Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib सिर्फ़ एक इबादतगाह नहीं, बल्कि दिलों को सुकून देने वाली जगह है। पंजाब के Patiala शहर में मौजूद ये गुरुद्वारा आस्था, यकीन और रूहानी ताकत का बड़ा मरकज़ माना जाता है। यहां हर रोज़ सैकड़ों लोग अपनी परेशानियां, अपने ग़म और अपनी दुआएं लेकर आते हैं। कहा जाता है कि नौवें गुरु, Guru Tegh Bahadur जी ने यहां कदम रखे थे, और उनकी बरक़त आज भी इस जगह पर महसूस की जाती है।
“तेग बहादुर सिमरिए घर नौ निध आवै धाए, सभ थाई होइ सहाय” ये पंक्ति हमें याद दिलाती है कि जो सच्चे दिल से गुरु को याद करता है, उसकी मदद हर जगह होती है। गुरु तेग बहादुर जी ने इंसानियत की खातिर अपनी जान कुर्बान कर दी, ताकि धर्म और सच्चाई ज़िंदा रह सके। उनकी ज़िंदगी हमें सब्र, हिम्मत और सच्चे रास्ते पर चलने का पैग़ाम देती है।
लेहल गांव की सादगी और गुरु की आमद
जहां आज Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib भव्य गुरुद्वारा नज़र आता है, वहां कभी लेहल नाम का छोटा सा गांव था। चारों तरफ हरियाली थी, साफ पानी था और लोग सादी जिंदगी गुज़ारते थे। खेती-बाड़ी ही उनका सहारा थी। गांव के रहने वाले भाई भाग राम को जब पता चला कि गुरु तेग बहादुर जी पास के सैफाबाद में तशरीफ लाए हैं, तो उनके दिल में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने बड़े अदब और मोहब्बत के साथ गुरु साहिब से गुज़ारिश की कि वो उनके गांव भी आएं। गुरु जी ने उनकी दरख्वास्त कबूल की और कुछ वक़्त के लिए लेहल गांव में रूके।
गांव की फिज़ा, पेड़ों की छांव और साफ पानी देखकर गुरु जी बहुत खुश हुए। भाई भाग राम ने अर्ज़ की कि यहां लोग बस नहीं पा रहे, बस्ती टिक नहीं रही। तब गुरु जी ने दुआ दी कि एक दिन ये जगह खुशहाल और आबाद शहर बनेगी। आज वो दुआ हकीकत बन चुकी है। पटियाला आज पंजाब का मशहूर शहर है और Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib गुरुद्वारा देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक अपनी पहचान रखता है।

बीबी करमो की इल्तजा और “दुख निवारण” का नाम
लेहल गांव की बीबी करमो बहुत दुखी हालत में गुरु साहिब के पास आई। उन्होंने अर्ज़ किया कि उन्हें औलाद का सुख नहीं मिला और गांव में फैली बीमारी से बच्चे जान गंवा रहे हैं। उनका दिल टूटा हुआ था। गुरु तेग बहादुर जी ने रहमत भरी नज़र से उस जगह को दुआ दी। उन्होंने फरमाया कि गुरु जी ने कहा कि जो इंसान यहां सच्चे दिल और पूरे यकीन के साथ सरोवर में स्नान करेगा, उसे शरीर की बीमारियों और तकलीफों से राहत मिलेगी।
जो इंसान गुरु की बाणी (गुरु की सीख और शब्द) से जुड़ेगा, उसे दिल के दुख, ग़म और मानसिक परेशानियों से सुकून मिलेगा। इन अल्फाज़ ने लोगों के अंदर नई उम्मीद जगा दी। इसके बाद इस मुकाम को “दुख निवारण” कहा जाने लगा, यानी ग़म और तकलीफ दूर करने वाली जगह। आज भी श्रद्धालु सरोवर में पूरे यकीन के साथ स्नान करते हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि यहां आकर उनका दिल हल्का हो जाता है और उन्हें अंदरूनी सुकून मिलता है।
आज का दुख निवारण साहिब, खिदमत और इंतज़ाम
आज Gurudwara Sri Dukh Niwaran Sahib आने वाले ज़ायरीन के लिए हर तरह की सहूलत का इंतज़ाम है। जूते रखने की साफ जगह है, कराह प्रसाद लेने के लिए अलग काउंटर है, और बाहर से आने वालों के लिए सराय में रहने की बेहतर सुविधा है। कई लोग दूसरे शहरों से यहां आकर कुछ दिन ठहरते हैं, सिमरन करते हैं और सेवा में वक़्त गुज़ारते हैं। दिनभर गुरबाणी कीर्तन की आवाज़ गूंजती रहती है। जब कोई अंदर बैठकर शब्द सुनता है, तो दिल को गहरा सुकून मिलता है।

आस्था, उम्मीद और समाज के लिए पैग़ाम
Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib गुरुद्वारा सिर्फ दुआ की जगह नहीं, बल्कि समाज के लिए एक मज़बूत पैग़ाम भी है। गुरु जी की तालीम हमें सिखाती है कि कुदरत की हिफाज़त करें, नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहें और सच्चाई के रास्ते पर चलें। जब इंसान अपने अंदर मोहब्बत और सब्र को जगह देता है, तो समाज में अमन और सद्भाव अपने आप बढ़ता है। बहुत से लोग कहते हैं कि जब वो यहां आते हैं, तो उनके दिल का बोझ हल्का हो जाता है। ज़िंदगी की मुश्किलों से थके हुए लोग यहां आकर नई ताकत और नई रोशनी महसूस करते हैं।
Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib एक ऐसी मुकद्दस जगह है, जहां आकर इंसान अपने रब और गुरु के करीब महसूस करता है। Guru Tegh Bahadur जी की रहमत आज भी यहां आने वालों की जिंदगी रोशन कर रही है। जब भी मौका मिले, यहां हाज़िरी ज़रूर दें। Gurdwara Sri Dukh Niwaran Sahib आकर दिल को जो सुकून मिलता है, वह अल्फाज़ में बयान नहीं किया जा सकता। ये जगह यकीन दिलाती है कि सच्ची दुआ और सच्ची नीयत कभी खाली नहीं जाती।
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