Monday, August 31, 2026
34 C
Delhi

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह: दो देशों को जोड़ने वाली विरासत

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की ख़बर ने भारत और पाकिस्तान दोनों जगह शोक की लहर पैदा कर दी। डॉ. सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित ‘गाह’ गांव में हुआ था, जहां उनका बचपन बीता। 1947 के विभाजन के समय उनका परिवार भारत आकर अमृतसर में बस गया। विभाजन से पहले उन्होंने ‘गाह’ के प्राइमरी स्कूल में चौथी कक्षा तक पढ़ाई की। स्कूल के रिकॉर्ड और वहां के बुजुर्ग आज भी उनकी सादगी और विनम्रता को याद करते हैं।

प्रधानमंत्री बनने के बाद भी डॉ. सिंह ने अपने गांव से संबंध बनाए रखा। उन्होंने गांव के लोगों को दिल्ली बुलाकर मुलाकात की और उनकी पहल पर गाह में कई विकास कार्य करवाएं। गांव में सोलर लाइट, वॉटर हीटर और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई। पाकिस्तान सरकार ने उनके सम्मान में गाह को “आदर्श गांव” घोषित किया और गांव के सरकारी स्कूल का नाम बदलकर “मनमोहन सिंह गवर्नमेंट बॉयज़ स्कूल” कर दिया। 2012 में भारत के टेरी संस्थान ने वहां सौर ऊर्जा ग्रिड स्थापित किया, जिससे 51 परिवारों और तीन मस्जिदों को बिजली की आपूर्ति हुई।

डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन सीमाओं को पार कर दो देशों को जोड़ने वाली कड़ी बन गया। उनकी दूरदर्शिता, सरलता और राष्ट्र निर्माण में योगदान को आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। गाह गांव के लोग उनकी विरासत को सहेजने और उनकी स्मृति को जीवित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनकी कहानी भारत और पाकिस्तान के बीच साझा इतिहास और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है।

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं

ये भी पढ़ें: असम के सोनापुर का Mayfair Spring Valley Resort: बच्चों के लिए बना ख़ास किड ज़ोन

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

इफ़्तिख़ार आरिफ़: शायरी में हिजरत, मोहब्बत और रूहानियत की दास्तान

उर्दू शायरी में कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो...

असग़र गोंडवी: शायरी में मोहब्बत, तसव्वुफ़ और ज़िंदगी की रौशन फ़िक्र

उर्दू शायरी की दुनिया में कुछ शायर ऐसे होते...

बेग़म अख़्तर का शायर

श्रीनगर में अप्रैल 1969 की एक दोपहर जब बरसात...

Topics

बेग़म अख़्तर का शायर

श्रीनगर में अप्रैल 1969 की एक दोपहर जब बरसात...

जमीलुद्दीन आली: दोहों से उर्दू अदब को नया रंग देने वाले शायर

उर्दू अदब की दुनिया में कुछ शायर ऐसे गुज़रे...

मुनीर शिकोहाबादी: 1857 की क्रांति और शायरी की बुलंद आवाज़

उत्तर प्रदेश के फिरोज़ाबाद ज़िले में बसा शिकोहाबाद सिर्फ़...

Related Articles

Popular Categories