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रहस्यों का खज़ाना है लेपाक्षी : वो मंदिर जहां खंभा नहीं छूता ज़मीन, गुरुत्वाकर्षण को देता है मात  

आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के एक छोटे से कस्बे लेपाक्षी में छुपा है भारतीय वास्तुकला का एक अनोखा रत्न श्री वीरभद्र मंदिर, जिसे लेपाक्षी मंदिर (Lepakshi temple) के नाम से जाना जाता है। ये सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि पत्थरों पर उकेरी गई एक पूरी दिव्य कहानी है।

कछुए की पीठ पर बसा चमत्कार

ये मंदिर कुमारशैलम नाम की एक छोटी पहाड़ी पर मौजूद है, जो देखने में बिल्कुल कछुए जैसी लगती है। (तेलुगु में ‘कुमार’ यानी कछुआ) 16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के शासकों के समय बना ये मंदिर भगवान वीरभद्र (शिव जी के उग्र रूप) को समर्पित है।

लेपाक्षी मंदिर (Image-Wikipedia)

ऐसी नक्काशी कहीं नहीं देखी होंगी

जैसे ही आप अंदर प्रवेश करेंगे, आप हैरान रह जाएंगे। नाट्य मंडप (नृत्य मंडप) तो मानो पूरी तरह नक्काशी से ढंका हुआ है। इसकी छत पर महाभारत, रामायण और पुराणों के अद्भुत चित्र (भित्तिचित्र) बने हैं। यहां आप देख सकते हैं:

  • शिशु कृष्ण अपना पैर का अंगूठा चूसते हुए।
  • भगवान ब्रह्मा की उपस्थिति में पार्वती-शिव का विवाह।
  • अर्जुन और भगवान शिव का अद्भुत युद्ध (किरातार्जुनीयम)।
  • पूरे एशिया में सबसे बड़ा भगवान वीरभद्र का भित्तिचित्र।
  • शिव जी के कम से कम 15 अवतारों की अद्भुत झलक।
IMAGE- Wikipedia

वो रहस्यमयी लटकता हुआ खंभा

लेपाक्षी की सबसे बड़ी हैरानी है हवा में लटकता खंभा, एक ऐसा खंभा, जो ज़मीन से थोड़ा सा ऊपर उठा हुआ है। आप उसके नीचे कोई कपड़ा, कागज या सिक्का आसानी से निकाल सकते हैं। कहते हैं कि एक अंग्रेज़ इंजीनियर ने इसका रहस्य जानने के लिए इसे हिलाने की कोशिश की, जिससे ये अपनी मूल स्थिति से थोड़ा खिसक गया। तब से ये बिना किसी सहारे के, गुरुत्वाकर्षण (Gravity) को चुनौती देता हुआ लटका है।

लेपाक्षी मंदिर (Image-.incredibleindia.gov.in)

अधूरा कल्याण मंडप और अंधे भाई

मंदिर परिसर में एक अधूरा कल्याण मंडप भी है। किंवदंती है कि दो भाई वीरुपन्ना और वीरन्ना ने मंदिर बनवाने के लिए राजकोष से पैसे उड़ा दिए थे। जब राजा को पता चला, तो सजा के तौर पर उनकी आंखें फोड़ दी गईं। कहते हैं कि उसी मंडप की दीवारों पर लगे जंग जैसे दाग, उन अंधे भाइयों के खून के धब्बे हैं।

सीता जी के पैरों के निशान और चमत्कारी जल

यहां एक विशाल पत्थर पर माता सीता के पैरों के निशान उकेरे गए हैं। और सबसे आश्चर्य की बात – उस निशान के अंगूठे वाली जगह हमेशा पानी से भरी रहती है। ये पानी कहां से आता है? कोई नहीं जानता।

लेपाक्षी मंदिर (Image-.incredibleindia.gov.in)

अद्भुत नागलिंगम-सांप और शिवलिंग का अनोखा संगम

यहां एक शिवलिंग है, जिसके ऊपर सात फनों वाला नाग (सांप) अपना फन फैलाए खड़ा है। ऐसा कहा जाता है कि मूर्तिकारों को अपने भोजन का इंतज़ार था, तब उन्होंने मज़ाक में इस अद्भुत नागलिंगम को बनाना शुरू कर दिया।

मोनोलिथिक नंदी-IMAGE- wikipedia

दुनिया की सबसे बड़ी मोनोलिथिक नंदी

मंदिर से थोड़ी दूर विराजमान है भगवान नंदी की विशालकाय मूर्ति। ये पूरे भारत की सबसे बड़ी मोनोलिथिक (एक ही पत्थर से बनी) नंदी है।

  • ऊंचाई: 15 फीट
  • लंबाई: 27 फीट
  • गले में बेहतरीन नक्काशीदार घंटियों का हार।
  • ये नंदी मंदिर के अंदर बने नागलिंगेश्वर की तरफ मुंह किए बैठा है। मानो शिव जी के सबसे वफादार संतरी की तरह।
IMAGE- wikipedia

लेपाक्षी नाम कैसे पड़ा? रामायण से जुड़ा अनोखा किस्सा

एक फेमस कथा के अनुसार, जब रावण माता सीता का हरण करके लंका ले जा रहा था, तो गिद्धराज जटायु ने उससे युद्ध किया। रावण ने जटायु के पंख काट दिए। जब भगवान राम वहां पहुंचे, तो घायल जटायु को देखकर बोले- ‘ले पक्षी’ (तेलुगु में – उठो, पक्षी)। इसी ‘ले पक्षी’ का अपभ्रंश ही लेपाक्षी बना।

शिल्प और आस्था का जीवंत संग्रहालय

लेपाक्षी मंदिर चालुक्य, होयसल और काकतीय शैलियों का अद्भुत संगम है। यहां मिली 20 से ज़्यादा शिलालेख (सबसे पुराना 1583 ई.) बताते हैं कि इसका निर्माण राजा अच्युत राय के अधिकारी वीरुपन्ना ने करवाया था।

IMAGE- wikipedia

सबसे ख़ास बात: यहां मिलने वाले भित्तिचित्र (fresco painting) मध्य-विजयनगर काल के इकलौते जीवित चित्र हैं, जो आज भी अपने मूल रंगों में हैं।

तो अगली बार जब आप आंध्र जाएं, तो इस ‘लटकते चमत्कार’ को ज़रूर देखें। वादा है, मुंह से निकलेगा- वाह शानदार!

ये भी पढ़ें:   ‘ऐब-ए-रवां’ से ‘बाफ़्त-हवा’ तक : वो भारतीय शान जिसने मुगलों को दीवाना बनाया, मलमल जिसे देख यूरोप हैरान रह गया

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