लद्दाख के पहले के जम्मू-कश्मीर राज्य से अलग होकर केंद्र शासित प्रदेश बनने के सात साल बाद, प्रशासन ने ज़मीनी स्तर पर शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने सातों ज़िलों में ‘ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल’ (‘Autonomous Hill Development Council) बनाने की घोषणा की।
उन्होंने इसे लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और ज़मीनी स्तर (Democratic decentralization and the grassroots level) पर शासन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। LAHDC एक्ट की धारा 3(1) में पहले से ही हर ज़िले के लिए एक काउंसिल का प्रावधान है। इस प्रक्रिया में आगे उठाए जाने वाले कदमों के बारे में बताते हुए कुंद्रा ने कहा कि अब सिर्फ़ एक्ट में ज़रूरी बदलाव और चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन (Redefinition Of Boundaries) करना बाकी है।
अप्रैल 2026 में लद्दाख में ज़िलों की संख्या दो से बढ़कर सात हो गई, जब शाम, नुब्रा, चांगथांग, ज़ंस्कार और द्रास को ज़िलों के तौर पर अधिसूचित किया गया। अब तक चुने हुए प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व लेह और करगिल की दो मौजूदा काउंसिलों के पास ही रहा है। हालाँकि, मुख्य सचिव के अनुसार, नए ज़िलों को वही अधिकार मिलेंगे जो लेह को 1995 से और करगिल को 2003 से मिले हुए हैं; ये अधिकार कम नहीं होंगे।
हिल काउंसिलों के अधिकार इस प्रकार बताए गए हैं:
1. काउंसिलों के पास ज़िले के भीतर ज़मीन के मालिकाना हक और ज़मीन के आवंटन का अधिकार होगा। शाम, नुब्रा, चांगथांग, ज़ंस्कार और द्रास अपनी-अपनी सीमाओं के भीतर इस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
2. काउंसिलें ज़िला कैडर के पदों के लिए भर्ती और प्रमोशन को नियंत्रित करेंगी। नए ज़िलों में रोज़गार से जुड़े फ़ैसले ज़िले के भीतर मौजूद चुनी हुई संस्था द्वारा लिए जाएंगे।
3. काउंसिलों के पास अपना काउंसिल फंड होगा और वे टैक्स और फ़ीस लगा सकेंगी। हर नए ज़िले का अपना रेवेन्यू बेस (राजस्व का स्रोत) होगा।
4. काउंसिलें अपनी विकास योजनाएँ खुद बनाएँगी। हर ज़िला अपनी प्राथमिकताएँ खुद तय करेगा, न कि लेह या करगिल से उन्हें प्राप्त करेगा।
5. काउंसिलें ज़िला स्तर पर स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय बुनियादी ढाँचे और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए ज़िम्मेदार होंगी।
सात काउंसिलों के ऊपर एक केंद्र शासित प्रदेश स्तर की संस्था बनाने का प्रस्ताव है, जो खास तौर पर तैयार किए गए आर्टिकल 371 के ढांचे के तहत काम करेगी और जिसके पास विधायी, कार्यकारी, वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार होंगे। मुख्य सचिव ने कहा कि देश में इस मॉडल जैसा कोई दूसरा मॉडल नहीं है और यह दूसरी व्यवस्थाओं की सबसे अच्छी खूबियों को अपनाएगा। हिल काउंसिलों के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाएं भी काम करती रहेंगी। केंद्र-शासित प्रदेश स्तर की संस्था का ढांचा और उसकी शक्तियां लद्दाख के प्रतिनिधियों और भारत सरकार के बीच बातचीत से तय की जाएंगी।
इसके बाद परिषदों और केंद्र-शासित प्रदेश की संस्था के बीच शक्तियों का कुछ Rebalancing हो सकता है। परिषदें नए ढांचे का पहला पक्का हिस्सा हैं जिसकी पुष्टि हो चुकी है। मुख्य सचिव ने कहा कि लद्दाख में गांव, ज़िले और केंद्र-शासित प्रदेश के स्तर पर चुने हुए प्रतिनिधि होंगे।
ये भी पढ़ें: जब Famous Italian shoemaker ने बनाए महारानी के लिए हीरे-पन्ना से जड़े जूते,इंदिरा देवी का फैशन आज भी बेनज़ीर
आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं



