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आधुनिक तकनीक से सेब की खेती करने वाले किसानों की आय में इज़ाफ़ा

कश्मीर पूरी दुनिया में अपनी ख़ूबसूरती और सेब की मिठास के लिए मशहूर है। सेब की खेती कश्मीर के किसानों के लिए आमदनी का सबसे बड़ा ज़रिया है। कश्मीर घाटी में सेब की फसल का मौसम अब शुरू हो चुका है।  डॉक्टर हमेशा कहते हैं कि, An apple a day, keeps the doctor away. सेब हमारी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता है। सेब उन फलों में से एक है जिनमें कैलोरी की मात्रा काफ़ी कम होती है। सेब की harvesting अक्टूबर महीने की शुरुआत में हो जाती है और नवंबर के आख़िर तक जारी रहती है। कश्मीर की economy के लिए सेब की अहमियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश में पैदा होने वाले कुल सेब का करीब 90 फ़ीसदी अकेले कश्मीर में होता है।

जावेद अहमद जो सेब बागवान हैं, सेब की वैरायटी के बारे में ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि, इसमें गाला, रेड, प्लेन गाला, चिली गाला और डिलीशियस में भी तीन चार वैरायटी है। शिमला डिलीशियस, कुल्लू डिलीशियस, प्लेन डिलीशियस, अमेरिकन और गोल्डन डिलीशियस है।

सेब के कारोबार से करीब 35 लाख लोग जुड़े हैं।  सेब के उत्पादन में कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी होता है। इससे काम जल्दी और आसानी से हो जाता है। पहले के मुकाबले प्रोडक्शन में भी तब्दीली नज़र आई है।

कश्मीर में उगाए जाने वाले सेब अपने ख़ास स्वाद, कुरकुरी बनावट और लंबी शेल्फ लाइफ के लिए जाने जाते हैं, जो उन्हें पूरे भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाते हैं। उद्योग काफी विकसित हो गया है, किसान अब बेहतर पैदावार के लिए उन्नत सिंचाई प्रणालियों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों का उपयोग कर रहे हैं।

जावेद अहमद कश्मीर के सेब किसानों का एक शानदार मिसाल हैं। सेब की खेती में सालों के तर्जुबे के साथ, वो गैर मामूली देखभाल और नॉलेज के साथ अपने बागानों का इंतज़ाम करते हैं। जावेद के मुताबिक, कश्मीरी सेब की सफलता बढ़ते मौसम के दौरान विस्तार पर एहतियात देने में शामिल है। वह बताते हैं कि गुणवत्तापूर्ण फल उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए सेब के पेड़ों को फूल आने से लेकर कटाई तक 13-14 स्प्रे की ज़रूरत पड़ती है।

50 कनाल के बाग के प्रबंधन में दवाओं, डीज़ल और मज़दूरी लागत के लिए 4 से 4.5 लाख रुपये तक का महत्वपूर्ण निवेश शामिल है। जावेद इस बात पर ज़ोर देते हैं कि जहां एक अच्छे  सीजन से नौ लाख रुपये तक का मुनाफ़ा हो सकता है, वहीं बाज़ार में उतार-चढ़ाव से रिटर्न पर काफी असर पड़ सकता है, जिससे सेब की खेती में किसानों की रुचि प्रभावित हो सकती है। बागवानी कश्मीर में मुख्य उद्योग में से एक है और जीडीपी में करीब 8 फ़ीसदी  सहयोग होता है। सेब उद्योग 1.45 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर फैला हुआ है।

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