Monday, July 13, 2026
38.8 C
Delhi

हिंदी सिनेमा: एक मौलिक स्वर

हाल की फिल्मों ने हिंदू-मुस्लिम विवादों का उपयोग कर बॉक्स ऑफिस में जोश बढ़ाया, लेकिन हिंदी सिनेमा इससे अलग रहा है। सौ साल पुराने इस सिनेमा ने हिंदी-उर्दू, हिंदू-मुस्लिम, पारसी थिएटर, पौराणिक और मुस्लिम कथाओं की फिल्में बनाई हैं। राष्ट्रीय चेतना में कुछ टूट-फूट आई है, जो सिनेमा पर प्रभाव डाल रही है, लेकिन यह अभी भी पर्दे पर है।

शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों का हिंदी सिनेमा के मूल स्वर में महत्वपूर्ण योगदान है। सेंसरशिप की वजह से पहले विवादास्पद मुद्दों से बची थीं फिल्में।

आजादी के बाद लोगों को पहला मकसद राष्ट्र-निर्माण था। शुरू में लोगों के पास सपने थे, बराबरी के, समृद्धि और खुशहाली के। इसलिए साम्यवादी सपनों वाली फिल्में बनती थी।

हमने मदर इंडिया, दो बीघा जमीन, और नया दौर जैसी फिल्में देखीं। कुछ फिल्मों में जाति-प्रथा और छुआछूत पर चोट की गई। साम्यवाद के प्रभाव में सामंतवाद, जमींदारी की बुराई की गई, रोजगार और मकान की कमियों की ओर इशारा किया गया।

इस खबर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

ये भी पढ़ें: आयुषी सिंह UP PCS पास कर DSP बनीं, कैसे की थी पढ़ाई?

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

रईस अमरोहवी: अल्फ़ाज़ से फ़िक्र की दुनिया रौशन करने वाले शायर 

उर्दू अदब की दुनिया में रईस अमरोहवी का नाम...

सैय्यद अहमदउल्लाह क़ादरी: उर्दू अदब, सहाफ़त और क़ौमी यकजहती के अलमबरदार     

उर्दू अदब और सहाफ़त की दुनिया में लिसान-उल-मुल्क सैय्यद...

कैनबरा से तमिलनाडु तक: ऑस्ट्रेलिया ने लौटाई भारत की 12वीं सदी की चोरी हुई मूर्तियां

सदियों पुरानी विरासत और गौरवशाली अतीत को संजोए हुए...

Topics

रईस अमरोहवी: अल्फ़ाज़ से फ़िक्र की दुनिया रौशन करने वाले शायर 

उर्दू अदब की दुनिया में रईस अमरोहवी का नाम...

सैय्यद अहमदउल्लाह क़ादरी: उर्दू अदब, सहाफ़त और क़ौमी यकजहती के अलमबरदार     

उर्दू अदब और सहाफ़त की दुनिया में लिसान-उल-मुल्क सैय्यद...

जिस लंगड़े आम पर शायर मर मिटे

हमारे इलाक़े में लंगड़ा आम अमूमन जून के तीसरे-चौथे...

Related Articles

Popular Categories