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Commonwealth Games 2026 पर Tejinder Toor की नज़र, नई फिटनेस रणनीति के दम पर बड़ा दांव

पंजाब की सरज़मीन ने हमेशा ऐसे खिलाड़ियों को जन्म दिया है, जिन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर देश का नाम रोशन किया है। इन्हीं में एक बड़ा नाम है शॉट पुट (गोला फेंक) के स्टार एथलीट Tejinder Toor (तेजिंदर पाल सिंह तूर) का। उन्होंने दो बार ओलंपिक में भारत को रिप्रेज़ेंट कर चुके हैं। वो एशियन गेम्स के मौजूदा चैंपियन हैं और 21.77 मीटर का नेशनल रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है।

अपनी शानदार कामयाबियों की बदौलत उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स में एक अलग पहचान बनाई है। इन दिनों Tejinder Toor (तेजिंदर पाल सिंह तूर) साल 2026 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स की तैयारी में पूरी लगन के साथ जुटे हुए हैं। इसके लिए वो पटियाला में रोज़ाना मेहनत और लगातार प्रैक्टिस कर रहे हैं।

Pic Credit: India.com

चोट से वापसी और Commonwealth Games पर नज़र

खेलों का सफ़र कभी आसान नहीं होता और Tejinder Toor (तेजिंदर पाल सिंह तूर) का सफ़र भी कई मुश्किलों से गुज़रा है। साल 2018 के Commonwealth Games में उन्होंने हिस्सा लिया था, लेकिन एक चोट की वजह से उन्हें मुकाबले से बाहर होना पड़ा।

मगर एक सच्चा खिलाड़ी कभी हार नहीं मानता। एशियन गेम्स में 20.75 मीटर का रिकॉर्ड बनाने वाले और बाद में 21.77 मीटर का नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले तेजिंदर का अब एक साफ़ मक़सद है। वो इस बार Commonwealth Games 2026 में अपना अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करना चाहते हैं और भारत के लिए मेडल जीतना चाहते हैं।

हाल ही में सऊदी अरब के एथलीट मोहम्मद टोलो ने उनका एशियाई रिकॉर्ड तोड़ दिया है। लेकिन इससे Tejinder Toor (तेजिंदर पाल सिंह तूर) का हौसला कम नहीं हुआ। अब उनका अगला मकसद 22 मीटर की दूरी पार करना है और एक नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करना है।

Pic Credit: TOI

खेल के लिए पूरा समर्पण, सख़्त रूटीन

एक इंटरनेशनल चैंपियन बनने के पीछे कई सालों की कड़ी मेहनत और लगन होती है। Tejinder Toor (तेजिंदर पाल सिंह तूर) बताते हैं कि उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पूरी तरह डिसीप्लेन में बंधी हुई है। उनके दिन की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर गुरु महाराज का नाम लेने से होती है। इसके बाद वो सीधे ट्रेनिंग के लिए ग्राउंड पर पहुंच जाते हैं। वहां दो से तीन घंटे तक लगातार पसीना बहाने के बाद नाश्ता करते हैं और फिर कुछ देर आराम करते हैं।

Tejinder Toor (तेजिंदर पाल सिंह तूर) कहते हैं कि उनकी ज़िंदगी सिर्फ “ग्राउंड से कमरे तक और कमरे से ग्राउंड तक” ही सीमित है। उनके मुताबिक, अगर किसी खिलाड़ी को अपने खेल में सबसे ऊंचे मुकाम तक पहुंचना है, तो उसे अपनी बहुत-सी निजी खुशियों का त्यागना पड़ता है। शादी-ब्याह, पार्टियां और दूसरी सामाजिक महफिलों से भी दूर रहना पड़ता है। देश के लिए मेडल जीतने के जुनून में तेजिंदर ने अपनी पूरी ज़िंदगी खेल के नाम कर दी है।

चोट के बाद बदली फिटनेस की रणनीति

पिछले कुछ समय में Tejinder Toor (तेजिंदर पाल सिंह तूर) को कलाई (Wrist) और ग्रोइन (जांघ के ऊपरी हिस्से) में चोटों का सामना करना पड़ा। इन चोटों की वजह से वो भुवनेश्वर में हुई इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में अपना बेहतरीन प्रदर्शन नहीं कर पाए थे।

Pic Credit: The Hindu

इन चोटों से उबरने के लिए उन्होंने अपनी ट्रेनिंग में बड़ा बदलाव किया। पहले वो ज़्यादातर बड़े मसल्स, जैसे बेंच प्रेस और स्क्वैट्स पर ध्यान देते थे। लेकिन अब उन्होंने छोटे मसल्स को भी मज़बूत बनाने पर ख़ास फोकस करना शुरू किया है, ताकि आगे चलकर चोट लगने का खतरा कम हो सके।

इसके अलावा, अपने खेल की रफ़्तार और जंपिंग बेहतर करने के लिए तेजिंदर ने करीब 15 किलो वज़न भी कम किया है। वज़न कम होने के बाद उनके घुटनों और टखनों का दर्द करीब पूरी तरह ख़त्म हो गया है। साथ ही, गोला फेंकते समय उनकी घूमने की रफ़्तार भी पहले से काफी बेहतर हो गई है।

नए खिलाड़ियों का उभार और दुनिया की बड़ी चुनौती

भारतीय शॉट पुट के भविष्य को लेकर Tejinder Toor (तेजिंदर पाल सिंह तूर) काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि भारत में अब समरदीप और करणवीर जैसे कई नए एथलीट उभर रहे हैं, जो 20 मीटर से ज़्यादा की थ्रो कर रहे हैं। उनके मुताबिक, पहली बार भारत के पास ऐसे तीन मज़बूत खिलाड़ी हैं, जो लगातार 20 मीटर से आगे गोला फेंकने की काबिलियत रखते हैं।

Pic Credit: NDTV Sports

उनका मुकाबला अमेरिका के दिग्गज शॉट पुट खिलाड़ी रायन क्राउज़र (Ryan Crouser) से है, जिनके नाम 23.56 मीटर का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। तेजिंदर कहते हैं कि रायन क्राउज़र का 12–15 साल तक दुनिया के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में बने रहना और करीब हर बड़े मुकाबले में गोल्ड मेडल जीतना अपने आप में एक शानदार कामयाबी है।

आने वाले मुकाबलों में सऊदी अरब के मोहम्मद टोलो और न्यूज़ीलैंड के टॉम वॉल्श और जैको गिल जैसे दिग्गज खिलाड़ी उनके बड़े मुकाबलेदार होंगे। हालांकि, तेजिंदर का कहना है कि उनका पूरा फोकस किसी दूसरे खिलाड़ी पर नहीं, बल्कि अपनी परफॉर्मेंस बेहतर करने और अपनी पर्सनल बेस्ट थ्रो करने पर है।

भारतीय एथलेटिक्स में बदलाव और सरकार का साथ

Tejinder Toor (तेजिंदर पाल सिंह तूर) का कहना है कि आज का भारतीय एथलीट पहले से कहीं ज़्यादा तैयार और आत्मविश्वास से भरा हुआ है। उनका मानना है कि जैवलिन स्टार नीरज चोपड़ा की कामयाबी ने भारतीय खिलाड़ियों के दिल से ये डर निकाल दिया है कि हम ओलंपिक में मेडल नहीं जीत सकते।

वो कहते हैं कि अब श्रीशंकर, रोहित यादव और महज़ 18 साल की उम्र में हाई जंप का रिकॉर्ड बनाने वाली पूजा जैसे कई नए खिलाड़ी लगातार देश का नाम रोशन कर रहे हैं। खिलाड़ियों को मिलने वाली सहूलियतों पर बात करते हुए तेजिंदर ने कहा कि पंजाब सरकार खिलाड़ियों को 8 लाख रुपये की पार्टिसिपेशन राशि दे रही है। वहीं, केंद्र सरकार की TOPS (Target Olympic Podium Scheme) भी खिलाड़ियों को अच्छी मदद और ज़रूरी सहारा दे रही है।

उन्होंने पंजाब सरकार से एक गुज़ारिश भी की। उनका कहना है कि खिलाड़ियों का मुस्तकबिल महफूज़ करने के लिए स्पोर्ट्स कोटे के तहत सरकारी नौकरियों की भर्ती का अमल जल्द शुरू होना चाहिए, क्योंकि ये प्रक्रिया पिछले कुछ समय से रुकी हुई है।

Pic Credit: DNA India

युवाओं के नाम तेजिंदर पाल सिंह तूर का ख़ास पैगाम

आज के दौर में, जब पंजाब का नौजवान नशे और गलत संगत जैसी कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में एथलीट Tejinder Toor (तेजिंदर पाल सिंह तूर) एक मिसाल बनकर सामने आए हैं। अपनी ज़िंदगी के मुश्किल दौर और खराब फॉर्म से बाहर निकलकर उन्होंने ये साबित किया है कि मेहनत और हौसले से हर चुनौती को हराया जा सकता है।

युवाओं के लिए उनका साफ़ पैगाम है कि अगर ज़िंदगी में कामयाब होना है, तो सबसे पहले गलत संगत से दूर रहना होगा। तेजिंदर कहते हैं कि अगर कोई दोस्त आपको गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश करता है, तो बिना किसी झिझक के उसे अपनी ज़िंदगी और अपनी फ्रेंड लिस्ट, दोनों से बाहर कर देना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने मां-बाप की बात सुनें और उनकी सलाह पर भरोसा करें। उनके मुताबिक, वालिदैन की सही रहनुमाई इंसान को मुश्किल वक़्त से निकालकर उसकी मंज़िल तक पहुंचाने में सबसे बड़ा सहारा बनती है।

स्टोरी– मनमीत कौर

इस लेख को पंजाबी में पढ़ें

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