जब 12 साल की एक बच्ची से छेड़खानी हुई, तो उसने सिर्फ़ ख़ुद को बचाना चाहा। उसे क्या मालूम था कि यही ‘बचाव’ उसे एक दिन एशियाई खेलों (Asian Games 2026) के पदक तक पहुंचा देगा। ये कहानी है हरियाणा के रोहतक की सुचिका तरियाल की। 36 साल की सुचिका ने इतिहास रच दिया। उन्होंने मंगोलिया की अल्तानचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर महिलाओं के ट्रेडिशनल 60 किलोग्राम MMA (Mixed Martial Arts) के सेमीफ़ाइनल में जगह बनाई। इसके साथ ही वो एशियाई खेलों (Asian Games 2026) में MMA का पदक जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गईं। MMA इस बार ही एशियाई खेलों में शामिल हुआ है, और सुचिका ने पहले ही प्रयास में कमाल कर दिखाया।

एक डर से शुरू हुआ सफ़र
सुचिका की कहानी 12 साल की उम्र से शुरू होती है। रोहतक में पली-बढ़ी सुचिका के साथ छेड़खानी की एक घटना हुई। उस वक़्त उसके ज़हन में सिर्फ़ एक बात आई, ‘मुझे लड़ना सीखना है।’ उसने जूडो जॉइन कर लिया। मक़सद सिर्फ़ ख़ुद को बचाना था, लेकिन जूडो ने उसे एक ऐसी दुनिया से रूबरू कराया, जहां वो आगे चलकर देश का नाम रोशन करेगी।
उस वक़्त किसे पता था कि यह जूडो का सफ़र एक दिन MMA तक पहुंचेगा।

जूडो से जू-जित्सू, फिर MMA
सुचिका ने जूडो में अपनी अलग पहचान बनाई। वो आठ बार National Judo Champion बनीं। 2019 में कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप और साउथ एशियन गेम्स (Commonwealth Judo Championships and South Asian Games) में गोल्ड जीता। 2018 कॉमनवेल्थ में सिल्वर हासिल किया। उन्होंने भारत के लिए 20 से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों में हिस्सा लिया।
इसके बाद वह जू-जित्सू की तरफ़ मुड़ीं और 2024 में जू-जित्सू वर्ल्ड चैंपियनशिप (Ju-Jitsu World Championships) में गोल्ड जीता। दरअसल, सुचिका का सफ़र किसी एक खेल तक सीमित नहीं रहा। जूडो से जू-जित्सू, फिर कुराश और आख़िर में MMA। हर बार किसी न किसी मज़बूरी या प्रशासनिक बदलाव ने उन्हें नई राह पर डाल दिया।
हार नहीं मानी
2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स (Birmingham Commonwealth Games 2022 ) में सुचिका ने जूडो में हिस्सा लिया, लेकिन पदक नहीं मिला। 2023 के हांगझोऊ एशियाई खेलों में वो कुराश में उतरीं, लेकिन वहां भी नतीजा उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रहा। इसके बाद जनवरी 2026 में जू-जित्सू टीम को एशियाई खेलों से बाहर कर दिया गया। सुचिका के पास कोई रास्ता नहीं बचा था।
तब उन्होंने MMA का रुख़ किया। लेकिन यहां भी राह आसान नहीं थी। क्वालिफ़िकेशन के नियम बीच में बदल दिए गए। टॉप-6 एशियाई रैंकिंग ज़रूरी हो गई। सरकारी फंडिंग नहीं मिली, तो सुचिका ने अपने पैसों से एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और दो ब्रॉन्ज़ पदक जीते।
सुचिका बताती हैं,’मैंने हार मान ली थी। लगा कि बस, अब बहुत हुआ।’ लेकिन तब UFC फ़ाइटर पूजा तोमर और हिमांशु कौशिक ने उन्हें रोका और कहा कि ‘तुम्हारे स्किल्स बहुत अच्छे हैं, तुम यह कर सकती हो।’ उन्हीं की वजह से सुचिका MMA में लौटीं।

जूडो ही असली ताक़त
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूडो ने सुचिका को MMA के लिए तैयार किया। ग्राउंड फ़ाइटिंग और ग्रैपलिंग जूडो से ही आती थी। उन्हें सिर्फ़ स्ट्राइकिंग और खड़े होकर लड़ने की तकनीक सीखनी थी। दिसंबर 2024 में उन्होंने BRAVE CF 92 में प्रोफ़ेशनल MMA में वापसी की और पहले ही मुक़ाबले में सबमिशन से जीत हासिल की।
लड़कियों के लिए एक मिसाल
सुचिका का सपना है कि वो लड़कियों को MMA के लिए इंसिपायर करें। आज के दौर में लड़कियों को ख़ुद को बचाना आना चाहिए। अगर एक औरत बच्चे के जन्म का दर्द सह सकती है, तो MMA कुछ भी नहीं है।
एक छेड़खानी की घटना से शुरू हुआ सफ़र, आज एशियाई खेलों के पदक तक पहुंच गया। सुचिका तरियाल सिर्फ़ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि वो उन लाखों लड़कियों की आवाज़ हैं, जिन्हें कोई रास्ता नहीं दिखता, लेकिन हौसला उन्हें ख़ुद बनाना पड़ता है।
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