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तौहीदा अख़्तर का बुटीक बना महिलाओं के लिए प्रेरणा: कौशल और आत्मनिर्भरता की कहानी

कश्मीर घाटी में कई लोग अपने जुनून और मेहनत से समाज में बदलाव लाने के लिए अहम किरदार अदा कर रहे हैं। एक ऐसी ही दिलचस्प कहानी तौहीदा अख़्तर की है। तौहीदा श्रीनगर के बाहरी इलाके में बसे लावे पोरा के गुंड हुसी भट इलाके से ताल्लुक रखती हैं। मुश्किल हालातों को पारकर अपने सपनों को उड़ान देकर उन्होंने वो कर दिखाया जो कई लोगों के लिए इंस्पिरेशन बन गया है। घर के हालात ज़्यादा अच्छे नहीं थे। गुरबत में ज़िंदगी गुज़र बसर करके क्राफ्ट सीखना शुरू किया। आज तौहीदा शाइनिंग स्टार सोसाइटी के नाम से एक NGO भी चलाती हैं और मुफ्त में ट्रेनिंग भी देती हैं। 

तौहीदा ने बात करते हुए कहा कि, मेरे पापा मजदूरी करते थे। घर के हालात ज़्यादा अच्छे नहीं थे। मैं घर में सबसे बड़ी थी और घर के हालातों को मद्देनज़र रखते हुए क्राफ्ट्स सीखना शुरू किया। तौहीदा पहले स्वेटर बनाती थीं इसके बाद फिर सोज़नी वर्क, कानी वर्क और कुरैशी वर्क भी सीखा। इस हुनर को सीखने से पढ़ाई के साथ-साथ  घर के खर्चे में आसानी हो जाती थीं। टेलर की मदद से कटिंग टेलरिंग का वर्क सीखना शुरू किया। 

तौहीदा 1200 से ज़्यादा लड़कियों को दे चुकी है ट्रेनिंग

शाइनिंग स्टाफ बुटीक, आज एक ट्रेनिंग सेंटर में तब्दील हो गया है। उनका ट्रेनिंग सेंटर अब तक करीब 1200 से ज़्यादा लड़कियों को ट्रेनिंग दे चुका है। जिसमें से कई अब अपना सेंटर चला रही हैं। निकहत ने बात करते हुए कहा कि, ‘’मैंने तौहीदा मैडम का सोशल मीडिया पर वीडियो देखा था। मैं वीडियो देखकर काफ़ी इंस्पायर हुई हूं और मैडम की तरह बनना चाहती हूं क्योंकि मुझे खुद शौक है कि मैं टेलरिंग सीखूं और दूसरों को भी सिखाऊं। मैम बहुत अच्छे तरीके से समझाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि मैंने कटिंग, ड्राफ्टिंग और सूट बनाना सीखा है। ये सब फ्री कोर्स में सिखाया गया है। इसलिए मैं चाहती हूं कि अभी आप लोग के पास टाइम है आप लोग आए और सीखों। ‘’

सोबिया खुर्शीद ने DNN24 से बात करते हुए बताया कि, ‘’मेरी हॉबी थी कि मैं टेलरिंग सीखूं लेकिन जब मैं इंस्टाग्राम स्क्रॉल कर रही थी तो मैडम का वीडियो आया जिसमें फ्री कोर्स ऑफर कर रही थी। इस कोर्स के ज़रिए मेरी हॉबी को एक पात मिल गया। मेरी फैमिली भी बहुत सपोर्टिंग है। मैडम भी बहुत अच्छे से समझाती है और जो भी डिफिकल्टी आती है तो मैडम अच्छे से सॉल्व कर देती है। मैंने टेलरिंग सीखी है तो, मैं किसी का सूट की सिलाई कर सकती हूं। इस हुनर से महीने 10 हज़ार से 15 हज़ार तक कमा सकती हूं।’’

तौहीदा अख्तर का मुफ़्त मे ट्रेनिंग देने का मक़सद हर किसी लड़की या लड़का को हुनरमंद बनाना है। साल 2018 में डायरेक्टरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन ने रजिस्ट्रेशन नंबर दिया है। फिर तौहीदा ने ट्रेनिंग देना शुरू किया। इस सफ़र में उनके और 35 साथी हैं जो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़कियों को फाइनेंशली इंडिपेंडेंट बनाने के मिशन पर काम कर रहे हैं।

सिलाई, कटिंग मेहंदी लगाना और कैलीग्राफ़ी जैसी एक्टिविटी महिलाओं को सिखाई जाती है। तौहीदा को इस बेहतरीन काम के लिए कई अवॉर्ड से नवाज़ा जा चुका है। 

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