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प्रजना फाउंडेशन का महिलाओं की गरिमा और मासिक धर्म स्वास्थ्य की दिशा में कदम

भारत में महिलाओं के पीरियड्स जैसे सेंसिटिव टॉपिक पर बात करना हमेशा से मुश्किल रहा है। लड़कियां और महिलाएं इसे लेकर शर्मिंदगी महसूस करती हैं वहीं समाज भी इस पर बात करने से कतराता है। प्रजना फाउंडेशन ने इस पर बनी चुप्पी को तोड़ने का बीड़ा उठाया है। प्रजना फाउंडेशन महिलाओं और लड़कियों को उनके शरीर को समझने और मासिक धर्म को नॉर्मल मानने की दिशा में काम कर रहा है।

प्रजना फाउंडेशन मासिक धर्म से जुड़े मिथकों को तोड़ना और इसे लेकर सकारात्मक माहौल तैयार करने पर काम कर रहा है। इनके प्रोजेक्ट किशोरी के तहत, 2019 से अब तक 100 से ज्यादा स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाए गए। इन अभियानों में लड़कियों को मासिक धर्म के साइंटिफिक और प्रैक्टिकल साइड के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही, हाइजीन किट भी बांटे गए। इस किट में सैनिटरी पैड, साबुन और डिस्पोजल बैग शामिल थे।

इन कैंपेन के दौरान लड़कियों को ये बताया गया कि मासिक धर्म शर्म का नहीं, बल्कि एक नॉर्मल फिजिकल प्रोसेस है। स्कूलों में लड़कियों को ग्रुप  में इकट्ठा करके उनके सवालों के जवाब दिए गए और उन्हें ये एहसास दिलाया गया कि वे अकेली नहीं हैं। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में ये जागरूकता अभियान ख़ास रूप से सफल रहे, जहां मासिक धर्म से जुड़ी गलतफहमियां गहरी जड़ें जमाए हुए थीं।

महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए नए आयाम

स्वास्थ्य और स्वच्छता हर महिला की बुनियादी ज़रूरत है, लेकिन ये सच्चाई है कि हमारे देश में आज भी कई महिलाएं इन सुविधाओं से वंचित हैं। प्रजना फाउंडेशन ने महिलाओं की इस ज़रूरत को समझते हुए स्वच्छता किट वितरण की पहल शुरू की। ये सिर्फ एक सामान बांटने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि महिलाओं को उनकी गरिमा और आत्मसम्मान लौटाने का एक प्रयास है। किट वितरण के दौरान महिलाओं को स्वच्छता के महत्व और मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई बनाए रखने के तरीके बताए गए। फाउंडेशन का मानना है कि स्वच्छता किट केवल एक शुरुआत है। असल बदलाव तब होगा जब महिलाएं इन साधनों का सही तरीके से इस्तेमाल करेंगी और खुद को आत्मनिर्भर महसूस करेंगी।

प्रोजेक्ट किशोरी के तहत, ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में 15,000 से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों को इन किट्स का फायदा मिला। खासतौर पर उन इलाकों में, जहां स्वच्छता किट्स का इस्तेमाल आम बात नहीं थी। कई महिलाएं शुरू में किट्स लेने में झिझकती थीं, लेकिन फाउंडेशन की टीम ने उनके साथ बैठकर उनकी परेशानी को दूर किया और उन्हें ये महसूस कराया कि ये किट्स उनकी भलाई के लिए हैं।

प्रजना फाउंडेशन महिलाओं की मदद कर रहा है (फोटो: प्रजना फाउंडेशन)

स्कूलों और समुदायों में मासिक धर्म जागरूकता अभियान

स्कूलों और समुदायों में जाकर मासिक धर्म पर चर्चा करना फाउंडेशन का एक अहम हिस्सा है। लड़कियों को उनके शरीर और मासिक धर्म के बारे में शिक्षित करना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनकी गरिमा बनाए रखना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं। फाउंडेशन ने किशोरी क्लब बनाए हैं, जो लड़कियों के लिए सहायक नेटवर्क की तरह काम करते हैं। ये क्लब मासिक धर्म के बारे में चर्चा करने और इसे लेकर शर्म को दूर करने का एक मंच है। 

यहां लड़कियां अपने एक्सपीरियंस शेयर करती हैं और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाती हैं। स्कूलों में आयोजित वर्कशॉप के दौरान, लड़कों को भी शामिल किया जाता है ताकि वे इस सब्जेक्ट पर संवेदनशील बन सकें। ये कदम बेहद सराहनीय है, क्योंकि मासिक धर्म को लेकर जो भेदभाव लड़कियों को झेलना पड़ता है, वो समाज के हर वर्ग को शिक्षित करने से ही खत्म होगा। ग्रामीण इलाकों में, जहां लड़कियां अक्सर स्कूल छोड़ देती हैं, इन वर्कशॉप ने उन्हें वापस शिक्षा की ओर इंस्पायर किया है।

महिलाओं की गरिमा और आत्मनिर्भरता के लिए प्रयास

महिलाओं को उनकी गरिमा लौटाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रजना फाउंडेशन ने कई कदम उठाए हैं। मासिक धर्म जैसे मुद्दों पर चर्चा करना, जो पहले एक टैबू सब्जेक्ट माना जाता था, अब महिलाओं के बीच नॉर्मल होता जा रहा है। फाउंडेशन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। ये प्रशिक्षण न सिर्फ उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाता है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास भी देता है।

गांवों और शहरों में कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं, जिनमें महिलाओं को उनके अधिकार और स्वास्थ्य के बारे में बताया जाता है। 40 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए फाउंडेशन ने ख़ास कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें मेनोपॉज से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा की जाती है। ये महिलाएं अक्सर इस चरण में खुद को अकेला महसूस करती हैं, लेकिन फाउंडेशन ने उन्हें ये एहसास दिलाया है कि वे अकेली नहीं हैं।

प्रजना फाउंडेशन ने लड़कियों को किशोरी किट वितरित की(फोटो: प्रजना फाउंडेशन)

सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता सुविधाओं की पहल

प्रजना फाउंडेशन ने सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। महिलाओं के लिए साफ-सुथरे और सुरक्षित शौचालयों की कमी केवल स्वच्छता का नहीं, बल्कि उनकी गरिमा का भी सवाल है। फाउंडेशन ने सरकारी अधिकारियों और स्थानीय संगठनों के साथ मिलकर इस मुद्दे को बार-बार उठाया है। स्टेडियम, स्कूल और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के लिए स्वच्छता सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं। ये केवल बुनियादी ढांचे को सुधारने का प्रयास नहीं है, बल्कि समाज को ये संदेश देने की कोशिश है कि महिलाओं की गरिमा का सम्मान करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

लड़कियों के साथ जश्न मनाना (स्रोत: प्रजना फाउंडेशन)

सामुदायिक नेतृत्व और बदलाव की दिशा में कदम

फाउंडेशन ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सामुदायिक नेतृत्व पर भी जोर दिया है। उन महिलाओं को, जो नेतृत्व करने की क्षमता रखती हैं, फाउंडेशन ने प्रशिक्षित किया है ताकि वे अपने समुदाय में बदलाव ला सकें। इन महिलाओं को अपने एरिया में वर्कशॉप आयोजित करने और दूसरी महिलाओं को जागरूक करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। ये मॉडल न केवल महिलाओं को सशक्त बनाता है, बल्कि समाज में एक पॉज़िटिव  बदलाव भी लाता है। किशोरी क्लब और सामुदायिक कार्यशालाओं ने उन क्षेत्रों में भी असर डाला है। , जहां पहले मासिक धर्म जैसे विषयों पर बात करना मुश्किल था। आज, इन क्लबों की मदद से कई लड़कियां और महिलाएं खुलकर इस पर बात करती हैं। 

भविष्य की योजनाएं और स्थायी बदलाव की दिशा में प्रयास

प्रजना फाउंडेशन की नजरें फ्यूचर पर हैं। स्कूलों में ड्रॉपआउट दर कम करने के लिए स्पेशल इवेंट “अक्षरा कक्षा” शुरू किया है, जिनमें अकेडमिक एजुकेशन के साथ लाइफ स्किल भी सिखा रहे हैं। फ्यूचर में, फाउंडेशन मासिक धर्म स्वच्छता किट्स को और भी बेहतर बनाने और इन्हें समय-समय पर भरने की दिशा में काम करेगा।  

प्रजना फाउंडेशन लड़कियों की मदद कर रहा है(स्रोत: प्रजना फाउंडेशन)

महिलाओं के सशक्तिकरण में प्रज्ञा फाउंडेशन की भूमिका

प्रजना फाउंडेशन महिलाओं के इम्पावरमेंट के लिए पूरी लगन से काम कर रहा है। ये संस्था उन विषयों पर जागरूकता फैलाने पर फोकस करती है, जिन पर अक्सर बात नहीं की जाती, जैसे मासिक धर्म और मेनोपॉज। ख़ासकर 40 साल से ऊपर की कई महिलाएं ये नहीं जानतीं कि मेनोपॉज के दौरान होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलावों को कैसे संभाला जाए।फाउंडेशन की वर्कशॉप में इन महिलाओं को आहार में बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य का प्रबंधन और संपूर्ण स्वास्थ्य का ख्याल रखने के बारे में आसान  तरीके से जानकारी दी जाती है। लेकिन फाउंडेशन का काम सिर्फ जानकारी देना नहीं है। ये समुदाय में उन महिलाओं की पहचान करता है, जो कुछ बड़ा करने का जज़्बा रखती हैं।

इन महिलाओं को नेतृत्व के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे अपने क्षेत्रों में इसी तरह की कार्यशालाएं आयोजित कर सकें। इस तरह फाउंडेशन न केवल महिलाओं को सशक्त बनाता है, बल्कि उन्हें अपने समुदाय में बदलाव लाने का जरिया भी बनाता है। इसके अलावा, प्रजना फाउंडेशन महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए भी काम करता है। संस्था उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण देती है और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती है।

आर्थिक स्थिरता के साथ, महिलाएं खुद के लिए बेहतर फैसले लेने और अपने परिवार की मदद करने में सक्षम होती हैं। प्रजना फाउंडेशन का ये प्रयास महिलाओं को जागरूक बनाने के साथ-साथ दूसरों को जागरूक करने की दिशा में भी काम करता है। ये केवल एक महिला का जीवन नहीं बदलता, बल्कि पूरे समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में योगदान देता है। प्रजना फाउंडेशन इस बदलाव की एक बड़ी वजह बन रहा है।

प्रजना फाउंडेशन लड़कियों की मदद कर रहा है (फोटो: प्रजना फाउंडेशन)

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