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बिहार के अर्पित राज ‘CHAAI SETH’ से कमा रहे करोड़ों रुपये

चाय लोगों के लिए इमोशन है, तो कईयों के लिए एक साथ आने, टेंशन कम करने और खुशी को सेलिब्रेट करने का जरिया है। लेकिन अर्पित राज के लिए ये उनकी ज़िंदगी है। जी हां, इसी चाय से आज बिहार के रहने वाले अर्पित राज करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। कभी वो अपने कॉलेज के बाहर चाय की टपरी लगाते थे।

अर्पित बिहार के चंपारण के रहने वाले है। उन्होंने बीबीए और मार्केटिंग में एमबीए किया है। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें एक अच्छी जॉब भी मिली लेकिन उन्होंने अपनी जॉब छोड़कर अपना पूरा फोकस चाय के बिजनेस लगाया। जिसमें उनको सफलता भी मिली। आज ‘चाय सेठ’ के देशभर मे 27 आउटलेट हैं। इन आउटलेट्स पर 25 तरह की चाय मिलती है।

कैसे सोचा चाय बिज़नेस शुरू करने का आईडिया

क्लास 11वीं 12वीं तक अर्पित बिहार से कभी बाहर नहीं गए थे। उनकी ज़िंदगी में नया मोड़ तब आया जब वो 2015 में शिलांग में ग्रेजुएशन के लिए गए। यहां ज्यादातर लोग नॉर्थ इंडिया से थे। शिलांग काफी ठंडी जगह है इसलिए अर्पित को चाय का बिज़नेस शुरू करने का आईडिया आया।

दोस्तों के साथ मिलकर अर्पित ने कॉलेज के बाहर चाय की टपरी खोली। करीब दो से तीन महीने चलने के बाद उन्हें टपरी बंद करनी पड़ी क्योंकि शिलांग में वो स्थानीय नियमों के खिलाफ थी और अर्पित के पास लाइसेंस नहीं था। इसलिए पुलिस ने उनकी टपरी बंद करवा दी। इसके बाद उन्होंने पराठे का बिज़नेस शुरू किया। अर्पित ने दोस्तों के साथ मिलकर पांच कमरों का एक फ्लैट लिया और एक महिला को खाना पकाने के लिए रखा। उनसे पराठे बनवाए और रात के 8 बजे से लेकर 12 बजे तक पराठे डिलीवर करना शुरू किया। इस बिज़नेस के दौरान उनकी टीम के बीच में कुछ लड़ाई झगड़े होना शुरू हुए। उसके बाद यह बिज़नेस भी बंद हो गया। तीसरा बिज़नेस कॉफी मग बेचने का शुरू किया। जिससे करीब छह हज़ार रुपये का फायदा हुआ। लेकिन शुरू से ही चाय का बिज़नेस करने की ख्वाहिश अधूरी रही।

दिल्ली में शुरू की अपनी पहली कंपनी

साल 2018 में अर्पित दिल्ली आए लेकिन चाय बिज़नेस का आइडिया उनके ज़हन से नहीं निकला। वो चाहते थे कि चाय का बिज़नेस दोबारा शुरू करें। 2018 में एक एजुकेशन स्टार्ट में जॉब लगी। वहां उन्हें सेल्स और मार्केटिंग के लिए हायर किया गया। लेकिन उन्हें काम करने में मज़ा नहीं आ रहा था। इसके बाद उन्होंने एक कॉफी कंपनी में काम किया। यहां से उन्हें काफी चीज़ें सीखने को मिली। लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी।

अर्पित ने दोस्त के साथ मिलकर दोबारा चाय का बिज़नेस शुरू करने के बारे में सोचा। उनकी सोच थी कि जब लोग जब उनके पास चाय पीने के लिए आए तो उन्हें सेठ की तरह महसूस हो। इसलिए उन्होंने ‘चाय सेठ’ नाम रखा। तब उन्होंने फंड इकट्ठा करके अपनी कंपनी शुरू की।

दिल्ली में आउटलेट शुरू किया तो उन्हें लोगों से अच्छा रिस्पांस मिला। लोगों से मिली तारीफों ने अर्पित का कॉन्फिडेंस बढ़ाया और उन्होंने सोचा कि पूरे इंडिया में चाय के आउटलेट खोलने चाहिए।

कोरोना महामारी से हुआ नुकसान

2020 में लॉकडाउन लगने से पहले अर्पित ने चाय के सात आउटलेट खोल लिए थे। जिस वक्त पैसे आने का समय था उस वक़्त लॉकडाउन लगने की वजह से उन्हें काफी नुकसान हुआ। अर्पित ने DNN24 को बताया कि लॉकडाउन में सबसे ज्यादा फूड इंडस्ट्री को नुकसान हुआ था। तब उन्हें अहसास हुआ कि अगर उनके अलग-अलग सेक्टर में बिज़नेस होते तो शायद परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। तब उन्होने लॉकडाउन के बाद अलग अलग सेक्टर में बिज़नेस करना शुरू किया। उनका मानना है कि ‘लक्ष्मी हर जगह से आनी चाहिए।’

अर्पित का मानना है कि ‘फूड इंडस्ट्री में चार चीजें ज़रूरी होती हैं टेस्ट, सफाई, क्वालिटी, स्टैंडर्ड अगर ये चार चीजें आप फॉलो करें तो कस्टमर आपका हो जाता है। टेस्ट हर बार अच्छा होना चाहिए और सेम होना चाहिए।’ उन्होंने आउटलेट को इस तरह डिज़ाइन किया कि उनके यहां कोई भी चाय बनाए लेकिन टेस्ट एक ही आना चाहिए। जब उन्होंने अलग राज्य में आउटलेट शुरू किए तो उस जगह कि एक लोकल फूड को जोड़ा जिससे वहां के लोग खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर सकें।

कुछ लोगों ने अर्पित को ट्रोल किया। कुछ को लगता था कि उनके पास पैसे नहीं है इसलिए काम कर रहा है। “अगर आप पैसे के पीछे जाओगे तो कुछ पैसे कमा लोगों लेकिन अगर पैशन के पीछ जाओगे तो पैसा आपके पास खुद आयेगा। हमेशा अपना पैशन फॉलो करना चाहिए।”

कैसे बने Entrepreneur

अर्पित ने DNN24 को बताया कि ‘एक अच्छा entrepreneur बनने के लिए ये न सोचे कि पहले आप पढ़ाई करेंगे उसके बाद चार पांच साल एक्सपीरियंस लेंगे। ये नहीं करना चाहिए। कंप्टिशन काफी ज्यादा है अगर आप नहीं करोगे तो कोई और करेगा आइडिया सबके पास हैं।’

वो कहते है कि अगर कॉलेज से करना शुरू करेंगे तो ज्यादा फायदा होगा। बिज़नेस शुरू करने में टीम मेंबर की परेशानी आती हैं अगर आप कॉलेज से शुरू करेंगे तो अपने टीचर से सीख पाएंगे और आपको अलग-अलग तरह के लोग मिलेगे जो आगे चलकर आपके बिज़नेस पार्टनर बन सकते हैं। हमेशा सोचा कि आप क्या अलग कर सकते हो जिससे कस्टमर आपके पास आए। एक्सपेरिमेंट करते रहना चाहिए, मेंटोरशिप ठीक इंसान से लें और आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों को फॉलो करें जो एक अच्छे ऑन्टोप्रेन्योर हैं। आप सिर्फ किताब पढ़कर बिज़नेस शुरू नहीं कर सकते हो।

क्या बड़ी कंपनी आने से छोटे दुकानदारों पर असर

इस सवाल पर अर्पित कहते हैं कि ‘मैं आज भी टपरी पर जाकर चाय पीता हूं। वहां का मज़ा अलग ही होता है। लेकिन फैमिली के साथ कहीं आराम से बैठ कर चाय पीनी है तो आप चाय सेठ आंए।’ चाय सेठ जैसे कई आउटलेट लोगों को रोज़गार दे रहे हैं। ऐसा नहीं है कि वह उनके काम में बाधा बन रहे हैं। आज भी सबसे ज्यादा डिमांड अदरक चाय की रहती है। पान चाय, केसर चाय और मसाला चाय बिकती है।

फ्रेंचाइजी कैसे लें

जब कंपनी का मालिक अपनी कंपनी का लोगो, नाम, मॉडल का अधिकार किसी थर्ड पार्टी को देता है उसे फ्रेंचाइजी कहते है। फ्रेंचाइजी के बारे में अर्पित ने DNN24 को बताया कि फ्रेंचाइजी का मतलब है किसी बिजनेसमैन के पास एक ट्रेडमार्क है जो भारत सरकार के साथ रजिस्टर्ड है। आप उनके नाम पर फ्रेंचाइजी ले सकते हो। फ्रेंचाइजी भारत में तीन मॉडल में काम करती है पहला कोको मॉडल, दूसरा FOCO मॉडल और तीसरा फ्रेंचाइजी ऑन फ्रेंचाइजी ऑपरेटिव।

किसी थर्ड पार्टी को फ्रेंचाइजी देने से पहले कंपनी उनकी कुछ एबिलिटी चेक करती है। अर्पित कहते हैं कि जब भी आप किसी कंपनी से फ्रेंचाइजी लें तो सबसे पहले कंपनी का ट्रेडमार्क सर्टिफिकेट चेक करे और कम बजट से बिज़नेस शुरू करो।

अर्पित की ज़िंदगी में दोस्तों की अहमियत बहुत है। कहीं हद तक आज उनकी सफलता के पीछे उनके दोस्त और उनका परिवार है। चाय सेठ का उद्देश्य लोगों को साथ में बैठाकर चाय पिलाना है। जहां 25 तरह की अलग-अलग चाय मिलती हैं। भविष्य में वो चाय सेठ को इंटरनेशनल लेवल पर ले जाना चाहते हैं।

ये भी पढ़ें: एक हादसे के बाद मां-बाप ने छोड़ा साथ, पैरों से पेटिंग बनाकर जीता नेशनल अवॉर्ड 

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