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मुजफ्फरनगर की जैस्मिन मलिक बनी बेसहारा गायों की सहारा

आपने सड़कों पर घूम रही बेसहारा गायों को जरूर देखा होगा। ये वो बूढ़ी गायें होती है, जो दूध नहीं दे सकती। इन्हीं गायों को सहारा देने का काम कर रही है मुजफ्फरनगर की रहने वाली जैसमीन मलिक। जैस्मिन पेशे से अकाउंटेट है इससे पहले किसी जानवर को पालने का अनुभव नहीं था। आज वो अपने लाखों रूपये खर्च करके 55 बेजुबानों गायों की देखभाल कर रही है। 

आज ‘शिव के नंदियों का घर’ नाम से ये गौशाला पूरे शहर में मशहूर हो चुकी है। ये गौशाला खोलना मुमकिन हुआ उनके जीवन में हुई एक घटना के बाद। दरअसल, तीन साल पहले उनके घर के बाहर एक नाले में एक छोटा सा नंदी गिर गया था। जिसे जैसमीन मलिक और उनके पिता ने बचाया। जब उन्हें पता चला कि यह नंदी है और दूध नहीं दे सकता इसलिए किसी ने इसे रोड़ पर बेसहारा छोड़ दिया है। तब उन्हें बड़ा दुःख हुआ और यहीं से उन्होंने फैसला किया कि वह ऐसे और बेसहारा जानवरों के लिए जरूर कुछ करेंगी।  

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ये भी पढ़ें: ‘तहकीक-ए-हिंद’: उज़्बेकिस्तान में जन्मे अल-बीरूनी का हिंदुस्तान की सरज़मीं से ख़ास रिश्ता

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