ज़ल के ख़ालिक़ उर्दू के नामवर शायर बिस्मिल अज़ीमाबादी थे।

शुरुआती ज़िंदगी

बिस्मिल अज़ीमाबादी का असली नाम सैयद शाह मोहम्मद हसन था। उनकी पैदाइश 1901 में बिहार के ऐतिहासिक शहर अज़ीमाबाद (पटना) में एक ज़मींदार और इल्मी-ओ-अदबी ख़ानदान में हुयी।

उनके वालिद सैयद शाह आले हसन पेशे से बैरिस्टर थे, लेकिन बिस्मिल के बचपन में ही उनका इंतिक़ाल हो गया। उनके दादा मुबारक अज़ीमाबादी उर्दू के मशहूर शायर और अदीब थे। ननिहाल की तरफ़ भी अदब और शायरी का माहौल था। उनके नाना शाह मुबारक काकवी अज़ीमाबादी और मामू शाह कमाल भी जाने-माने शायर थे।

ऐसे अदबी माहौल में परवरिश पाने वाले बिस्मिल के दिल में बचपन से ही शायरी का शौक़ पैदा हो गया।

शायरी का सफ़र

बिस्मिल ने अपने लिए “बिस्मिल” तख़ल्लुस चुना, जिसका मतलब है ज़ख़्मी या घायल

उन्होंने उर्दू के बड़े उस्ताद ख़ान बहादुर शाद अज़ीमाबादी से इस्लाह ली। शाद अज़ीमाबादी ने उनकी शायरी को नई बुलंदी दी। बिस्मिल अक्सर कुतुबख़ाना अंजुमन तरक़्क़ी-ए-उर्दू, पटना जाया करते थे, जहां उन्हें उर्दू अदब के बड़े-बड़े शायरों और अदीबों की सोहबत मिली।

उनकी ग़ज़लों में इश्क़ भी है, दर्द भी, रूहानियत भी और वतन से बेपनाह मोहब्बत भी।

आज़ादी की तहरीक़ में हिस्सा

बिस्मिल अज़ीमाबादी सिर्फ़ शायर ही नहीं थे, बल्कि मुल्क की आज़ादी के जज़्बे से भी सरशार थे।

सन 1920 में उन्होंने कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में शिरकत की। उसी दौर में अंग्रेज़ हुकूमत के ज़ुल्म, ख़ास तौर पर जलियांवाला बाग़ हत्याकांड, ने उनके दिल को झकझोर दिया।

इन्हीं हालात में उन्होंने 1921 में अपनी मशहूर ग़ज़ल “सरफ़रोशी की तमन्ना” लिखी, जो आगे चलकर हिंदुस्तान की आज़ादी की लड़ाई का सबसे बड़ा तराना बन गई।

“सरफ़रोशी की तमन्ना” की कहानी

यह ग़ज़ल पहली बार दिल्ली से निकलने वाले रिसाले “सबाह” में छपी।

बाद में इस ग़ज़ल को महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल ने अपने इंक़लाबी नारों का हिस्सा बनाया। भगत सिंह, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ां, चंद्रशेखर आज़ाद और न जाने कितने आज़ादी के दीवानों ने इसे अपना जज़्बाती पैग़ाम बना लिया।

आज भी यह ग़ज़ल सुनते ही हर हिंदुस्तानी का सीना फ़ख्र से चौड़ा हो जाता है।

वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमां
हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है

अदबी ख़िदमात

बिस्मिल अज़ीमाबादी की बहुत-सी तहरीरें वक़्त के साथ ज़ाया हो गईं। जो बच सकीं, उन्हें 1980 में “हिकायत-ए-हस्ती” के नाम से किताबी शक्ल में शाया किया गया। इसमें ख़ुदा बख़्श ओरिएंटल लाइब्रेरी, पटना का अहम किरदार रहा।

उनकी तहरीरें आज भी कई यूनिवर्सिटियों और लाइब्रेरीज़ में महफ़ूज़ हैं, जिनमें यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो, दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी और दूसरी बड़ी इदारे शामिल हैं।

फ़िल्मों में गूंजता तराना

“सरफ़रोशी की तमन्ना” सिर्फ़ किताबों तक महदूद नहीं रही, बल्कि कई मशहूर फ़िल्मों में भी इस्तेमाल हुई, जिनमें यह फ़िल्में शामिल हैं।

  • शहीद (1965)
  • सरफ़रोश (1999)
  • द लीजेंड ऑफ़ भगत सिंह (2002)
  • रंग दे बसंती (2006)
  • गुलाल (2009)

बिस्मिल अज़ीमाबादी का इंतिक़ाल 20 जून 1978 को पटना में हुआ। उन्हें बिहार के कुरथा गांव में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।

उनके इंतिक़ाल के बाद भी उनकी शायरी आज़ादी, इंसानियत और हौसले की आवाज़ बनकर ज़िंदा है।

उनकी याद में बिहार उर्दू अकादमी हर साल “बिस्मिल अज़ीमाबादी अवॉर्ड” भी पेश करती है।

बिस्मिल अज़ीमाबादी ने अपनी शायरी से यह साबित कर दिया कि कलम की ताक़त तलवार से कहीं ज़्यादा असरदार होती है। उनकी ग़ज़लें सिर्फ़ अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि एक दौर की आवाज़, एक क़ौम का जज़्बा और आज़ादी की पुकार हैं।

ये भी पढ़ें:अमीर हसन सिज्ज़ी: हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया के अज़ीज़ मुरीद और सूफ़ी शायर 

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

दाता गंज बख़्श अली: तसव्वुफ़ और इल्म की रोशन मिसाल

हज़रत अली हुज्वेरी रहमतुल्लाहि अलैह, जिन्हें दुनिया दाता गंज...

प्रकृति के दो अनमोल रत्न: सुंदरवन और पश्चिमी घाट की कहानी

प्रकृति ने भारत को जो तोहफे दिए हैं, उनमें...

अमीर बख़्श साबरी: इश्क़, अकीदत और सूफ़ियाना शायरी के अलमबरदार

अमीर बख़्श साबरी का शुमार हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के...

Indian Squash: Anahat Singh ने वो कर दिखाया, जिसका भारत 21 साल से इंतज़ार कर रहा था

कई बार किसी खिलाड़ी की जीत सिर्फ़ एक मैच...

Topics

दाता गंज बख़्श अली: तसव्वुफ़ और इल्म की रोशन मिसाल

हज़रत अली हुज्वेरी रहमतुल्लाहि अलैह, जिन्हें दुनिया दाता गंज...

प्रकृति के दो अनमोल रत्न: सुंदरवन और पश्चिमी घाट की कहानी

प्रकृति ने भारत को जो तोहफे दिए हैं, उनमें...

अमीर बख़्श साबरी: इश्क़, अकीदत और सूफ़ियाना शायरी के अलमबरदार

अमीर बख़्श साबरी का शुमार हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के...

ख़्वाजा एहसानुल्लाह ख़ां: सादा अल्फ़ाज़ में गहरी कैफ़ियत के शायर

उर्दू अदब की तारीख़ में ख़्वाजा एहसानुल्लाह ख़ां 'बयां'...

Pithora Painting: जब दीवारों पर रंगों के साथ उतरती है आस्था और पुरखों की कहानी

किसी कला की असल ख़ूबसूरती सिर्फ़ रंगों में नहीं,...

Related Articles

Popular Categories