कई बार किसी खिलाड़ी की जीत सिर्फ़ एक मैच या मेडल तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वो पूरे देश के लिए एक बड़ी मिसाल बन जाती है। भारतीय स्क्वैश के इतिहास में ऐसा ही एक यादगार पल 18 साल की Anahat Singh (अनाहत सिंह) की शानदार जीत से आया है। दिल्ली की इस नौजवान सिख बेटी ने कनाडा के ओनटारियो में हुए वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप 2026 का ख़िताब जीतकर इतिहास रच दिया।
वो ऐसा करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं। फाइनल मुकाबले में अनाहत ने मिस्र की मज़बूत खिलाड़ी रुकय्या सलेम को सीधे तीन गेम में 11-3, 11-7 और 11-9 से हरा दिया। इस शानदार जीत के साथ अनाहत ने न सिर्फ़ अपना नाम इतिहास में दर्ज कराया, बल्कि दुनिया भर में भारतीय स्क्वैश को एक नई पहचान और मक़ाम भी दिलाया।
मिस्र की 13 साल की बादशाहत का ख़ात्मा
ये सिर्फ़ एक वर्ल्ड ख़िताब की जीत नहीं थी, बल्कि ग्लोबल स्क्वैश की दुनिया में एक बड़ा उलटफेर था। इस ऐतिहासिक जीत के साथ Anahat Singh (अनाहत सिंह) ने महिला जूनियर स्क्वैश में मिस्र की 13 साल से चली आ रही बादशाहत को ख़त्म कर दिया। स्क्वैश में मिस्र को एक बड़ी ताक़त माना जाता है। पिछले करीब डेढ़ दशक से इस चैंपियनशिप के फाइनल में मिस्र की खिलाड़ियों का दबदबा रहा था। ऐसे में फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में मिस्र की खिलाड़ी को एक भी गेम जीतने का मौक़ा न देना और सीधे तीन गेम में हराना, अनाहत की शानदार तकनीक, मज़बूत हौसले और बेहतरीन खेल का सबूत है।

भारतीय स्क्वैश के चाहने वालों के लिए भी ये पल बेहद ख़ास है। साल 2005 में भारत की दिग्गज खिलाड़ी जोशना चिनप्पा इसी वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंची थी, लेकिन उन्हें उप-विजेता बनकर संतोष करना पड़ा था। इसके बाद भारत को इस ख़िताब के लिए करीब 21 साल इंतज़ार करना पड़ा। अब Anahat Singh (अनाहत सिंह) ने ये लंबा इंतज़ार ख़त्म कर दिया है। उन्होंने न सिर्फ़ भारत को पहली बार वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन का ख़िताब दिलाया, बल्कि भारतीय खेलों के इतिहास में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज कर दिया।
खेलों के माहौल में पली-बढ़ी चैंपियन अनाहत
जानकारी के मुताबिक, 13 मार्च 2008 को नई दिल्ली में जन्मी Anahat Singh (अनाहत सिंह) ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जहां खेलों को सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, बल्कि ज़िंदगी का अहम हिस्सा माना जाता है। उनके पिता गुरशरण सिंह पेशे से कामयाब वकील हैं और कॉलेज के दिनों में अच्छे फील्ड हॉकी खिलाड़ी भी रह चुके हैं। उनकी मां तानी वढेरा इंटीरियर डिज़ाइनर हैं और वो भी फील्ड हॉकी खेल चुकी हैं। वहीं उनकी बड़ी बहन अमीरा सिंह ने अनाहत से पहले स्क्वैश खेलना शुरू किया और नेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाई। यानी घर में शुरू से ही खेलों का ऐसा माहौल था, जिसने अनाहत को बचपन से ही मेहनत, फिटनेस, अनुशासन और खेल भावना सिखाई।
दिलचस्प बात ये है कि स्क्वैश अनाहत की पहली पसंद नहीं था। बचपन में वो भारत की ओलंपिक मेडल जीतने वाली बैडमिंटन खिलाड़ी पी. वी. सिंधु से काफी इंस्पायर थी और उन्होंने बैडमिंटन की ट्रेनिंग भी शुरू की थी। उन्होंने बैडमिंटन में कई लोकल टूर्नामेंट भी जीते। लेकिन बड़ी बहन अमीरा को देखकर जब उन्होंने स्क्वैश खेलना शुरू किया, तो उनकी कुदरती काबिलियत सबके सामने आने लगी। धीरे-धीरे उनके कोच और परिवार को भी एहसास हुआ कि स्क्वैश ही अनाहत के लिए सही खेल है और इसी में उनका भविष्य है।
सिख परिवार में पली-बढ़ी अनाहत में मेहनत, विनम्रता, चढ़दी कला और अनुशासन जैसे संस्कार साफ़ दिखाई देते हैं। इतनी कम उम्र में दुनिया के बड़े मंच पर कामयाबी हासिल करने के बावजूद वो आज भी ज़मीन से जुड़ी हुई हैं। वो मीडिया में बड़े-बड़े दावे करने के बजाय कोर्ट में अपने खेल से जवाब देना पसंद करती हैं।

चैंपियनशिप में अजेय सफ़र 6 मैचों में सिर्फ़ 2 गेम हारी
वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2026 में Anahat Singh (अनाहत सिंह) ने टूर्नामेंट की टॉप सीड खिलाड़ी के तौर पर हिस्सा लिया। पूरे टूर्नामेंट में उनका खेल इतना शानदार रहा कि उन्होंने साबित कर दिया कि ये ख़िताब उनकी मेहनत और काबिलियत का नतीजा है। पहले राउंड में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की लिली विल्सन को आसानी से हराया।
इसके बाद दूसरे और तीसरे राउंड में हांगकांग की क्लोई लो और मलेशिया की डोइस ये सान ली को मात दी। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने मिस्र की हबीबा रिज़्क को हराया, जबकि सेमीफाइनल में मिस्र की ही बार्ब समेह को कड़े मुकाबले में हराकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में अनाहत ने मिस्र की रुकय्या सलेम को 11-3, 11-7 और 11-9 से हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
पूरे टूर्नामेंट में खेले 6 मैचों में अनाहत ने अपने विरोधी खिलाड़ियों को सिर्फ़ 2 गेम जीतने दिए। ये आंकड़ा बताता है कि पूरे टूर्नामेंट में उनका दबदबा कितना शानदार रहा। लेकिन ये कामयाबी उन्हें एक दिन में नहीं मिली। इससे पहले 2025 की वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में अनाहत ने कांस्य मेडल जीतकर भारत के 15 साल के मेडल के इंतज़ार को ख़त्म किया था। सिर्फ़ एक साल बाद उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर उसी कांस्य को सोने में बदल दिया और वर्ल्ड जूनियर चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया।

जूनियर उम्र में सीनियरों जैसा खेल
Anahat Singh (अनाहत सिंह) की उम्र अभी सिर्फ़ 18 साल है, लेकिन इतनी कम उम्र में ही उन्होंने दुनिया की बेहतरीन सीनियर खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बना ली है। वो प्रोफ़ेशनल स्क्वैश एसोसिएशन (PSA) की सीनियर वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप-20 खिलाड़ियों में शामिल रह चुकी हैं। सिर्फ़ 14 साल की उम्र में उन्होंने बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सीनियर टीम का हिस्सा बनकर देश का रिप्रेज़ेंट किया था। इसके साथ ही वो कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हुई। 2023 के एशियन गेम्स में भी उन्होंने भारत के लिए ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वाली टीम में अहम भूमिका निभाई।
भारतीय स्क्वैश का नया सुनहरा दौर और 2028 का ओलंपिक
भारत ने दुनिया को सौरव घोषाल, दीपिका पल्लीकल और जोशना चिनप्पा जैसी शानदार स्क्वैश खिलाड़ी दी हैं, जिन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर देश का नाम रोशन किया है। लेकिन वर्ल्ड जूनियर चैंपियन बनने की जो कमी अब तक रह गई थी, उसे Anahat Singh (अनाहत सिंह) ने पूरा कर दिया है। उनकी ये ऐतिहासिक कामयाबी ऐसे वक़्त में आई है, जब स्क्वैश को पहली बार 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में शामिल किया जा रहा है। जिस तरह अनाहत का खेल लगातार बेहतर हो रहा है, उसे देखते हुए उन्हें 2028 ओलंपिक में भारत के लिए मेडल की मज़बूत दावेदार माना जा रहा है।

पंजाब, दिल्ली और पूरे सिख समुदाय के साथ-साथ पूरे देश के लिए ये बेहद फ़ख्र और खुशी का पल है। एक नौजवान बेटी ने अपनी मेहनत से साबित कर दिया है कि अगर हुनर के साथ परिवार का पूरा साथ, अच्छी कोचिंग और मज़बूत इरादा हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। आज जब खेलों में कम उम्र के खिलाड़ियों पर नतीजे देने का बहुत दबाव रहता है, अनाहत का सफ़र ये सिखाता है कि कामयाबी रातों-रात नहीं मिलती। इसके पीछे सालों की मेहनत, सब्र और लगातार प्रैक्टिस होती है।
Anahat Singh (अनाहत सिंह) की ये जीत सिर्फ़ एक गोल्ड मेडल नहीं, बल्कि भारतीय स्क्वैश में एक नए सुनहरे दौर की शुरुआत है। आने वाले वक़्त में उनके खेल से प्रेरणा लेकर कई नौजवान लड़के-लड़कियां स्क्वैश का रैकेट उठाएंगे। लेकिन खेलों के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा कि भारत को पहला वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन देने वाली जांबाज़ खिलाड़ी का नाम अनाहत सिंह है।
स्टोरी– हरविंदर कौर
इस लेख को पंजाबी में पढ़ें
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