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डेढ़ किल्ला ज़मीन से 2036 का ख़्वाब: अमृतसर में बन रहे Hockey के सितारे

Hockey World Cup 2026 में पंजाब के लिए सबसे बड़ी गर्व की बात ये रही कि भारतीय टीम में पंजाब के 9 खिलाड़ी देश को रिप्रेजेंट कर रहे हैं। इंटरनेशनल लेवल पर देश की जर्सी पहनकर खेलने वाले इन खिलाड़ियों का सफ़र अक्सर गांवों के छोटे-छोटे मैदानों से ही शुरू होता है। ऐसी ही एक कोशिश अमृतसर ज़िले के जंडियाला गुरु इलाके में देखने को मिल रही है। यहां एक नौजवान अपने जज़्बे और मेहनत के दम पर गांव के बच्चों को Hockey (हॉकी) सिखा रहा है। उसका मक़सद है कि गांव के ये बच्चे आगे चलकर बड़े मंच पर खेलें और दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों में अपना नाम बनाएं।

परिवार की कमाई खेल के नाम कर दी

किसानों के लिए उनकी ज़मीन बहुत कीमती होती है, क्योंकि अक्सर उनके घर का गुज़़ारा उसी से चलता है। लेकिन अमृतसर के रहने वाले प्रदीप सिंह ने एक अलग मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने परिवार की करीब डेढ़ किल्ला ज़मीन ठेके पर देने के बजाय उसे Hockey (हॉकी) के मैदान में बदल दिया। इस मैदान में गांव के बच्चों को बिल्कुल मुफ़्त Hockey (हॉकी) की ट्रेनिंग दी जाती है। ये कोई कारोबार नहीं, बल्कि खेल के लिए उनका जज़्बा और बच्चों के बेहतर मुस्तकबिल की कोशिश है।

Source: Sadda Punjab

Hockey (हॉकी) अकादमी के संस्थापक प्रदीप सिंह बताते हैं कि उनकी अकादमी में आने वाले किसी भी बच्चे से कोई फीस नहीं ली जाती। बच्चों को अच्छी और मुफ़्त ट्रेनिंग देने के लिए कोच भी रखे गए हैं। इन कोचों की तनख़्वाह से लेकर मैदान की देखभाल तक का पूरा खर्च प्रदीप सिंह खुद उठाते हैं।

अधूरा ख़्वाब और नई सोच

प्रदीप सिंह का ये फैसला उनके बचपन के तजुर्बे से निकला है। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए बताया कि स्कूल के दिनों में जब दूसरे खेलों की टीमें तैयार हो जाती थी, तब उनके इलाके में Hockey (हॉकी) की कोई टीम या खेलने का सही मौका नहीं था। उन्होंने Hockey (हॉकी) स्टिक और बॉल तो खरीद ली थी, लेकिन साथ खेलने वाले खिलाड़ी नहीं मिले। इसी वजह से उनका Hockey (हॉकी) खेलने का ख़्वाब अधूरा रह गया।

प्रदीप सिंह ने Sadda Punjab को बताया कि उम्र बढ़ने के साथ उनके दिल में ये बात बनी रही कि जो मौका उन्हें नहीं मिल सका, वो उनके इलाके की अगली पीढ़ी को ज़रूर मिलना चाहिए। इसी सोच और जज़्बे के साथ उन्होंने किड्स प्ले हॉकी अकादमी की शुरुआत की, ताकि गांव के बच्चों को हॉकी सीखने और आगे बढ़ने का वो मौका मिल सके, जो उन्हें बचपन में नहीं मिल पाया।

Source: Sadda Punjab

बचपन से ही समाज के लिए काम

प्रदीप सिंह के पिता बताते हैं कि प्रदीप छोटी उम्र से ही गांव और लोगों की भलाई के कामों में आगे रहता है। वो गांव की गलियों और नालियों की सफ़ाई, धार्मिक कार्यक्रमों में सेवा और लोगों के घर जाकर बिना किसी लालच के पाठ करने जैसे काम करता रहा है। उसका हमेशा से एक ही मक़सद रहा है कि गांव के बच्चों को गलत संगत से दूर रखा जाए और उन्हें खेलों और अच्छे कामों की तरफ़ लगाया जाए।

फिटनेस पर ख़ास ध्यान

अकादमी में बच्चों की सेहत और फिटनेस पर ख़ास ध्यान दिया जा रहा है। अकादमी के फिटनेस कोच बताते हैं कि वो सुबह-शाम बच्चों की फिटनेस पर नज़र रखते हैं। उनका मानना है कि हॉकी हो, फुटबॉल, वॉलीबॉल या कोई और खेल, हर खिलाड़ी के लिए अच्छी शारीरिक सेहत सबसे ज़रूरी है। इसी वजह से अकादमी में बच्चों को खेल के साथ-साथ फिट रहने की आदत भी डाली जा रही है। इलाके के बच्चों के बीच फिटनेस को लेकर एक नया ट्रेंड बनाने की कोशिश की जा रही है।

युवा खिलाड़ियों के बड़े ख़्वाब

इस मैदान में खेलने वाले बच्चों के हौसले काफी बुलंद हैं। खिलाड़ी शुभदीप सिंह ने बताया कि उसे हॉकी से बहुत लगाव है। उसने प्रदीप सिंह और अकादमी के लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि वो उन्हें अपना गुरु मानता है।

शुभदीप का ख़्वाब है कि वो भारतीय टीम के खिलाड़ी हरमनप्रीत सिंह जैसा बड़ा स्टार बने और इंटरनेशनल लेवल पर खेलकर अपने गांव और अकादमी का नाम रोशन करे। वहीं, एक और खिलाड़ी अरमान सिंह ने कहा कि प्रदीप सिंह की वजह से उसे हॉकी खेलने का मौका मिला। अरमान का ख़्वाब है कि आने वाले सालों में वो ओलंपिक तक पहुंचे और देश के लिए गोल्ड मेडल जीते।

इंटरनेशनल खिलाड़ियों का हौसला

प्रदीप सिंह ने बताया कि उनकी इस गांव की कोशिश को इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ियों का भी पूरा साथ मिला है। भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी गुरजंट सिंह ने शुरुआत में बच्चों को हॉकी स्टिक बांटी। वहीं, भारतीय टीम के कप्तान की तरफ़ से बच्चों को किट और गोलकीपर का सामान दिया गया।

इसके अलावा, इंटरनेशनल खिलाड़ी जर्मनप्रीत सिंह ने भी इस पहल का साथ दिया। अकादमी की शुरुआत के मौके पर अमेरिका से WWE रेसलर सतनाम सिंह और हॉकी खिलाड़ी जर्मनप्रीत सिंह खुद वहां पहुंचे और बच्चों का हौसला बढ़ाया।

Source: Sadda Punjab

प्रदीप सिंह ने बताया कि वो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) में सेवा करने के साथ-साथ टैक्सी भी चलाते हैं। टैक्सी से होने वाली कमाई का एक हिस्सा वो सीधे इस खेल मैदान और बच्चों की ज़रूरतों पर खर्च करते हैं। उनका मकसद है कि इलाके के बच्चों को खेल की सुविधाओं की कमी न हो और वो बिना किसी परेशानी के अपनी पसंद का खेल सीख सकें।

2036 ओलंपिक की तरफ़ बढ़ते कदम

Hockey (हॉकी) अकादमी के संस्थापक प्रदीप सिंह ने बताया कि उनका सबसे बड़ा मकसद साल 2036 के ओलंपिक खेल हैं। वो चाहते हैं कि इस छोटे से गांव के मैदान में ट्रेनिंग लेकर कम से कम एक या दो बच्चे आगे चलकर भारतीय टीम का हिस्सा बनें।

जहां एक तरफ़ पूरी दुनिया बड़े टूर्नामेंटों के नतीजों का इंतज़ार करती है, वहीं अमृतसर के इस छोटे से मैदान में प्रदीप सिंह अगली पीढ़ी की आंखों से अपना अधूरा ख़्वाब पूरा होते देख रहे हैं। उनके लिए इन बच्चों की कामयाबी ही उनके ख़्वाब की असल जीत है।

स्टोरी: मनमीत कौर

इस लेख को पंजाबी में पढ़ें

ये भी पढ़ें: Usman Parvaiz: 18th Floorball Championship में सिल्वर जीतने वाले Specially-Abled खिलाड़ी की कहानी

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