Friday, February 27, 2026
19.3 C
Delhi

शायरी के अनमोल नगीने जिगर मुरादाबादी: दर्द और इश्क़ की आवाज़

जिगर मुरादाबादी को अपने दौर में जो शोहरत और मक़बूलियत मिली। उसकी कोई मिसाल मिलनी मुश्किल है। जिगर उर्दू शायरी के एक ऐसे नगीने थे, जिनकी चमक आज भी उतनी ही तेज़ है, जितनी उनकी ज़िंदगी के दौरान थी। उनकी शख़्सियत, शायरी, और ज़िंदगी का हर पहलू एक कहानी कहता है। जिगर मुरादाबादी ने उर्दू शायरी को एक नया आयाम दिया। उन्होंने अपनी शायरी में ज़िंदगी की सच्चाइयों को बड़े ही खूबसूरती से पिरोया। उनकी शायरी में हुस्न, इश्क़, और दर्द का एक शानदार संगम देखने को मिलता है। उनकी शायरी में एक ऐसी बेबाकी और खुलापन है, जो आज भी लोगों को मुतासिर करता है। जिगर मुरादाबादी का असल नाम अली सिकन्दर था। जिगर 1890 ई में मुरादाबाद में पैदा हुए। जिगर को शायरी विरासत में मिली थी, उनके वालिद मौलवी अली नज़र और चचा मौलवी अली ज़फ़र दोनों शायर थे और शहर के बाइज़्ज़त लोगों में शुमार होते थे। 

जिगर की शुरूआती तालीम घर पर और फिर उसके बाद मकतब में हुई। अंग्रेज़ी सीखने के लिए उन्हें चचा के पास लखनऊ भेज दिया गया। जहां नौवीं जमाअत तक तालीम हासिल की। उनको अंग्रेज़ी ता’लीम से कोई दिलचस्पी नहीं थी और नौवीं जमाअत में दो साल फ़ेल हुए थे। इसी अर्से में वालिद का भी इंतेकाल हो गया था और जिगर को वापस मुरादाबाद आना पड़ा था। जिगर को स्कूल के दिनों से ही शायरी का शौक़ पैदा हो गया था 

यूँ ज़िंदगी गुज़ार रहा हूँ तिरे बग़ैर

जैसे कोई गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

इब्तिदा वो थी कि जीना था मोहब्बत में मुहाल

इंतिहा ये है कि अब मरना भी मुश्किल हो गया

जिगर मुरादाबाद से भाग कर आगरा पहुंचे और वहां एक चश्मा बनाने वाली कंपनी के सेलिंग एजेंट बन गए। आगरा में वहीदन नाम की एक लड़की से शादी कर ली थी। बेगम को लेकर अपनी मां के पास मुरादाबाद आ गए। कुछ ही दिनों बाद मां का इंतकाल हो गया। जगह जगह सफ़र की वजह से जिगर का ताआरूफ़ मुख़्तलिफ़ जगहों पर एक शायर के तौर पर हो चुका था। शायरी की तरक्क़ी की मंज़िलों में भी जिगर इस तरह के अच्छे शे’र कह लेते थे

हाँ ठेस न लग जाये ऐ दर्द-ए-ग़म-ए-फुर्क़त
दिल आईना-ख़ाना है आईना जमालों का
आह, रो लेने से भी कब बोझ दिल का कम हुआ
जब किसी की याद आई फिर वही आलम हुआ।

जिगर बहुत भावुक, वफ़ादार, साफ़ वक्ता, देशप्रेमी और हमदर्द इन्सान थे। किसी की तकलीफ़ उनसे नहीं देखी जाती थी, वो किसी से डरते भी नहीं थे। लखनऊ के वार फ़ंड के मुशायरे में, जिसकी सदारत एक अंग्रेज़ गवर्नर कर रहा था, उन्होंने अपनी नज़्म “क़हत-ए-बंगाल” पढ़ कर सनसनी मचा दी थी। पाकिस्तान में एक शख़्स जो मुरादाबाद का ही था उनसे मिलने आया और हिन्दोस्तान की बुराई शुरू कर दी। जिगर को गुस्सा आ गया और बोले, “नमक हराम तो बहुत देखे, आज वतन हराम भी देख लिया।

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं

हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं

आंखें तो खोल, सर तो उठा देख ज़रा

कब से जिगर वो चांद सा चेहरा निढाल है 

जिगर आख़िरी ज़माने में बहुत मज़हबी हो गए थे। 1953 ई. में उन्होंने हज किया। ज़िंदगी की लापरवाहियों ने उनके दिल-दिमाग़ को तबाह कर दिया था। 1941 ई. में उनको दिल का दौरा पड़ा। उनका वज़न घट कर सिर्फ़ 100 पौंड रह गया था। 1958 ई. में उन्हें दिल और दिमाग़ पर क़ाबू नहीं रह गया था। लखनऊ में उन्हें दो बार दिल का दौरा पड़ा और ऑक्सीजन पर रखे गए। 

नींद की दवाओं के बावजूद रात रात-भर नींद नहीं आती थी। जिगर का इंतकाल में 9 सितंबर 1960 को हो गया। देहांत के बाद गोंडा शहर में एक छोटे से आवासीय कॉलोनी का नाम उनकी याद में जिगर गंज रखा गया, जो उनके घर के काफी करीब था। साथ ही एक इंटरमीडिएट कॉलेज का नाम भी उनके नाम पर “दि जिगर मेमोरियल इंटर कॉलेज” रखा गया। मज़ार-ए-जिगर मुरदाबादी, तोपखाना, गोंडा में मौजूद है।

ये इश्क़ नहीं आसां इतना ही समझ लीजे

इक आग का दरिया है और डूब के जाना है

जिगर मुरादाबादी एक ऐसे शायर थे जिन्होंने अपनी शायरी से लाखों लोगों के दिलों को छुआ। उनकी शायरी में एक अनूठी बेबाकी और ईमानदारी थी, जो लोगों को बहुत पसंद आती थी।

ये भी पढ़ें: उर्दू और फ़ारसी के समंदर, ग़ज़ल के ख़ुदा-ए-सुख़न शायर मीर तक़ी मीर 

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

 


1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib: जहां हर तकलीफ़ का हल और दिल को सुकून मिलता है

Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib सिर्फ़ एक इबादतगाह नहीं,...

Gurdaspur killings: सीमा पार से खतरों का बदलता चेहरा

पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर दो पुलिसवालों - असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार की हत्या ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ते सुरक्षा ख़तरों (Gurdaspur killings: Changing face of cross-border threats) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Goodword Publication: बच्चों में तालीम, तसव्वुर और पॉज़िटिव सोच की एक रोशन मिसाल

Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से...

Bagh printing: सिंध से बाग तक का सफ़र, जहां रंगों में बसती है परंपरा

बाग प्रिंटिंग से जुड़े खत्री समुदाय का मूल निवास वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में माना जाता है। समय के साथ यह समुदाय राजस्थान के मालवा-मारवाड़ क्षेत्रों से होता हुआ मध्य प्रदेश के धार ज़िले के बाग गांव में आकर बस गया। यहां की बाग नदी का पानी इस छपाई के लिए बेहद उपयुक्त साबित हुआ।

Topics

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdaspur killings: सीमा पार से खतरों का बदलता चेहरा

पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर दो पुलिसवालों - असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार की हत्या ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ते सुरक्षा ख़तरों (Gurdaspur killings: Changing face of cross-border threats) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Goodword Publication: बच्चों में तालीम, तसव्वुर और पॉज़िटिव सोच की एक रोशन मिसाल

Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से...

Bagh printing: सिंध से बाग तक का सफ़र, जहां रंगों में बसती है परंपरा

बाग प्रिंटिंग से जुड़े खत्री समुदाय का मूल निवास वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में माना जाता है। समय के साथ यह समुदाय राजस्थान के मालवा-मारवाड़ क्षेत्रों से होता हुआ मध्य प्रदेश के धार ज़िले के बाग गांव में आकर बस गया। यहां की बाग नदी का पानी इस छपाई के लिए बेहद उपयुक्त साबित हुआ।

पढ़ाई का ऐसा माहौल कि 18 किमी दूर से आते हैं स्टूडेंट्स: जानिए कश्मीर की Iqbal Library की कहानी

हर सुबह, समीना बीबी इकबाल लाइब्रेरी-कम-स्टडी सेंटर (Iqbal Library)...

हुनर की मिसाल बने बबलू कुमार, PM Vishwakarma मंच पर बढ़ाया बिहार का गौरव

बिहार के गया ज़िले के रहने वाले बबलू कुमार...

Related Articles

Popular Categories