Thursday, February 26, 2026
20.4 C
Delhi

बिहार में ‘छापा कपड़े’ के बगैर अधूरी होती है शादियां

छापा कपड़े (Bihari Chhapa Cloth) एक पारंपरिक बिहार में पोशाक है, जिसे बड़े मुस्लिम घरानों में शादियों में पहना जाता है। बिहार के मुसलमानों में शादी छापा कपड़ों के बगैर अधूरी मानी जाती है। दिलचस्प बात यह है कि छपाई का यह पेशा रंगरेज़ बिरादरी (Rangrez Community) के लोग करते हैं, जो मुसलमानों की पिछड़ी जाति से आते हैं। एक तरह से यह लिबास जात-पात से ऊपर समुदाय को जोड़ता है। छपाई कपड़े का काम बिहार के गया, बिहारशरीफ, औरंगाबाद, दरभंगा, सिवान, मुज़फ़्फ़रपुर, और पटना के सब्ज़ीबाग़ में होता है।

समय बीतने के साथ, नए फैशन के कारण  छापा कपड़े पहनने का रिवाज थोड़ा कम ज़रूर हुआ है लेकिन यह अपनी पहचान आज भी क़ायम रखा हुआ है। इन कपड़ों को केमिकल्स और लेयर्स से बनाया जाता है। फूलों की पंखुड़ियों आदि की एक नाजुक डिजाइन के साथ कारीगर लकड़ी के ढांचे पर बारीक डिजाइन जिसमें फूल-पत्तियों का नक़्शे को गरम पानी में गोंद, फ़ेविकोल और केमिकल मिलाकर उसे गरम किया जाता है। इसे लकड़ी के ढांचे पर लगा कर कपड़ों पर अंकित किया जाता है। कपड़े पर छपाई करते समय, उन्हें ऊपर की परत पर रखा जाता है, जो कागज की तरह चांदी की तरह दिखता है। उस पर रख कर पीटते हैं।

इस दौरान इतना दबाव डाला जाता है कि परत पूरी तरह चिपक जाती है।छपे हुए कपड़े को दो-तीन बार धोने पर वह निकलने लगता है लेकिन चमक बनी रहती है। फिलहाल बाजार में इसकी मांग में अचानक वृद्धि हुई है। छापा कपड़े की ख़ासियत यह भी है कि यह बेहद सस्ता होता है।

इस ख़बर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

ये भी पढ़ें: ‘तहकीक-ए-हिंद’: उज़्बेकिस्तान में जन्मे अल-बीरूनी का हिंदुस्तान की सरज़मीं से ख़ास रिश्ता

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

Goodword Publication: बच्चों में तालीम, तसव्वुर और पॉज़िटिव सोच की एक रोशन मिसाल

Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से...

Bagh printing: सिंध से बाग तक का सफ़र, जहां रंगों में बसती है परंपरा

बाग प्रिंटिंग से जुड़े खत्री समुदाय का मूल निवास वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में माना जाता है। समय के साथ यह समुदाय राजस्थान के मालवा-मारवाड़ क्षेत्रों से होता हुआ मध्य प्रदेश के धार ज़िले के बाग गांव में आकर बस गया। यहां की बाग नदी का पानी इस छपाई के लिए बेहद उपयुक्त साबित हुआ।

पढ़ाई का ऐसा माहौल कि 18 किमी दूर से आते हैं स्टूडेंट्स: जानिए कश्मीर की Iqbal Library की कहानी

हर सुबह, समीना बीबी इकबाल लाइब्रेरी-कम-स्टडी सेंटर (Iqbal Library)...

हुनर की मिसाल बने बबलू कुमार, PM Vishwakarma मंच पर बढ़ाया बिहार का गौरव

बिहार के गया ज़िले के रहने वाले बबलू कुमार...

Topics

Goodword Publication: बच्चों में तालीम, तसव्वुर और पॉज़िटिव सोच की एक रोशन मिसाल

Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से...

Bagh printing: सिंध से बाग तक का सफ़र, जहां रंगों में बसती है परंपरा

बाग प्रिंटिंग से जुड़े खत्री समुदाय का मूल निवास वर्तमान पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र में माना जाता है। समय के साथ यह समुदाय राजस्थान के मालवा-मारवाड़ क्षेत्रों से होता हुआ मध्य प्रदेश के धार ज़िले के बाग गांव में आकर बस गया। यहां की बाग नदी का पानी इस छपाई के लिए बेहद उपयुक्त साबित हुआ।

पढ़ाई का ऐसा माहौल कि 18 किमी दूर से आते हैं स्टूडेंट्स: जानिए कश्मीर की Iqbal Library की कहानी

हर सुबह, समीना बीबी इकबाल लाइब्रेरी-कम-स्टडी सेंटर (Iqbal Library)...

हुनर की मिसाल बने बबलू कुमार, PM Vishwakarma मंच पर बढ़ाया बिहार का गौरव

बिहार के गया ज़िले के रहने वाले बबलू कुमार...

DBD Enterprise: 500 रुपये से शुरुआत, आज लाखों दिलों का स्वाद

“DBD Enterprise” आज ये नाम असम में भरोसे, क्वालिटी...

Related Articles

Popular Categories