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बिहार में जमात ए इस्लामी कैसे कौमी एकता पर काम कर रही है? क्या रास्ता?

मुस्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी बिहार (Jamaat-e-Islami (Hind) Bihar) में सामाजिक सद्भाव और साम्प्रदायिक सौहार्द स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। हिन्दू-मुस्लिम मिल कर अमन के साथ खुशहाल भारत का निर्माण कर सकें इसके लिए 2023-27 तक योजनाओं और धार्मिक संवाद कार्यक्रम किए जाएंगे, जिसपर मिशन मोड में काम किया जाएगा।

जमाअत-ए-इस्लामी (Jamaat-e-Islami) का प्रयास होगा कि देश और समाज में शांति एवं न्याय की स्थापना हो। ऊंच-नीच, भेदभाव दूर हो, तमाम नागरिकों के बीच गहरे संबंध स्थापित हो सके। सिर्फ यही नहीं, स्वास्थ्य के क्षेत्र में चिकित्सकीय मार्गदर्शन के अलावा सरकारी योजनाओं से लाभ उठाने के संबंध में मार्गदर्शन व मदद की जाए। जमाअत की तमाम इकाइयों में ग़रीब व ज़रूरतमंद व्यक्तियों, तलाक़शुदा और बेसहारा महिलाओं की मदद की जाएगी।

जमात-ए-इस्लामी (हिंद) बिहार (Jamaat-e-Islami (Hind) Bihar) के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना रिजवान अहमद इस्लामिक ने कहा कि इस्लाम के प्रति नकारात्मक सोच में परिवर्तन लाने में पत्रकारों की अहम भूमिका होगी। इस्लाम और मुसलमानों के बारे में एक वर्ग में कई तरह की गलतफहमियां पाई जाती हैं। 

इस खबर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

ये भी पढ़ें: हरियाणा के नूंह ज़िले में कौमी एकता की ख़ूबसूरत बानगी

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