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असम का जाजोरी गांव जहां मुस्लिम महिलाओं की जीविका बुनाई है

असम का जाजोरी गांव जहां मुस्लिम महिलाओं का जीविका का साधन बुनाई है। महिलाओं द्वारा हाथों से बनाए गए कपड़े असम और देश के अन्य हिस्सों में बेचे जाते है। कपास, मुगा, पैट (शहतूत रेशम) और एरी (एंडी) मुख्य कपड़े हैं जो जाजोरी गांव में बुने जाते हैं। शॉल, साड़ी, साज-सामान और चादर जैसे कपड़े आमतौर पर शुद्ध असमिया कपास से बुने जाते हैं। जाजोरी में मुस्लिम महिलाएं पारंपरिक गमोशा (दोनों सिरों पर लाल पैटर्न वाला सफेद तौलिया) भी बुनती हैं, जो अलग अलग अवसरों पर सम्मान और प्यार के प्रतीक के रूप में बड़ों और प्रियजनों को दिया जाता है।

अहोम साम्राज्य के बाद से जाजोरी में ग्रामीणों के लिए बुनाई ही आय का एकमात्र स्रोत था, लेकिन इसमें तब तेजी आई जब 1905 में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी ने सभी विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आह्वान किया। अब पूरा गांव बुनाई पर निर्भर है।

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ये भी पढ़ें: ‘तहकीक-ए-हिंद’: उज़्बेकिस्तान में जन्मे अल-बीरूनी का हिंदुस्तान की सरज़मीं से ख़ास रिश्ता

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