Tuesday, January 27, 2026
12.1 C
Delhi

हिंदी सिनेमा: एक मौलिक स्वर

हाल की फिल्मों ने हिंदू-मुस्लिम विवादों का उपयोग कर बॉक्स ऑफिस में जोश बढ़ाया, लेकिन हिंदी सिनेमा इससे अलग रहा है। सौ साल पुराने इस सिनेमा ने हिंदी-उर्दू, हिंदू-मुस्लिम, पारसी थिएटर, पौराणिक और मुस्लिम कथाओं की फिल्में बनाई हैं। राष्ट्रीय चेतना में कुछ टूट-फूट आई है, जो सिनेमा पर प्रभाव डाल रही है, लेकिन यह अभी भी पर्दे पर है।

शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों का हिंदी सिनेमा के मूल स्वर में महत्वपूर्ण योगदान है। सेंसरशिप की वजह से पहले विवादास्पद मुद्दों से बची थीं फिल्में।

आजादी के बाद लोगों को पहला मकसद राष्ट्र-निर्माण था। शुरू में लोगों के पास सपने थे, बराबरी के, समृद्धि और खुशहाली के। इसलिए साम्यवादी सपनों वाली फिल्में बनती थी।

हमने मदर इंडिया, दो बीघा जमीन, और नया दौर जैसी फिल्में देखीं। कुछ फिल्मों में जाति-प्रथा और छुआछूत पर चोट की गई। साम्यवाद के प्रभाव में सामंतवाद, जमींदारी की बुराई की गई, रोजगार और मकान की कमियों की ओर इशारा किया गया।

इस खबर को पूरा पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं।

ये भी पढ़ें: आयुषी सिंह UP PCS पास कर DSP बनीं, कैसे की थी पढ़ाई?

आप हमें FacebookInstagramTwitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

शबनम बशीर(Shabnam Bashir): वो रहनुमा जिसने कश्मीर की अनदेखी राहों को दुनिया से रूबरू कराया

जम्मू-कश्मीर का बांदीपुरा, जहां हरमुख पर्वत की बुलंद चोटियां...

जम्मू और कश्मीर-नशीले पदार्थों का ख़तरा

जम्मू और कश्मीर (Jammu & Kashmir) में हाल के वर्षों में ड्रग्स (Narco-Terrorism) के इस्तेमाल में तेज़ी से इज़ाफा देखा गया है। साल 2026 के पहले हफ्ते के दौरान, केंद्र शासित प्रदेश (UT) में नशीले पदार्थों से संबंधित कई गिरफ्तारियां और बरामदगी दर्ज की गईं

Sunil Jaglan: एक पिता ने बदल दी सोच: Selfie with Daughter से गालीबंद घर तक की Journey

हरियाणा जैसे राज्य में जहां खाप पंचायतों (Khap Panchayats) में महिलाओं की भागीदारी न के बराबर थी, सुनील जी ने बदलाव की शुरुआत की। उन्होंने ‘लाडो पंचायत’ (Lado Panchayat) की शुरुआत की, जहां लड़कियां खुद अपने हकों की बात करती हैं।

Viksit Bharat: पंचर की दुकान से भारत मंडपम तक – झारखंड के चंदन का सफ़र

एक आम परिवार से निकलकर देश के सबसे बड़े...

Topics

शबनम बशीर(Shabnam Bashir): वो रहनुमा जिसने कश्मीर की अनदेखी राहों को दुनिया से रूबरू कराया

जम्मू-कश्मीर का बांदीपुरा, जहां हरमुख पर्वत की बुलंद चोटियां...

जम्मू और कश्मीर-नशीले पदार्थों का ख़तरा

जम्मू और कश्मीर (Jammu & Kashmir) में हाल के वर्षों में ड्रग्स (Narco-Terrorism) के इस्तेमाल में तेज़ी से इज़ाफा देखा गया है। साल 2026 के पहले हफ्ते के दौरान, केंद्र शासित प्रदेश (UT) में नशीले पदार्थों से संबंधित कई गिरफ्तारियां और बरामदगी दर्ज की गईं

Sunil Jaglan: एक पिता ने बदल दी सोच: Selfie with Daughter से गालीबंद घर तक की Journey

हरियाणा जैसे राज्य में जहां खाप पंचायतों (Khap Panchayats) में महिलाओं की भागीदारी न के बराबर थी, सुनील जी ने बदलाव की शुरुआत की। उन्होंने ‘लाडो पंचायत’ (Lado Panchayat) की शुरुआत की, जहां लड़कियां खुद अपने हकों की बात करती हैं।

Related Articles

Popular Categories