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हौसलों और हिम्मत से भरी हुई है पिंक ऑटो ड्राइवर बिलकिस ख़ान की कहानी

ये कहानी है पिंक ऑटो ड्राइवर महिला बिलकिस ख़ान की जिन्होंने अपने मां बाप को खो देने के बाद शादी शुदा ज़िंदगी में कदम रखा लेकिन उनका पति नशे और शराब की लत में घिरा था। ज़िंदगी में आई कई सारी परेशानियों का सामना करते हुए उन्होंने अपने तीनों बच्चों की ज़िंदगी की कमान संभाली।

बिलकिस ख़ान ने आवाज़ द वॉयस को बताया कि हर महिला सुकून की ज़िंदगी जीना चाहती है, लेकिन शादी के 17 साल बाद भी उन्हें सुख नसीब नहीं हुआ। उनके पति नहीं चाहता थे कि उनके बच्चे पढ़े लिखे, किसी काबिल बनें। वो नशे में लिप्त रहते थे। तब उन्होंने हॉस्टल में हाउसकीपिंग का काम शुरू किया, लेकिन इससे बात नहीं बनी। तब उनकी छोटी बहन ने उनकी मदद की, जो खुद एक बस ड्राइवर हैं।

दिल्ली सरकार की नीति के अंतर्गत ली ऑटो ड्राइविंग की ट्रेनिंग

बिलकिस ख़ान ने दिल्ली सरकार की नीति के अंतर्गत 28 दिनों की ऑटो ड्राइविंग की ट्रेनिंग ली और मुफ़्त लाइसेंस योजना के तहत ऑटो ड्राइविंग लाइसेंस लिया। अब वो ईटीओ कंपनी के साथ जुड़ी हुई हैं, जो एक इलेक्ट्रिक ऑटो हब है। बिलक़िस ख़ान ने जब ऑटो चलाना शुरू किया तो उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

ऑटो ड्राइवर बिलकिस ख़ान कहती हैं कि “मुझे अब ऑटो चलाते हुए 1 साल से ज्यादा हो चुका है, ज्यादातर मैं अपना ऑटो लोटस टेंपल, कालकाजी मंदिर, इस्कॉन मंदिर, नेहरू प्लेस, अक्षरधाम मंदिर या मेट्रो स्टेशन के बाहर लगाती हूं। वहां से मुझे अच्छी सवारियां मिलती हैं।” अभी हाल ही में उन्हें पिंक ऑटो राइडर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है।

बिलकिस का मानना है कि ऐसा कोई भी एरिया ऐसा नहीं है जिसमें महिलाएं पीछे हैं। एक औरत अगर ठान ले, तो वो कुछ भी कर सकती है और समाज को उसे इज्जत बख्शनी होगी क्योंकि वो किसी से कुछ मांग नहीं रही बल्कि अपनी मेहनत के बलबूते अपने जीवन की सारथी खुद बनी हैं।

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