Tuesday, August 4, 2026
31.6 C
Delhi

Mapping of Manuscripts: ताड़पत्र से डिजिटल तक, देशभर में शुरू हुआ करोड़ों पांडुलिपियों की पहचान का काम

भारत की सांस्कृतिक धरोहर (India’s Cultural Heritage) को संजोने और संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) ने देशभर में बिखरी हुई अमूल्य पांडुलिपियों की मैपिंग (Mapping of Manuscripts) के लिए Nationwide Survey  शुरू कर दिया है। ये अभियान तीन महीने तक चलेगा और इसे अपने आप में पहला राष्ट्रीय प्रयास माना जा रहा है।

क्यों है ये सर्वे इतना अहम?

इमेजिन कि आपके पास कोई ऐसा खज़ाना है, जिसके बारे में आपको पता ही न हो। भारत में लाखों पांडुलिपियां मंदिरों, मठों, निजी संग्रहालयों और परिवारों के पास ऐसे ही पड़ी हैं, बिना किसी Documentation के। ये केवल कागज या ताड़ के पत्तों के टुकड़े नहीं हैं,ये हमारे पूर्वजों की सोच, उनके ज्ञान और उनकी सभ्यता की आवाज़ हैं।

ये सर्वेक्षण जिला स्तर से शुरू होकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक फैलेगा। इस दौरान जुटाई गई सभी जानकारी ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के केंद्रीय पोर्टल पर एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में सुरक्षित की जाएगी।

क्या है पांडुलिपि की परिभाषा?

आम भाषा में समझें तो पांडुलिपि जिसे अंग्रेज़ी में Manuscripts कहते हैं, हस्तलिखित दस्तावेज़ है, जो कम से कम 75 साल पुराना हो। ये कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र (वृक्ष की छाल), कपड़ा, धातु या किसी अन्य सामग्री पर लिखी गई होती है। ख़ास बात ये है कि Lithograph (पत्थर पर उकेरकर छापी गई प्रतियां) और Printed Books पांडुलिपि की कैटेगरी में नहीं आते।

भारत में पांडुलिपियों की विशाल धरोहर

क्या आप जानते हैं कि भारत के पास लगभग 1 करोड़ पांडुलिपियां हैं। ये संग्रह दुनिया में सबसे बड़ा है। ये पांडुलिपियां 80 से अधिक प्राचीन लिपियों में लिखी गई हैं। ब्राह्मी, कुषाण, गौड़ी, लेपचा, मैथिली और भी कई। इनमें से लगभग 75 प्रतिशत संस्कृत में हैं, जबकि 25 प्रतिशत विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में।

ज्ञान भारतम मिशन क्या है?

ये एक Central Sector Scheme है, जो संस्कृति मंत्रालय के तहत काम करती है। ये 2003 में शुरू किए गए ‘राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन’ का ही दोबारा से तैयार रूप है। इस मिशन के पांच मेन पिलर्स हैं, पांडुलिपियों की मैपिंग, संरक्षण, डिजिटलीकरण, प्राचीन ग्रंथों को समझना और ज्ञान का प्रसार।

ख़ास बात ये है कि इस मिशन के तहत ‘ज्ञान-सेतु’ नाम से AI इनोवेशन चुनौती भी शुरू की गई है, जिसमें स्टार्टअप और शोधकर्ता पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए तकनीकी समाधान विकसित करेंगे।

कैसे होगा ये सर्वेक्षण?

सर्वे की टीमों को ‘ज्ञान भारतम’ मोबाइल ऐप दिया जाएगा। इस ऐप के ज़रीये से वे पांडुलिपियों की सभी जानकारी सीधे पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। ख़ास बात ये है कि सभी पांडुलिपियों को जियोटैग किया जाएगा, यानी उनकी भौगोलिक स्थिति दर्ज की जाएगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि पांडुलिपियां कहां सुरक्षित हैं और उनके संरक्षण की क्या आवश्यकताएं हैं।

 राज्य और जिला स्तर पर समितियां

इस विशाल अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में और जिला स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में विशेष समितियां गठित की गई हैं।

पांडुलिपि जिसे अंग्रेज़ी में Manuscripts कहते हैं, हस्तलिखित दस्तावेज है, जो कम से कम 75 साल पुराना हो।

क्यों जरूरी है पांडुलिपियों का संरक्षण?

1. बौद्धिक चोरी से बचाव: ऐतिहासिक रूप से कई दुर्लभ पांडुलिपियां बिना किसी रिकॉर्ड के चोरी होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेच दी गईं। अब राष्ट्रीय डेटाबेस बनने से इन पर नज़र रखी जा सकेगी।

2. प्राचीन भारतीय ज्ञान का पुनरुद्धार: पांडुलिपियों में आयुर्वेद, योग, गणित, खगोल विज्ञान, वास्तुकला, दर्शनशास्त्र और धातुकर्म का विशाल ज्ञान छिपा है।

3. सांस्कृतिक कूटनीति: गिलगित पांडुलिपियां (जो भोजपत्र पर बौद्ध संस्कृत ग्रंथ हैं) पूर्वी एशियाई देशों के साथ भारत के सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करती हैं।

ग्लोबल पहचान और कानूनी संरक्षण

भारत की कई पांडुलिपियां यूनेस्को के ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर’ में शामिल हैं। इनमें भगवद गीता और नाट्यशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं।

कानूनी नज़र से ‘पुरावशेष और कला खजाने अधिनियम, 1972’ पहले से ही 75 वर्ष से अधिक पुरानी पांडुलिपियों के निर्यात पर रोक लगाता है।

आप कैसे कर सकते हैं योगदान?

अगर आपके पास या आपके परिवार के पास कोई पुरानी पांडुलिपि है, तो आप gyanbharatam.com पोर्टल या ‘ज्ञान भारतम’ मोबाइल ऐप के ज़रीये से उसकी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। ये आपकी विरासत को सुरक्षित रखने और देश के ज्ञान-भंडार को समृद्ध करने का एक अनूठा अवसर है।

ये सर्वेक्षण सिर्फ दस्तावेजीकरण का अभियान नहीं है। ये हमारी सभ्यता की उन जड़ों को खोजने का प्रयास है, जो सदियों से हमारी पहचान रही हैं।  

ये भी पढ़ें: BGMI से लेकर PM मोदी तक: Indian Female Streamers अब Video Games खेल कर बदल रही गेमिंग इंडस्ट्री की किस्मत

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

नवाज़ देवबंदी: मोहब्बत, जज़्बात और इंसानियत के शायर 

उर्दू शायरी की दुनिया में नवाज़ देवबंदी का नाम...

घर में कभी रोटी की भी फ़िक्र थी, वहीं से Mehakpreet ने Medical Professional बनने की कहानी लिखी

कुछ कहानियां ज़िंदगी के मुश्किल दौर की याद दिलाती...

चिड़िया टापू: प्रकृति का वो हसीन ख्वाब जहां परिंदे बयां करते हैं यहां के राज़

अंडमान के दक्षिणी छोर पर बसा ये जन्नतनुमा मकाम,जहां...

नाज़िश प्रतापगढ़ी: तरक़्क़ीपसंद फ़िक्र और वतनपरस्ती के शायर

उर्दू अदब की दुनिया में नाज़िश प्रतापगढ़ी का नाम...

Topics

नवाज़ देवबंदी: मोहब्बत, जज़्बात और इंसानियत के शायर 

उर्दू शायरी की दुनिया में नवाज़ देवबंदी का नाम...

चिड़िया टापू: प्रकृति का वो हसीन ख्वाब जहां परिंदे बयां करते हैं यहां के राज़

अंडमान के दक्षिणी छोर पर बसा ये जन्नतनुमा मकाम,जहां...

नाज़िश प्रतापगढ़ी: तरक़्क़ीपसंद फ़िक्र और वतनपरस्ती के शायर

उर्दू अदब की दुनिया में नाज़िश प्रतापगढ़ी का नाम...

दाता गंज बख़्श अली: तसव्वुफ़ और इल्म की रोशन मिसाल

हज़रत अली हुज्वेरी रहमतुल्लाहि अलैह, जिन्हें दुनिया दाता गंज...

प्रकृति के दो अनमोल रत्न: सुंदरवन और पश्चिमी घाट की कहानी

प्रकृति ने भारत को जो तोहफे दिए हैं, उनमें...

अमीर बख़्श साबरी: इश्क़, अकीदत और सूफ़ियाना शायरी के अलमबरदार

अमीर बख़्श साबरी का शुमार हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के...

Related Articles

Popular Categories