Tuesday, March 3, 2026
22.4 C
Delhi

प्रोफे़सर कौसर मज़हरी: मिट्टी, सोच और नज़र का अद्भुत संगम

गालिब अकादमी, नई दिल्ली में एक ख़ास समारोह का आयोजन किया गया, जहां डॉ. मुश्ताक़ सदफ़ की किताब *”कौसर मज़हरी: असरार-व-आशार”* का विमोचन हुआ। इस मौके़ पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति, प्रोफेसर मज़हर आसिफ़ ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “प्रोफे़सर कौसर मज़हरी से मेरा रिश्ता सिर्फ़ सोच और नज़र का नहीं, बल्कि मिट्टी का भी है। उनकी साहित्यिक उपलब्धियां मेरे लिए गर्व की बात हैं, क्योंकि वे मेरी मिट्टी और गांव से जुड़े हैं।”

समारोह में प्रोफे़सर मज़हर आसिफ़ मुख्य अतिथि थे। उन्होंने भोजपुरी भाषा में बात कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। प्रो. कौसर मज़हरी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता प्रसिद्ध लेखक और कवि प्रो. खालिद महमूद ने की। उन्होंने कहा, “प्रो. कौसर मज़हरी के साहित्यिक और शैक्षणिक योगदान ने हमेशा प्रेरणा दी है। उनके नेतृत्व में जामिया का उर्दू विभाग नई ऊंचाइयां छुएगा।” विशेष अतिथि प्रो. अनवर पाशा ने कहा, “प्रो. मज़हरी की ख़ासियत है कि वे असहमति को सहजता से स्वीकारते हैं और दूसरों को भी अपनी बात कहने का मौका देते हैं।”

प्रो. शहज़ाद अंजुम ने उनके लेखन को साहसी और बेबाक बताया। उन्होंने कहा,”उनकी रचनाएं कविता, कथा, शोध और आलोचना के हर पहलू को छूती हैं। प्रसिद्ध कथाकार प्रो. खालिद जावेद ने उन्हें “प्रतिरोध और प्रामाणिकता का प्रतीक” कहा, जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. अबू बक्र इबाद ने उनके लेखन को उनके व्यक्तित्व का आईना बताया।

प्रो. मज़हरी के बेटे मौलाना सादुल्लाह एहसान नदवी ने उनके सिखाने के तरीकों पर चर्चा की और कहा, “उन्होंने हमें सिर्फ़ अनुकरण करने वाला नहीं, बल्कि आलोचनात्मक सोचने वाला बनाया।” पुस्तक के लेखक डॉ. मुश्ताक़ सदफ़ ने पुस्तक की सामग्री और इसकी अहमियत पर रोशनी डाली। अपने सम्मान के लिए शुक्रिया अदा करते हुए, प्रो. क़ौसर मज़हरी ने कहा, “यह मेरे ज़िंदगी का एक जज़बाती और फ़रामोश न करने वाला लम्हा है।”

कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों और कवियों ने भाग लिया। वरिष्ठ शायर मतीन अमरोहवी ने बधाई कविता सुनाई। संचालन शायर मोईन शादाब ने किया और गालिब अकादमी के सचिव डॉ. अकील अहमद ने धन्यवाद ज्ञापन किया। शामिल अतिथियों में सरवत उस्मानी, मज़हर महमूद, निगार अज़ीम, तसनीम कौसर, अनवर हक़, शोएब रज़ा फ़ातमी, तौहीद ख़ान और ख़ालिद मुबश्शिर जैसी शख़्सियत मौजूद रही।

इस ख़बर को आगे पढ़ने के लिए hindi.awazthevoice.in पर जाएं

ये भी पढ़ें: जयपुर की वीणा, मीणा जनजाति की कला को दे रहीं नई पहचान

आप हमें Facebook, Instagram, Twitter पर फ़ॉलो कर सकते हैं और हमारा YouTube चैनल भी सबस्क्राइब कर सकते हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot this week

अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

U.S.-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप का फ्रेमवर्क U.S.-इंडिया सिक्योरिटी कोऑपरेशन को तेज़ करेगा, इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेगा।

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Topics

अमेरिका और भारत की रक्षा साझेदारी को हकीकत में बदलना

U.S.-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप का फ्रेमवर्क U.S.-इंडिया सिक्योरिटी कोऑपरेशन को तेज़ करेगा, इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाएगा और इंडस्ट्रीज़ को जोड़ेगा।

शहंशाहों का कारवां और रेशमी धागों का जादू: Parsi Gara, जब फ़ारस के फूल हिंदुस्तान की मिट्टी में मुस्कुराए

‘गारा’ फारसी लैंग्वेज का लफ्ज़ (‘Gara’ is a Persian word) है, जिसका मतलब होता है ‘सुई से काम करना’ या ‘सिलाई। लेकिन पारसी गारा में ये सिलाई जादू में बदल गई।

आख़िर पंजाब में माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध क्यों हो रहा है?

माइग्रेंट वर्कर्स का विरोध करने वाले लोग दावा करते हैं कि पंजाब में 70 लाख से 1.5 करोड़ के बीच माइग्रेंट वर्कर्स रहते हैं। लेकिन सच तो ये है कि किसी के पास साफ़, वेरिफाइड नंबर नहीं हैं। वे जो आंकड़े बताते हैं, वे असलियत से बहुत दूर लगते हैं।

Gurdaspur killings: सीमा पार से खतरों का बदलता चेहरा

पंजाब के गुरदासपुर ज़िले में एक बॉर्डर आउटपोस्ट पर दो पुलिसवालों - असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर गुरनाम सिंह और होम गार्ड अशोक कुमार की हत्या ने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बढ़ते सुरक्षा ख़तरों (Gurdaspur killings: Changing face of cross-border threats) को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

Goodword Publication: बच्चों में तालीम, तसव्वुर और पॉज़िटिव सोच की एक रोशन मिसाल

Goodword दरअसल CPS International यानी सेंटर फॉर पीस एंड स्पिरिचुअलिटी से...

Related Articles

Popular Categories