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हरिपोखर की काली पूजा में क्या है ख़ास? हिंदू-मुस्लिम साथ में मनाते हैं ये पर्व

एक ऐसा राज्य जहां सरकार का नारा है कि धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन उत्सव सभी का है। पश्चिम बंगाल एक ऐसा राज्य है जहां हिंदू-मुस्लिम एक साथ एक-दूसरे के सुख-दुख और त्योहार में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। हरिपोखर एक ऐसी जगह है, जहां हिंदू-मुस्लिम एक साथ काली पूजा मनाते आ रहे हैं। कहा जाता है कि यहां देवी काली के चलने की आवाज़ सुनाई देती है।

काली पूजा के लिए लगभग 5,000 भक्त इकट्ठा होते हैं। लोग पूजा में शामिल होने के लिए दूर-दूर से आते हैं। भक्त यहां तीन दिनों तक मां काली की पूजा करते हैं। परंपरा के अनुसार, वार्षिक पूजा सुबह शुरू होती है। महिलाएं सुबह-सुबह मंदिर में आती हैं। दोपहर में बकरे की बलि दी जाती है। यहां देवी की पूजा के साथ प्रसाद भी बांटा जाता है। मेले में खाने-पीने की दुकानों से लेकर हर तरह की दुकानें लगती हैं। बंगाल में ऐसी कई जगहें हैं जहां हिंदू और मुस्लिम इसी तरह मिलकर त्योहार मनाते हैं।

पूजा समिति के एक सदस्य दिबू लाल मंडल ने आवाज़ द वॉयस को बताया कि दो साल के कोविड-19 के बाद इस साल सबसे ज़्यादा भीड़ देखी गई है। सब कुछ अच्छे से व्यवस्थित किया गया। शुरू से ही पूजा के सभी सिद्धांतों का पालन किया। दूर-दूर से लोग अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए यहां आए।

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