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We Are One: डांस के ज़रिए समाज में समानता की पहल

दिल्ली में मौजूद ‘We Are One’ डांस अकादमी केवल नृत्य सिखाने का एक केंद्र नहीं है, बल्कि ये उन दिव्यांग व्यक्तियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है, जो अपनी सीमाओं को पार कर एक नई पहचान बनाना चाहते हैं। इस अद्भुत अकादमी में सभी डांसर दिव्यांग हैं, लेकिन उनकी कला और दृढ़ संकल्प किसी भी साधारण व्यक्ति को पीछे छोड़ सकते हैं। यहां भरतनाट्यम जैसे पारंपरिक नृत्य की बारीकियां सीखने वाले डांसर्स की कहानियां न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि आत्म-सम्मान और आत्मनिर्भरता का जीता-जागता उदाहरण है।

कौन हैं अकादमी के संस्थापक हुसैन

इस अकादमी के संस्थापक हुसैन खुद एक दिव्यांग शख्स हैं। दिल्ली में जन्मे हुसैन को बचपन में पोलियो हो गया था, जिसके कारण वह व्हीलचेयर पर हैं। लेकिन उनके आत्मविश्वास और पॉजिटिव नज़रिए ने उनकी दिव्यांगता को उनकी सबसे बड़ी ताकत बना दिया। उन्होंने अपनी शिक्षा अमर ज्योति चैरिटेबल ट्रस्ट स्कूल से पूरी की, जहां दिव्यांग बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नृत्य कला का प्रशिक्षण दिया जाता था। “दिव्यांगता को अक्सर लोग अभिशाप मानते हैं, लेकिन मेरे लिए यह वरदान रही है। अगर मैं दिव्यांग न होता, तो शायद मैं यह मुकाम कभी हासिल न कर पाता,” हुसैन कहते हैं।

अकादमी की स्थापना का सफ़र

हुसैन ने 2006 में फ्रीलांस डांसिंग से अपने करियर की शुरुआत की। समाज के लिए कुछ ख़ास करने की उनकी चाह ने उन्हें 2013 में ‘लाइफ सक्सेस’ नाम की संस्था शुरू करने के लिए प्रेरित किया। हालांकि आर्थिक तंगी के कारण यह संस्था बंद हो गई, लेकिन हुसैन ने हार मानने से इनकार कर दिया। एक दिन, उन्होंने अपने दोस्तों के साथ एक मीटिंग की और अपने सपने को बताए। उन्होंने कहा, “मेरे पास कोई बड़ी संपत्ति नहीं है, लेकिन मेरे पास एक प्लान और विज़न है। हम मिलकर दिव्यांग व्यक्तियों को समाज में एक नई पहचान दिला सकते हैं’’ हुसैन की यह सोच उनके दोस्तों को इतनी प्रेरणादायक लगी कि नवंबर 2016 में ‘वी आर वन’ ऑर्गनाइजेशन की नींव रखी गई। आज यह अकादमी हजारों दिव्यांग डांसर के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है।

प्रेरणा देने वाली कहानियां

अकादमी के हर डांसर की अपनी अनोखी कहानी है। इनमें से एक हैं करूणा, जो दिल्ली की रहने वाली हैं। बचपन से सुनने और बोलने में असमर्थ करुणा को डांस सीखने में कठिनाई होती थी, लेकिन हुसैन और उनकी टीम के मार्गदर्शन ने उनके जीवन को बदल दिया। 2018 में उन्होंने 3 मिनट 42 सेकंड तक बिना रुके नृत्य किया। अब वह बड़े मंचों पर भरतनाट्यम की प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।इसी तरह, 18 की शैली भी बोल नहीं सकती हैं। उन्होंने 2022 में अकादमी जॉइन की। शैली बताती हैं, “जब मैंने यहां व्हीलचेयर पर लोगों को डांस करते देखा, तो मुझे नई प्रेरणा मिली। हुसैन सर ने मेरी क्षमताओं को पहचाना और उन्हें निखारा।”

हुसैन का मानना है कि डांस केवल एक कला नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति और सशक्तिकरण का माध्यम है। वह कहते हैं, “जब हमारी टीम मंच पर प्रस्तुति देती है, तो दर्शक यह पहचान ही नहीं पाते कि कौन दिव्यांग है और कौन नहीं। यही हमारा सबसे बड़ा उद्देश्य है – दिव्यांग और सामान्य व्यक्तियों के बीच की दूरी को पाटना।”

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान

‘वी आर वन’ की टीम ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी जगह बनाई है। हुसैन के दो दशक लंबे करियर में उनकी टीम ने आठ अलग-अलग देशों में 1500 से अधिक डांस शो किए हैं। चेन्नई में भगवान कृष्ण का किरदार निभाने वाले सदस्य गुलशन कुमार का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। अकादमी को अमरावती नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। यहां के डांसर्स ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने भी प्रस्तुति दी हैं।

डांस सिखाने की अनोखी तकनीक

अकादमी में डांस सिखाने की प्रक्रिया भी बेहद खास है। हुसैन बताते हैं, “हम तीन रिदम पर काम करते हैं – स्लो, मीडियम और फास्ट। यह तकनीक डांसर्स को अपनी गति और लय समझने में मदद करती है।” सुनने में असमर्थ डांसर को साइन लैंग्वेज के माध्यम से सिखाया जाता है। भरतनाट्यम सीखने में सामान्यतः पांच साल लगते हैं, लेकिन व्हीलचेयर पर यह प्रक्रिया और अधिक समय लेती है। इसके बावजूद, हुसैन की टीम के डांसर्स इसे सफलतापूर्वक सीखकर मंच पर प्रस्तुत करते हैं।

‘We Are One’ गंगा जमुनी तहज़ीब, आत्मनिर्भरता और समानता का प्रतीक

ये अकादमी केवल नृत्य सिखाने तक सीमित नहीं है। यहां वोकेशनल ट्रेनिंग भी दी जाती है। हर धर्म और संस्कृति के लोग यहां मिलकर काम करते हैं। पूजा, नमाज, हवन और पाठ जैसे धार्मिक अनुष्ठान समान रूप से मनाए जाते हैं। हुसैन का मानना है, “हम कर्म को पूजा मानते हैं।” हुसैन का संदेश है, “समाज को दिव्यांग व्यक्तियों को दया की दृष्टि से नहीं, बल्कि अवसर की दृष्टि से देखना चाहिए। दिव्यांग व्यक्ति आज अपने आप में सक्षम हैं और समाज में अपनी पहचान बना रहे हैं।” वी आर वन डांस अकादमी’ आत्मनिर्भरता और समानता का प्रतीक हुसैन का सपना है कि ‘वी आर वन डांस अकादमी’ देश के हर कोने में स्थापित हो। वह चाहते हैं कि हर दिव्यांग व्यक्ति को अपनी कला निखारने और अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिले।

‘वी आर वन डांस अकादमी’ न केवल डांस सिखाने का एक माध्यम है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान और समाज में समानता का प्रतीक बन चुकी है। हुसैन और उनकी टीम का यह प्रयास न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि दिव्यांगता कोई सीमा नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है।

ये भी पढ़ें: दिल्ली में ‘वीर जी दा डेरा’ करीब 35 सालों से लोगों की कर रहा सेवा

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