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मानवता के नाम पहल: समाजसेवी गुरलाद सिंह काहलों ने ईरानी दूतावास को 5 लाख रुपये की सहायता दी

इंसानियत की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है, ये संदेश देते हुए समाजसेवी गुरलाद सिंह काहलों और उनके साथियों (Social worker Gurlad Singh Kahlon and his associates) ने 9 मार्च 2026 को  ईरानी दूतावास (Iranian Embassy) पहुंचकर एक मिसाल पेश की। उन्होंने हाल ही में ईरान के एक स्कूल में हुए दर्दनाक हादसे में मासूम बच्चों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के लिए पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद सौंपी।

गुरु नानक सोशल मिशन के अध्यक्ष गुरलाद सिंह काहलों (Gurlad Singh Kahlon, President of Guru Nanak Social Mission) के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचा। इस दल में डॉ. मुश्ताक, डॉ. अबरार, डॉ. इश्तियाक और एस. सुपिंदर सिंह गिल ()भी शामिल थे। ये सभी ‘कोशिश’ नामक पहल से जुड़े हैं, जो समुदायों के बीच शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए काम करती है।

दूतावास पहुंचकर प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के नेतृत्व और वहां की जनता के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों की मौत सिर्फ एक परिवार या देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए एक दुखद घटना है। इस त्रासदी ने हर उस शख्स का दिल झकझोर दिया है जो इंसानियत पर विश्वास करता है।

पांच लाख रुपये का चेक किया भेंट

अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए गुरलाद सिंह काहलों ने ईरानी राजदूत को 5 लाख रुपये का एक चेक सौंपा। ये राशि उन घायल बच्चों के इलाज और पीड़ित परिवारों की मदद के लिए दी गई है, ताकि उन्हें दवाओं और अन्य ज़रूरी मेडिकल सहायता में किसी तरह की कोई कमी न हो।

गुरलाद सिंह काहलों ने कहा- ‘इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म’

इस अवसर पर गुरलाद सिंह काहलों ने कहा, “इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। जब भी किसी मासूम की जाती है, ख़ासकर बच्चों की, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक साथ खड़े होने का समय होता है। दर्द की कोई सीमा नहीं होती, न ही कोई देश या धर्म देखा जाता है। हम सब इंसान हैं और इंसानियत ही हमारी पहचान है

पहले भी निभाई इंसानियत की मिसाल

गुरलाद सिंह काहलों ने इस मौके पर याद दिलाया कि कैसे इससे पहले पहलगाम हमले के बाद फंसे हुए पर्यटकों की मदद के लिए उन्होंने और उनके साथियों ने स्थानीय गुरुद्वारों में रहकर काम किया था। उस वक्त भी उन्होंने बिना किसी भेदभाव के सभी की मदद की थी, जो उनकी इसी मानवीय सेवा की भावना को दर्शाता है।

प्रतिनिधिमंडल ने अंत में दिवंगत बच्चों की आत्मा की शांति और उनके परिवारों को इस दुख की घड़ी में सहनशक्ति देने के लिए प्रार्थना की। 

मुख़्तार अब्बास नकवी

वहीं आपको बता दें कि मुख़्तार अब्बास नकवी भी सोमवार, 9 मार्च 2026 को ईरानी दूतावास पहुंचे। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनई (Iran’s Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei) की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया और दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि बुद्ध की धरती भारत हमेशा शांति का समर्थक रहा है। PM नरेंद्र मोदी ने भी लगातार कहा है कि शांति का रास्ता ही किसी भी समस्या का हल हो सकता है। युद्ध कोई हल नहीं है। हम प्रार्थना करते हैं कि संकट के इस सागर से जल्द से जल्द शांति का अमृत निकले।”

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