दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर परिसर (Delhi’s Akshardham Temple Complex) में अब एक नई चमत्कारी मूर्ति विराजमान हो गई है, 108 फीट ऊंची, दुनिया की सबसे ऊंची ‘एक पैर पर खड़ी’ मूर्ति। ये इतनी ऊंची है जितनी लगभग 11 मंजिला बिल्डिंग, दुनिया में ये अपनी तरह की सबसे ऊंची मूर्ति है। ये सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि एक कहानी है, एक बालक की, जिसने 11 साल की उम्र में सब कुछ छोड़ दिया।

किसकी है यह मूर्ति?
ये मूर्ति भगवान स्वामीनारायण के बाल रूप ‘नीलकंठ वर्णी’ (Lord Swaminarayan in His Childhood Form: ‘Neelkanth Varni’) की है। जब वे सिर्फ 11 साल के थे, तो उन्होंने अपना घर, मां-बाप, सब कुछ छोड़ दिया। हाथ में सिर्फ एक कमंडल (पानी का बर्तन) और शरीर पर एक कपड़ा लेकर वे 7 साल की पदयात्रा पर निकल पड़े। वे भारत, नेपाल, तिब्बत, भूटान और बांग्लादेश तक पैदल घूमे।

ये मूर्ति ख़ास क्यों है?
इस मूर्ति में नीलकंठ वर्णी एक पैर पर खड़े हैं और दोनों हाथ ऊपर उठाए हुए हैं। ये उनके कठोर तप (ध्यान) की मुद्रा है। कहा जाता है कि हिमालय की बर्फीली गुफाओं में वे घंटों इसी तरह खड़े रहकर ध्यान करते थे।
ये मुद्रा हमें सिखाती है-
- अनुशासन (अपने आप पर काबू रखना)
- संयम (मुश्किल में भी शांत रहना)
- साधना (अपने लक्ष्य पर ध्यान देना)

ये मूर्ति क्या संदेश देती है?
ये सिर्फ एक मूर्ति नहीं है, बल्कि हम सबके लिए प्रेरणा है। नीलकंठ वर्णी ने रास्ते में कई मुश्किलें झेलीं, गर्म रेगिस्तान, ऊंचे पहाड़, घने जंगल। फिर भी वे नहीं रुके। उन्होंने लोगों को दया, ताकत और ज्ञान का रास्ता बताया।
ये मूर्ति तीन बड़ी बातें सिखाती है-
- छोटी उम्र में बड़ा त्याग
- मुश्किल वक्त में धैर्य
- पूरी जिंदगी अच्छे काम करना

अक्षरधाम अब और भी ख]eस क्यों हो गया?
अक्षरधाम पहले से ही दिल्ली का एक बहुत अच्छा घूमने की जगह है। वहां सुंदर बाग, नाव की सवारी, रोशनी का शो और कहानियां देखने को मिलती हैं। अब इस विशाल मूर्ति के आने से तीन नई चीजें जुड़ गई हैं-
- नई पहचान: ये मूर्ति अब अक्षरधाम का सबसे बड़ा अट्रैक्शन होगी।
- नई कहानी: अब लोग जान सकेंगे कि एक छोटा बालक कैसे महान संत बना।
- पूरा दिन मौज: अब लोग सुबह से शाम तक अक्षरधाम में घूम सकते हैं और कभी बोर न हों।

