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Masood Hussain: रंगों में कश्मीर की रूह को समेटने वाले कलाकार

श्रीनगर की वादियों में जन्मे Masood Hussain अपनी कला के ज़रिए कश्मीर की रूह को जीवंत करने वाले मशहूर कलाकार हैं। उनकी पेंटिंग्स केवल रंगों का मेल नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और भावनाओं की गहराई को उजागर करने वाली कहानियां हैं। Masood Hussain की कला आम दर्शकों से लेकर बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों को भी प्रभावित कर चुकी है। आमिर ख़ान, विधु विनोद चोपड़ा, करण जौहर और अनिल कपूर जैसे सितारे भी उनकी कृतियों के प्रशंसक हैं।

संघर्ष से पहचान तक: एक कलाकार की यात्रा

1953 में श्रीनगर में जन्मे Masood Hussain का बचपन से ही पेंटिंग की ओर झुकाव था। दिलचस्प बात ये थी कि उनके परिवार में कोई भी आर्ट से जुड़ा नहीं था, लेकिन उनके पिता ने उनके ख़्वाबों को पर दिए। वे उनके लिए रंग लाते, और छोटी उम्र में ही मसूद अपनी पेंटिंग्स बनाकर अपने पिता को दिखाते थे। यह सफर उन्हें मुंबई के प्रतिष्ठित सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट तक ले गया, जहां उन्होंने फाइन आर्ट और ग्राफिक डिज़ाइन की पढ़ाई की।

मुंबई में पढ़ाई के बाद Masood Hussain एडवर्टाइज़िंग की दुनिया में चले गए, जहां उनकी मुलाकात कई कलाकारों से हुई। उन्होंने वहां से प्रेरणा ली, सीखना शुरू किया और जल्द ही खुद की एक पहचान बना ली। लेकिन उनका मन कश्मीर की ओर ही खिंचता रहा। Masood Hussain वापस कश्मीर लौटे और वहां की संस्कृति, परंपराओं, खूबसूरत नज़ारों और आम लोगों की जिंदगी को अपनी पेंटिंग्स में उकेरने लगे।

Masood Hussain की कला में संवेदना और इतिहास की झलक

Masood Hussain की पेंटिंग्स में हकीकत और भावनाओं का अनूठा मेल देखने को मिलता है। उनकी कृति “A Peep Out Of The Past” इतनी प्रभावशाली थी कि मशहूर कश्मीरी कवि आगा शाहिद अली ने इसे अपने चर्चित कविता संग्रह “The Country Without a Post Office” के कवर पर जगह दी। शाहिद अली ने उनकी इस पेंटिंग को देखकर कहा था, “यह कला अकेलेपन और गहराई से रची गई है, इसे बड़े साहस के साथ उकेरा गया है, और यह कश्मीरी समुदाय की सुंदरता और संघर्ष को दर्शाती है।”

गांधी के साथ एक अनोखा सफ़र

2019 में, महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर, मसूद हुसैन ने आयरिश कवि गेब्रियल रोसेनस्टॉक के साथ मिलकर “Walk with Gandhi: Bóthar na Saoirse” नामक किताब पर काम किया। इस पुस्तक में हुसैन की खूबसूरत वाटर कलर पेंटिंग्स और रोसेनस्टॉक की हाइकु और गद्य रचनाएं एक साथ पेश की गईं। इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने इस पुस्तक की प्रशंसा करते हुए कहा, “यह किताब गांधी के जीवन को एक नए दृष्टिकोण से दर्शाती है—यह दुख, खुशी, गंभीरता और चंचलता का एक अनोखा मिश्रण है, जिसे पढ़कर दुनिया भर के लोग प्रभावित होंगे।”

कश्मीर की संस्कृति को बचाने की कोशिश

Masood Hussain की कला केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि ये कश्मीर की संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का भी एक ज़रिया है। उनकी पेंटिंग “Shehr i Khas, Kashmir” और “Rural Kitchen of Kashmir” कश्मीरी जीवनशैली की झलक पेश करती हैं। उनका मानना है,”मेरी कला सिर्फ रंगों और ब्रश का खेल नहीं है, बल्कि यह कश्मीर की आत्मा को दुनिया के सामने लाने की एक कोशिश है।”

उन्होंने कई एग्ज़ीबिशन कश्मीर से बाहर आयोजित की हैं और कश्मीर के ऐतिहासिक धरोहरों और वास्तुकला को बचाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि कश्मीर में कला और संस्कृति का बहुत नुकसान हुआ है, लेकिन वे अपनी कला के माध्यम से इसे सहेजने का प्रयास कर रहे हैं।

कश्मीरी कलाकारों के लिए नई राह

Masood Hussain केवल एक कलाकार ही नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय कला सम्मेलनों का आयोजन किया ताकि स्थानीय कलाकारों को विश्वस्तरीय मंच मिल सके। वे कहते हैं, “कश्मीर में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच और अवसरों की जरूरत है।”

लेकिन एक चुनौती भी बनी हुई है। उनका मानना है कि कश्मीर में कलाकारों के बीच संवाद की कमी है। वे कहते हैं, “मुझे नहीं पता कि मेरे ही राज्य में कितने कलाकार हैं और वे किस तरह का काम कर रहे हैं। हमें एक ऐसा स्थान चाहिए जहां कलाकार मिलकर चर्चा कर सकें, काम कर सकें और एक-दूसरे से सीख सकें।”

भविष्य की योजना: इतिहास को रंगों में संजोना

आज के वक्त में मसूद हुसैन एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें वे कश्मीर के इतिहास को 50 से 60 पेंटिंग्स के माध्यम से चित्रित करेंगे। इनमें से 12 पेंटिंग्स पूरी हो चुकी हैं, और ये सीरीज कश्मीर की विरासत को रंगों में समेटने का एक ऐतिहासिक प्रयास होगी। इसके अलावा, हाल ही में गोवा लिटरेरी फेस्टिवल में उनकी एक किताब रिलीज़ हुई, और वे एक अन्य किताब पर भी काम कर रहे हैं।

कला की अमर विरासत

Masood Hussain का जीवन केवल चित्र बनाने तक सीमित नहीं है। वे संस्कृति को बचाने, कला को नई पहचान देने और अगली पीढ़ी को प्रेरित करने का भी कार्य कर रहे हैं। उनकी हर कृति एक कहानी बयां करती है, एक भाव जगाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है। उनका ब्रश और रंग केवल चित्र नहीं उकेरते, बल्कि कश्मीर की आत्मा, संघर्ष, सुंदरता, दर्द और आशा को भी अमर बना देते हैं।

आज जब भी कोई उनकी पेंटिंग देखता है, तो वह सिर्फ रंगों को नहीं, बल्कि कश्मीर की रूह को देखता है। मसूद हुसैन की कला आने वाले सालों तक लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेगी, क्योंकि यह सिर्फ चित्र नहीं, बल्कि संस्कृति और संघर्ष की जीवंत कहानी है।

ये भी पढ़ें: कश्मीर की पहचान: Nooraari Crafts से महिलाओं की नई उड़ान

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