फ़िल्मों के सितारों को हम सबने बड़े परदे पर चमकते हुए देखा है। उनके डायलॉग, गाने, स्टाइल और अंदाज़ हमारी यादों का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही सितारे हमारे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी कैसे शामिल हुए? साबुन, क्रीम, रेडियो, कपड़े, बाइक, सिगरेट, चाय इन सबके ज़रिए। यही कहानी सामने लाती है दिल्ली के Indira Gandhi National Centre for the Arts (IGNCA) में लगाई गई एक अनोखी Advertisement Exhibition ‘Stars Shine’। ये एग्ज़ीबिशन सिर्फ़ विज्ञापनों का कलेक्शन नहीं, बल्कि ये उस दौर की कहानी है जब फ़िल्मी सितारे सिर्फ़ एंटरटेनर नहीं, बल्कि विश्वास का चेहरा हुआ करते थे।
1950 से 1990: जब विज्ञापन इंतज़ार से देखे जाते थे
आज के समय में हम विज्ञापन आते ही चैनल बदल देते हैं, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब लोग ऐड देखने के लिए रुकते थे। 1950 से 1990 का समय भारतीय विज्ञापन जगत का गोल्डन पीरियड माना जाता है। उस समय टीवी सीमित थे, मैगज़ीन और अख़बार बड़े विज्ञापन का ज़रिया थे और रेडियो घर-घर की आवाज़ था। ‘Stars Shine’ Exhibition में 1950 से 1990 तक के विज्ञापनों को दिखाया गया। ये विज्ञापन बताते हैं कि उस समय फ़ैशन, सोच और भरोसा कैसे बनता था।

जब सिने सितारे बने ब्रांड का चेहरा
फ़िल्मों के अलावा विज्ञापन ही ऐसा ज़रिया रहा है जिसने फ़िल्मी चेहरों को आम लोगों की ज़िंदगी से जोड़ा। लोग अपने पसंदीदा अभिनेता और गायकों पर आंख मूंदकर भरोसा करते थे। यही वजह थी कि कंपनियां अपने प्रोडक्ट के प्रचार के लिए सिने सितारों को आगे लाती थी। Stars Shine एग्ज़ीबिशन में दिखाया गया कि कैसे सिनेमा और विज्ञापन एक-दूसरे के पूरक बने। फ़िल्मी सितारों की लोकप्रियता ने प्रोडक्ट को पहचान दी और प्रोडक्ट ने सितारों को घर-घर पहुंचा दिया।
सिर्फ़ अभिनेता नहीं, सिंगर्स भी बने ऐड का हिस्सा
Stars Shine एग्ज़ीबिशन की एक ख़ास बात रही कि इसमें सिर्फ़ अभिनेता या अभिनेत्रियां ही नहीं, बल्कि संगीत की दुनिया के दिग्गज नाम भी शामिल हैं। बेगम अख़्तर, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, मोहम्मद रफी, मुकेश, मन्ना डे और महेंद्र कपूर जैसे महान गायकों को भी विज्ञापनों में देखा जा सकता है। आज ये कल्पना करना भी मुश्किल है कि ये सिंगर्स किसी प्रोडक्ट का प्रचार करते होंगे, लेकिन उस दौर में उनकी आवाज़ और छवि ही किसी ब्रांड के लिए सबसे बड़ी ताकत होती थी।

हेयर स्टाइल भी बना ब्रांड वैल्यू
एक समय था जब बालों का स्टाइल सिर्फ फ़ैशन नहीं, बल्कि पहचान हुआ करता था। सिर्फ़ अभिनेत्रियों का ही नहीं, बल्कि अभिनेताओं का हेयर स्टाइल भी ट्रेंड बनाता था। बालों की क्रीम बनाने वाली कंपनियों ने इस बात को बखूबी समझा। अशोक कुमार, प्रेमनाथ, किशोर कुमार, अजीत, प्रेम चोपड़ा और सुजीत कुमार जैसे अभिनेताओं के हेयर स्टाइल को विज्ञापनों में दिखाया गया। इन विज्ञापनों को देखकर युवा उसी तरह दिखना चाहते थे।

पर्दे के पीछे के सितारे भी बने ब्रांड
Stars Shine एग्ज़ीबिशन में ये भी दिखाया गया है कि सिर्फ़ कैमरे के सामने दिखने वाले सितारे ही नहीं, बल्कि फ़िल्म से जुड़ी कई हस्तियां भी विज्ञापनों का हिस्सा बनीं। बहुत कम लोगों को पता है कि मशहूर फ़िल्म लेखक सलीम ख़ान, लेखक के रूप में पहचान बनाने से पहले विज्ञापनों में काम कर चुके थे। इक़बाल रिज़वी ने DNN24 को बताया कि सलीम ख़ान मे अपने वक़्त में मॉडलिंग भी थी। उनकी तस्वीरें देखकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं। इसी तरह अमरीश पुरी जैसे कलाकारों के बेहद रेयर विज्ञापन भी इस एग्ज़ीबिशन में देखने को मिलते हैं।
‘Stars Shine’ नाम के पीछे की सोच
Stars Shine एग्ज़ीबिशन के क्यूरेटर इक़बाल रिज़वी बताते हैं कि इस एग्ज़ीबिशन में उन्हीं विज्ञापनों को शामिल किया गया है, जिन्हें किसी न किसी फ़िल्म स्टार या सिनेमा से जुड़ी हस्ती ने किया हो। इसी वजह से इसका नाम रखा गया – Stars Shine। इक़बाल रिज़वी बताते हैं कि जब इस एड प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ, तो ये साफ़ दिखा कि भारत में दो ही क्षेत्र ऐसे रहे हैं जहां सबसे ज़्यादा लोकप्रिय लोग जुड़े सिनेमा और स्पोर्ट्स। धीरे-धीरे आर्काइव में ऐसे कई ऐड मिले, जिन्हें बड़े सितारों ने किया था।
इक़बाल रिज़वी बताते हैं कि 50, 60 और 70 के दशक के ऐड बहुत कम बचे हैं और वही सबसे ज़्यादा रेयर हैं। तभी ये विचार आया कि क्यों न इन विज्ञापनों की एक एग्ज़ीबिशन की जाए। उनका मानना है कि पुराने विज्ञापन लोगों को नॉस्टैल्जिया से जोड़ते हैं। लोग अपने बचपन और पुराने समय को फिर से महसूस करते हैं। यही इस एग्ज़ीबिशन की सबसे बड़ी ताकत है।

विज्ञापन भी हैं इतिहास का हिस्सा
IGNCA के मीडिया हेड अनुराग पुनेठा कहते हैं कि भारत में विज्ञापन अपने आप में एक कहानी रहे हैं। उनके मुताबिक, एक समय था जब लोग विज्ञापन देखने के लिए टीवी के सामने बैठे रहते थे। आज की तरह उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जाता था। इस एग्ज़ीबिशन का मक़सद लोगों को उस दौर की याद दिलाना है और ये समझाना है कि विज्ञापन सिर्फ़ सेल्स का ज़रिया नहीं, बल्कि समाज का आईना भी होते हैं।

अनुराग पुनेठा कहते हैं कि आज सोशल मीडिया का दौर है, इन्फ्लुएंसर्स जानकारी और पहुंच का एक अहम ज़रिया बन चुके हैं, इसलिए उनके साथ कोलैबोरेशन करना कोई गलत बात नहीं है। ये एग्ज़ीबिशन नई पीढ़ी के लिए इसलिए भी ज़रूरी है, क्योंकि इससे उन्हें विज्ञापनों का इतिहास के बारे में पता चलेगा और वो समझेगे कि एक समय में विज्ञापन किस तरह बनाए जाते थे और समाज पर उनका क्या असर होता था।
श्रद्धांजलि और यादों का सम्मान
इस एग्ज़ीबिशन में कई कलाकारों को श्रद्धांजलि भी दी गई हैं। मशहूर विज्ञापन जगत के दिग्गज पियूष पांडे को भी विशेष रूप से याद किया गया है। इसी तरह, धर्मेंद्र के निधन के बाद उनके विज्ञापनों को एक जगह रखकर श्रद्धांजलि दी गई। रामायण के किरदार राम और सीता निभाने वाले अरुण गोविल और दीपिका चिखलिया के विज्ञापन लगाएं गए।
विज़िटर की नज़र से एग्ज़ीबिशन
Stars Shine एग्ज़ीबिशन देखने आईं शर्मिष्ठा शर्मा बताती हैं कि ये एग्ज़ीबिशन बहुत ख़ूबसूरत और इमोशनल है। पुराने सितारों के पोस्टर्स देखकर बचपन की यादें ताज़ा हो जाती हैं। वहीं अंकिता कुमारी कहती हैं कि इतने सारे पुराने ब्रांड्स और चेहरों को एक साथ देखकर उन्हें एहसास हुआ कि कैसे विज्ञापन समय के साथ बदलते गए। लक्स ब्रांड के सभी एड लगाएं गए जो काफ़ी दिलचल्प है। शरद कुमार जैसे विज़िटर्स के लिए ये एग्ज़ीबिशन उनके दौर की झलक है, जहां धर्मेंद्र, विनोद खन्ना और दूसरे सितारों के विज्ञापन उन्हें अतीत में ले जाते हैं।

एक चलता हुआ आर्काइवल सफ़र
‘Stars Shine’ Exhibition सिर्फ़ एक इवेंट नहीं, बल्कि एक लगातार जारी आर्काइव प्रोजेक्ट है। IGNCA लगातार पुराने मैगज़ीन, ऐड्स और मटेरियल इकट्ठा कर रहा है। लोगों से भी अपील की जा रही है कि अगर उनके पास पुराने विज्ञापन या मैगज़ीन हों, तो वो इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनें।‘Stars Shine’ एग्ज़ीबिशन हमें बताती है कि फ़िल्मी सितारे सिर्फ़ स्क्रीन तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने हमारे घरों, हमारी सोच और हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी जगह बनाई।
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