पंजाब (Punjab) का जल संकट सिर्फ़ आज का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी बड़ी चिंता बन चुका है। कई एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो अगले 20–30 सालों में ज़मीन के नीचे का पानी लगभग ख़त्म हो सकता है। जब भी पंजाब (Punjab) के पानी की बात होती है, चाहे वो SYL नहर हो या दूसरी नदियां और नहरें, सभी राजनीतिक पार्टियां एक साथ खड़ी होकर एक-दूसरे पर आरोप लगाने लगती हैं। जिसे भी मौक़ा मिलता है, वो राजनीति करने से पीछे नहीं हटता। BBMB में पंजाब के हक़ की बात करने वाली पार्टियां भी ज़्यादातर सिर्फ़ सियासत ही करती नज़र आती हैं।
लेकिन ये पार्टियां उस ज़हर को नहीं देख रही हैं, जो रोज़-रोज़ पंजाब (Pubjab) के पानी में घुल रहा है। खेतों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स, फैक्ट्रियों का गंदा पानी और लगातार गिरता भूजल, इन सब पर गंभीरता से कोई बात नहीं करता। जब भी कोई मुद्दा उठता है, चार-पांच दिन ऐसा माहौल बनता है जैसे अब तो जल्दी ही हल निकल आएगा। बयान आते हैं, मीटिंग होती हैं, बहसें चलती हैं, लेकिन कुछ समय बाद सब ठंडा पड़ जाता है। ज़मीन पर हालात वैसे ही बने रहते हैं।
पंजाब (Punjab) का पानी सियासत का मुद्दा नहीं, ज़िंदगी का सवाल है। अगर अब भी ईमानदारी से इस पर काम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में हालात और भी ज़्यादा डरावने हो सकते हैं। चाहे हम पंजाब (Punjab) की नदियों की बात करें या नहरों की, हालात हर जगह ख़राब हैं। आम लोग भी नहरों में कूड़ा-कचरा और बेकार सामान डालने से नहीं हिचकिचाते। वहीं दूसरी तरफ़ बड़ी-बड़ी कंपनियां और फैक्ट्रियां बिना सोचे-समझे अपना गंदा पानी और केमिकल्स पंजाब के पानी में मिला रही हैं।
आज हालत ये है कि पंजाब (Punjab) का पानी इतना ज़्यादा प्रदूषित हो चुका है कि इसे साफ़ करने में 20 से 30 साल लग सकते हैं। लेकिन मौजूदा हालात को देखकर ऐसा लग रहा है कि आने वाले समय में स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ने वाली है। अगर अभी भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों और आने वाली पीढ़ियों को ही झेलना पड़ेगा। पानी बचाना और उसे साफ़ रखना अब सिर्फ़ सरकार की नहीं, बल्कि हम सबकी ज़िम्मेदारी बन चुकी है।

कुल 819 जल स्रोत पंजाब (Punjab) के पानी को गंदा कर रहे हैं
अब बात फिर से पंजाब (Punjab) के गंदे होते पानी की। हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि पंजाब (Punjab) सरकार और केंद्र सरकार दोनों ही पंजाब (Punjab) के पानी को बचाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। नदियों और नहरों में जो प्रदूषण कॉरपोरेट घराने, फैक्ट्रियां और कंपनियां फैला रही हैं, उसे रोकने के लिए सरकार कोई सख़्त कदम नहीं उठा रही है। कभी-कभी पंजाब (Punjab) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की तरफ़ से प्रदूषण हटाने के अभियान ज़रूर चलाए जाते हैं और सरकार के सहयोग की बात भी होती है, लेकिन हक़ीक़त ये है कि बोर्ड की हालत भी अब ऐसी हो गई है कि कार्रवाई कम और दिखावा ज़्यादा नज़र आता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब (Punjab) में ऐसे कुल 819 स्रोत हैं जो नदियों और जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं और अब तक इन्हें बंद नहीं किया गया है। इनमें से ज़्यादातर स्रोत ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग के तहत आते हैं। अभी तक करीब 290 स्रोतों को बंद या हटाया गया है, लेकिन 510 स्रोत अब भी पंचायत विभाग के तहत खुले पड़े हैं। ये जानकारी पंजाब (Punjab) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 19 दिसंबर 2025 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में दाख़िल अपनी रिपोर्ट में दी।
ये रिपोर्ट NGT के 19 सितंबर 2025 के आदेश के बाद कोर्ट में पेश की गई थी। पूरी रिपोर्ट पंजाब (Punjab) के जल स्रोतों में हो रहे प्रदूषण से जुड़ी है। ये भी ज़रूरी है कि इस मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने खुद संज्ञान लिया था। इसकी शुरुआत 16 सितंबर 2024 को एक अख़बार में छपी खबर के बाद हुई थी।
भले ही ये प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत मौजूदा सरकार के समय में न लगाए गए हों, लेकिन पिछली सरकारों ने इन्हें अनुमति ज़रूर दी होगी। सवाल ये है कि जब सारी रिपोर्टें सरकार के पास पहुंच चुकी हैं, हर प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्री का डेटा मौजूद है, तो फिर सरकार किसका इंतज़ार कर रही है? आख़िर क्यों अब तक इन प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर ताले नहीं लगे ? पंजाब (Punjab) का पानी लगातार ज़हर बनता जा रहा है, लेकिन ज़िम्मेदार लोग अब भी खामोश बैठे हैं।

प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों को बंद करने के NGT के आदेश
इस पूरे मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अब सख़्त रुख अपनाया है। NGT ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि वो सभी प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों को बंद करने के लिए साफ़-साफ़ समयसीमा तय करे। इसके बाद बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी ने सभी क्षेत्रीय दफ़्तरों के पर्यावरण इंजीनियरों को निर्देश दिए कि वो नदियों में गंदा पानी छोड़ने वाले स्रोतों को रोकने के लिए एक्शन प्लान और डेडलाइन जमा करें।
ख़बर के मुताबिक, जल संसाधन विभाग को पानी का संरक्षक मानते हुए 11 दिसंबर 2025 को प्रमुख सचिव को एक चिट्ठी भी लिखी गई। इसमें अपील की गई कि नदियों और जल स्रोतों में गंदा पानी छोड़ने वाली औद्योगिक इकाइयों, गांवों की सीवरेज, नगर निगम के नालों, डेयरी फार्मों और दूसरे प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों को तुरंत बंद करने के आदेश जारी किए जाएं। इसके साथ ही ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग और स्थानीय निकाय विभाग को भी अपने-अपने दायरे में आने वाले प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों को बंद करने के लिए कहा गया और इस बारे में आदेश भी दिए गए। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त ये है कि अब तक ज़्यादातर कार्रवाई सिर्फ़ काग़ज़ों तक ही सीमित है।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का कहना है कि उसने 31 प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत बंद किए हैं, जबकि स्थानीय निकाय विभाग ने सिर्फ़ 30 स्रोत बंद किए हैं। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 18 औद्योगिक इकाइयां, 3 डेयरियां और 4 व्यक्तिगत प्रदूषण स्रोत बंद या हटाए हैं। इन कार्रवाइयों के बाद बंद किए गए प्रदूषण स्रोतों की संख्या 606 से बढ़कर 692 हो गई है। वहीं राज्य में मौजूद कुल प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की संख्या 905 से घटकर 819 रह गई है, जिन्हें अब भी बंद किया जाना बाकी है। ये आंकड़े हाल के हैं।
इससे पहले भी कई संगठनों ने अपने स्तर पर डेटा इकट्ठा किया था, जिसमें मौजूदा और पिछली सरकारों पर आरोप लगे कि उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर काम करने के बजाय सिर्फ़ राजनीति की और लोगों को आपस में लड़ाया। चाहे बुद्धा नाला हो या सतलुज, रावी और ब्यास नदियां हर जगह सरकार सिर्फ़ दिखावा करती नज़र आती है। आज पंजाब (Pubjab) के पानी को बचाना सबसे ज़रूरी है। जिस तेज़ी से राज्य में जलस्तर नीचे जा रहा है, उसे देखकर साफ़ है कि अगर अब भी हालात नहीं बदले, तो आने वाला समय पंजाब (Pubjab) के लिए बहुत डरावना साबित हो सकता है।

पंजाब (Punjab) के पानी को बचाना आज सबसे ज़रूरी
इस साल बाढ़ की वजह से भले ही पंजाब (Punjab) में पानी का स्तर थोड़ा बढ़ा हो, लेकिन इसके साथ समस्याएं भी कई गुना बढ़ गई हैं। इन समस्याओं पर ध्यान देने की ज़रूरत है, न कि उन पर राजनीति करने की। हमारे गुरु साहिबानों ने हमेशा पानी, हवा और धरती को बचाने का संदेश दिया है, लेकिन आज हम ठीक इसके उलट चल रहे हैं। हम पानी को बेवजह बर्बाद कर रहे हैं, ज़मीन को नुकसान पहुंचा रहे हैं और आसमान यानी हवा को भी ज़हरीला बना रहे हैं। फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं ज़हरीली गैसें बना रहा है, जिससे तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं।
हालात ऐसे हो गए हैं कि अब ये सवाल खड़ा हो गया है कि आने वाला कल कैसा होगा? क्या नवजात बच्चे भी सुरक्षित रह पाएंगे? इसका जवाब किसी के पास साफ़ नहीं है। इसलिए आज सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि पंजाब (Punjab) के पानी को पंजाब में ही बचाया जाए। जिस तरह प्रदूषण फैलाने वाले जल स्रोतों की संख्या लगातार बढ़ रही है, उससे साफ़ लगता है कि इस समय पंजाब (Punjab) बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।

राज्य सरकार को अब इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। सख़्त फैसले लेने होंगे और ऐसे कड़े क़ानून बनाने होंगे, जिससे पानी को गंदा करने वाली फैक्ट्रियां, उद्योग, डेयरियां और दूसरी औद्योगिक इकाइयां पूरी तरह बंद हों। तभी पंजाब (Punjab) को दोबारा एक साफ़, सुरक्षित और खुशहाल राज्य बनाया जा सकता है।
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